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राजीव गांधी के ‘हत्यारों’ से सोनिया को इतना प्रेम क्यों?

कांग्रेस की नेता सोनिया गांधी ने 9 दिसंबर को अपने 72वां जन्मदिन मनाया। इस मौके पर सुबह-सुबह उनके बेटे और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक तस्वीर ट्वीट की, जिसमें सोनिया गांधी डीएमके नेताओं के साथ मुलाकात कर रही हैं। डीएमके के नेता स्टालिन, ए राजा और टीआर बालू ने सोनिया गांधी से मिलकर उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं और शॉल ओढ़ाकर उनका अभिनंदन किया। सोनिया ने उनके साथ कुछ वक्त भी बिताया। राहुल गांधी के ट्वीट के मुताबिक सोनिया ने डीएमके के नेताओं के साथ राजनीतिक गठबंधन की बात की। लेकिन क्या आपको पता है कि डीएमके वो पार्टी है जिस पर सोनिया गांधी के पति राजीव गांधी की हत्या में शामिल होने का आरोप है? कई लोगों ने इस बात पर हैरानी जताई है कि सोनिया गांधी ने अपने जन्मदिन जैसे मौके पर सबसे पहली मुलाकात अपने ही पति की हत्या में शामिल रही पार्टी के नेताओं से क्यों की? यह भी पढ़ें: किसके इशारे पर भारत में दिलचस्पी ले रही है केजीबी

राजीव गांधी हत्याकांड में आया था नाम

दरअसल राजीव गांधी की हत्या के बाद जांच के लिए जैन कमीशन बनाया गया था। जिसने 1997 में अपनी अंतरिम रिपोर्ट में बताया था कि श्रीपेरेंबदूर में राजीव गांधी की हत्या की साजिश रचने वाले लिट्टे के आतंकवादी डीएमके के तब के नेताओं के सीधे संपर्क में थे। डीएमके को इस साजिश की भी जानकारी थी और उन्होंने हत्यारों की पूरी मदद भी की। आयोग ने डीएमके के खिलाफ इस मामले में कार्रवाई की भी सिफारिश की थी। यह बात भी किसी रहस्य से कम नहीं कि जैन कमीशन की जो फाइनल रिपोर्ट आई उसमें से ये पूरा हिस्सा ही गायब कर दिया गया। इसी को आधार बनाकर कांग्रेस ने तब की इंद्र कुमार गुजराल से समर्थन वापस लेकर उसे गिरा दिया था। कांग्रेस ने शर्त रखी थी कि डीएमके को सरकार से हटाया जाए। हैरानी की बात है कि 2004 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने उसी डीएमके के साथ गठबंधन कर लिया। तब सोनिया गांधी ने ये दलील थी कि सांप्रदायिक ताकतों के मुकाबले के लिए वो मजबूरी में ये राजनीतिक समझौता कर रही हैं। लेकिन ये साथ लंबे समय तक बना रहा। सिर्फ 2013 में 2जी घोटाले में अपने नेताओं के फंसने पर नाराज होकर डीएमके नेता करुणानिधि ने मनमोहन सरकार से समर्थन वापस ले लिया था। लेकिन अब एक बार फिर से डीएमके और कांग्रेस करीब आ गए हैं। यह भी पढ़ें: जानिए सोनिया गांधी क्यों इतना खटक रहा है अरुणाचल प्रदेश?

सोनिया को डीएमके से इतना प्यार क्यों?

यह सवाल हर किसी के मन में आता है कि क्या सिर्फ राजनीतिक मजबूरी या फायदे में कोई महिला अपने पति के हत्यारों से हाथ मिला सकती है? इतना ही नहीं सोनिया गांधी ने प्रियंका वाड्रा को राजीव गांधी के हत्यारों से मिलने जेल में भेजा था। इसके बाद प्रियंका ने ये कहकर सबको चौंका दिया था कि वो अपने पिता के हत्यारों को माफ करना चाहती हैं। जबकि भारतीय कानून में ऐसी कोई माफी नहीं मानी जाती। राजीव गांधी प्रियंका के पिता के साथ-साथ देश के बड़े नेता भी थे। बीजेपी सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी अक्सर इसके पीछे सोनिया के इरादों की तरफ इशारा करते रहे हैं। स्वामी का दावा है कि चाहे डीएमके के साथ दोबारा गठजोड़ हो या राजीव गांधी केस में सजा काट रहे हत्यारों को माफी, दोनों के पीछे सोनिया गांधी का दिमाग है। वो इशारों में ही सही कई बार यह बात कह चुके हैं कि सोनिया ने ही राजीव गांधी की हत्या करवाई और फिर पूरा इंतजाम किया कि हत्यारे छूट जाएं। यही कारण है कि महज राजनीतिक फायदे के लिए वो डीएमके से हाथ मिला लेती हैं। स्वामी का दावा रहा है कि सोनिया के पीछे रूसी खुफिया एजेंसी केजीबी का हाथ है और उसी ने देश के सबसे ताकतवर राजनीतिक परिवार में सोनिया के रूप में अपना जासूस फिट कराया है। इस दावे के समर्थन में हालांकि स्वामी ने कोई सबूत पेश नहीं किया है लेकिन सोनिया गांधी के फैसलों से उनके आरोप पहली नजर में ठीक भी लगते हैं।

दरअसल रूसी खुफिया एजेंसी केजीबी की भारतीय राजनीति में हमेशा से दिलचस्पी रही है। कांग्रेस के समय में भारत एक तरह से रूस का पिछलग्गू बना रहता है। यही कारण है कि उसकी खुफिया एजेंसी केजीबी की हमेशा ये कोशिश रहती है कि भारत में कांग्रेस ही सत्ता में रहे। भारत में रूस के हितों को साधने के लिए वो किस हद तक जा सकती है ये उसके पुराने रिकॉर्ड से ही जाना जा सकता है।

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