जानिए क्या है राहुल गांधी की ‘कुंभकरण लिफ्ट योजना’

राजस्थान के झुंझुनू में एक रैली में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बताया कि जब अशोक गहलोत मुख्यमंत्री हुआ करते थे तो उन्होंने ‘कुंभकरण लिफ्ट योजना’ शुरू की थी। तभी मंच के किनारे से किसी ने चिल्ला कर उनसे कहा कि कुंभकरण नहीं, कुंभाराम। राहुल गांधी कनफ्यूज से दिखे उन्हें समझ में नहीं आया कि गड़बड़ क्या हुई। लेकिन अनजाने में ही सही कांग्रेस अध्यक्ष ने एक सही जानकारी दे दी। यह बात सही है कि कांग्रेस पार्टी ने कुंभकरण लिफ्ट योजना शुरू की है। सच्चाई यह है कि ये स्कीम सिर्फ राजस्थान में नहीं, बल्कि पूरे देश में लागू है। आजादी के बाद से आज तक हजारों लोग इस इस स्कीम का फायदा भी पा चुके हैं। हर मुफ्तखोर, हरामखोर और रिश्वतखोर इस स्कीम का लाभार्थी है। जानते हैं वो कौन-कौन से लोग हैं जिन्होंने कुंभकरण लिफ्ट योजना का सबसे अधिक फायदा उठाया।

पत्रकार और लेखक

देश में ये दो तबके के लोगों को अगर सबसे बड़ा मक्कार कहा जाए तो गलत नहीं होगा। गांधी परिवार की ही कृपा से हजारों की संख्या में कांग्रेसी और वामपंथी कार्यकर्ता पत्रकार और लेखक का चोला ओढ़े बैठे हैं। ये वो हैं जो कहने को पत्रकार या लेखक हैं, लेकिन उनका काम गांधी परिवार के स्तुतिगान से ज्यादा कुछ नहीं है। इसके बदले में उन्हें निश्चिंत होकर सोने और भर पेट खाने का वरदान मिलता है। काम के नाम पर ये सिर्फ उतना करते हैं जितने से योजना के तहत मिलने वाले फायदे सुनिश्चित हो सकें। योजना के तहत इन दरबारी पत्रकारों और लेखकों को सरकारी अवॉर्ड्स भी मिलते हैं, जिन्हें एक इशारे पर उन्हें लौटाने को तैयार भी रहना होता है। इस तबके के कुछ बड़े लाभार्थी हैं- राजदीप सरदेसाई, बरखा दत्त, रवीश कुमार और पुण्य प्रसून वाजपेयी। इन सभी की खूबी यह है कि कई-कई महीने तक नौकरी से बाहर रहने के बावजूद इनका खर्चा-पानी और दारू मजे से चलती रहती है।

न्यायपालिका और अफसरशाही

कुंभकरण लिफ्ट योजना के बड़े लाभार्थियों में न्यायपालिका के माननीय न्यायाधीश और सरकारी दफ्तरों के बाबुओं की भी अच्छी खासी संख्या है। कांग्रेस के ढेरों नेताओं ने इस स्कीम का फायदा उठाते हुए अपने नालायक बेटे-बेटियों और दामादों को बिना किसी ज्ञान के सीधे न्यायपालिका में जज बनवा दिया। इन्हीं के कारण जज का काम अब खानदानी पेशे की तरह हो गया है। कुछ ऐसी ही स्थिति सरकारी अफसरों की है, जिन्होंने कुंभकरण लिफ्ट योजना का भरपूर लाभ उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। अफसरशाही का निकम्मापन हमेशा से मशहूर रहा है। इन्हें काम न करने के कारण ही जाना जाता है। लेकिन 2014 में मोदी सरकार ने आने के बाद अफसरों के लिए कुंभकरण लिफ्ट योजना पर रोक लगा दी। जिसके कारण अफसरों को काम भी करना पड़ रहा है। यही कारण है कि अफसर हर वो काम करते हैं जिससे बीजेपी की केंद्र और राज्य सरकारों को जनता के बीच बदनाम किया जा सके।
फिलहाल कांग्रेस की कुंभकरण लिफ्ट स्कीम पर जनता जली-कटी बातें कह रही हैं, उनमें से कुछ को आप नीचे पढ़ सकते हैं। हमारी आपसे अपील है कि इन्हें पढ़कर हमारे होनहार नेता राहुल गांधी का बिल्कुल भी मज़ाक न उड़ाएं।

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