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बड़ा खुलासा, लंदन में माल्या की मदद कर रही थी कांग्रेस!

विजय माल्या को भारत सौंपने का रास्ता साफ हो चुका है। लंदन की कोर्ट उसे भारत को सौंपने का आदेश दे चुकी है। इस बीच, एक ऐसा तथ्य सामने आया है जो इस बात की ओर इशारा करता है कि लंदन में चल रही कानूनी दांवपेच में कांग्रेस पार्टी विजय माल्या की मदद कर रही थी। यह बात कहीं और नहीं बल्कि वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट के फैसले में ही दर्ज है। जज ने माना है कि विजय माल्या के प्रत्यर्पण का मामला देख रहे सीबीआई अधिकारी राकेश अस्थाना के खिलाफ जो आरोप लगाए गए हैं उनके पीछे इस केस को प्रभावित करने की मंशा झलकती है। राकेश अस्थाना के खिलाफ कांग्रेस पार्टी सबसे ज्यादा आक्रामक रही है। जबकि वो इसी मामले में छुट्टी पर भेजे गए सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा का बचाव करती रही। यानी लंदन की कोर्ट ने इस बात को माना कि राकेश अस्थाना को लेकर जो विवाद भारत में है उसके पीछे माल्या को बचाने की नीयत है। करीब एक हफ्ते पहले ही अगस्त वेस्टलैंड घोटाले के बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल को दुबई से भारत लाया गया है। उसे भी कांग्रेस ने ही वकील मुहैया कराया है। ऐसे में विजय माल्या को कानूनी मदद का ये दावा कांग्रेस पार्टी को लेकर कई तरह के सवाल पैदा कर रहा है। एक अपील: कृपया पोस्ट कॉपी न करें, लिंक शेयर करें

माल्या और कांग्रेस का गुप्त कनेक्शन

अगस्ता वेस्टलैंड के बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल की तरह ही विजय माल्या का केस भी राकेश अस्थाना ने ही हैंडल किया था। लेकिन अचानक सीबीआई के डायरेक्टर आलोक वर्मा ने उनके पर कतरने शुरू कर दिए। जिसे लेकर सीबीआई में तूफान मच गया। जानकारों का मानना है कि संभवत: कांग्रेस के इशारे पर आलोक वर्मा जानबूझकर राकेश अस्थाना से उलझे ताकि झगड़ा बढ़े और उन्हें दागी अफसर साबित किया जा सके। एक बार राकेश अस्थाना पर दागी अफसर का ठप्पा लग जाता तो विजय माल्या आराम से लंदन की कोर्ट में कह सकता था कि उसके केस की जांच कर रहा सीबीआई अफसर खुद भ्रष्टाचार में फंसा हुआ है। मोदी सरकार इस खेल को समझ चुकी थी। लिहाजा उसने बीच का रास्ता निकाला और आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना दोनों को सस्पेंड करने के बजाय छुट्टी पर भेज दिया। छुट्टी पर भेजने का मतलब हुआ कि उन्हें कोई सजा नहीं दी गई है। कांग्रेस ने मोदी सरकार की इस चाल की कल्पना नहीं की थी। इसके बावजूद विजय माल्या ने लंदन की कोर्ट में दलील दे दी कि राकेश अस्थाना खुद भ्रष्ट हैं और एक राजनीति के तहत उसे फंसाने की कोशिश कर रहे हैं। माल्या के आरोपों पर जज ने कहा कि ‘मुझे इस बात के कोई साक्ष्य नहीं मिले कि अभियोजन पक्ष भ्रष्ट है और यह केस राजनीतिक फायदे के लिए चलाया जा रहा है।’ यह भी पढ़ें: राहुल गांधी का हाथ माल्या की कैलेंडर गर्ल के साथ

माल्या के बचाव में ‘कांग्रेस का आदमी’

नवंबर 2017 में प्रत्यर्पण का ये मुकदमा जब एक अहम मोड़ पर था तभी एक अजीब घटना हुई। विजय माल्या ने सीबीआई की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने के लिए लंदन यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज के प्रोफेसर लॉरेंस सेज़ (Professor Lawrence Saez) को कोर्ट में खड़ा कर दिया। प्रोफेसर लॉरेंस को एक एक्सपर्ट के तौर पर कोर्ट में लाया गया। लंदन में हमारे सूत्रों के मुताबिक प्रोफेसर लॉरेंस सेज़ के दिल्ली में कांग्रेस पार्टी के एक बहुत बड़े नेता से बेहद करीबी रिश्ते है। इसके अलावा उसकी गांधी परिवार के साथ संपर्क की भी बात कही जा रही है। कोर्ट में प्रोफेसर लॉरेंस ने कबूला था कि वो माल्या के वकील आनंद दुबे के कहने पर पेश हुआ है। उसने न सिर्फ सीबीआई को गैर-जिम्मेदार और अविश्वसनीय जांच एजेंसी साबित करने की कोशिश की, बल्कि माल्या और सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के साथ समानता स्थापित करने की भी कोशिश की। उसने कोर्ट को बताया कि सीबीआई जिस तरह से वाड्रा और वीरभद्र सिंह को परेशान कर रही है, उसी तरह माल्या को भी परेशान किया जा रहा है। यह सवाल उठ रहा है कि सीबीआई को गलत साबित करने के लिए जो दोनों उदाहरण दिए गए वो दोनों ही कांग्रेस से जुड़े हुए क्यों थे? क्या यह महज संयोग था? यह भी पढ़ें: माल्या इकलौता नहीं, कांग्रेस ने इनको भी माल बांटा

माल्या को बचाने के पीछे क्या मकसद?

दरअसल राकेश अस्थाना पर लगे आरोपों के पीछे एक बड़ा नाम प्रशांत भूषण का भी है। पूरे घटनाक्रम पर नजर डालें तो ऐसा लगता है कि प्रशांत भूषण इस मामले में कांग्रेस के इशारे पर चल रहे थे। वो भारतीय अदालतों में राकेश अस्थाना पर गंभीर आरोप लगाकर उन्हें दागी और भ्रष्ट साबित करने की कोशिश करते रहे। हालांकि वो इसमें नाकाम हो गए। इधर राकेश अस्थाना की नियुक्ति के खिलाफ याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने भी खारिज कर दिया है। लेकिन यह सवाल पूछा जा सकता है कि कांग्रेस को माल्या को बचाने से क्या फायदा? दरअसल विजय माल्या कांग्रेस की सरकार के समय ही बैंकों से मोटी रकम लोन के तौर पर मिली थी। इसका एक बड़ा बाद का है, जब माल्या की हालत खस्ता होने लगी थी और वो लोन वापस करना बंद कर चुका था। माल्या अगर भारत आया तो इससे मोदी सरकार के खिलाफ कांग्रेस से एक बड़ा मुद्दा छिन जाएगा। साथ ही भारत आने के बाद उसने पूछताछ में कांग्रेस के अपने मददगारों के नाम ले लिए तो मुश्किल खड़ी हो जाएगी।

नीचे आप लंदन की वेस्टमिंस्टर कोर्ट के फैसले की पूरी कॉपी देख सकते हैं। उससे पहले हमने फैसले के उस हिस्से की फोटो दी है, जिसके आधार पर माल्या और कांग्रेस के रिश्ते का शक जताया जा रहा है।

(जर्मनी में भारतीय मूल के पत्रकार आशीष कुमार के इनपुट्स के साथ दिल्ली में न्यूज़लूज ब्यूरो की रिपोर्ट)

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