कौन है क्रिश्चियन मिशेल? सोनिया गांधी से क्या है रिश्ता?

हथियारों के सौदे में कांग्रेस पार्टी के बड़े नेता कमीशन लेते हैं यह आरोप अक्सर लगाया जाता रहा है, लेकिन पहली बार इसके सबूत सामने आ गए हैं। 2010 में अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टरों की खरीद का मामला सोनिया गांधी के गले की फांस बन सकता है। क्योंकि डील में बिचौलिये का काम करने वाला ब्रिटिश नागरिक जेम्स क्रिश्चियन मिशेल भारतीय एजेंसियों के हत्थे चढ़ चुका है। उसे दुबई से भारत लाया गया है। इस घोटाले का खुलासा भारत से पहले इटली में हुआ था। वहां चली कानूनी कार्रवाई में यह बात साबित हुई थी कि सोनिया गांधी ने इस सौदे में 108 करोड़ रुपये बतौर कमीशन लिए थे। क्रिश्चियन मिशेल ने अपनी डायरी में सोनिया गांधी के लिए कोड वर्ड के तौर पर उनका नाम सिग्नोरा गांधी लिखा था। क्रिश्चियन मिशेल की ही डायरी से पता चला था कि इस सौदे में कई दूसरे बड़े राजनेताओं, फौजी अफसरों और पत्रकारों को दलाली दी गई है। अब जबकि क्रिश्चियन मिशेल भारत आ गया है इस हाईप्रोफाइल मामले की कई और परतें उतरेंगी। यह भी पढ़ें: अगस्ता वेस्टलैंड घोटाला, सोनिया गांधी ने मायके को भी नहीं बख्शा

सोनिया के लिए क्यों है बुरी खबर

दरअसल 2010 में हेलीकॉप्टर बनाने वाली इटली की कंपनी अगस्ता वेस्टलैंड से 12 हेलिकॉप्टर खरीदने का सौदा हुआ था। 12 हेलीकॉप्टरों के लिए कुल 3600 करोड़ रुपये देना तय हुआ था। लेकिन तभी खुलासा हुआ कि रिश्वतखोरी का खुलासा हो गया। डायरी में लिखा था कि मिसेज गांधी इस पूरी डील की मेन ड्राइविंग फोर्स थीं। क्योंकि वो सेना के एमआई-8 हेलीकॉप्टरों में नहीं उड़ना चाहतीं। बाकी कंपनियों के ऑफर्स को तरह-तरह के बहाने बनाकर खारिज कर दिया गया। भारत के ‘राजनीतिक परिवार’ से लेकर एयरफोर्स के अफसरों और रक्षा सचिव से लेकर सीएजी और सीवीसी जैसे दफ्तरों में किए गए कुल भुगतान का जिक्र इस डायरी में है। सबसे ज्यादा 108 करोड़ रुपये ‘राजनीतिक परिवार’ ने लिए। 22 करोड़ के करीब ‘एपी’ ने लिए, जिनके लिए माना जाता है कि वो अहमद पटेल हैं। इटली की अदालत में यह साबित हुआ कुल डील का 10% हिस्सा रिश्वत में देने की बात तय हुई थी। घूसखोरी का भंडाफोड़ होने के बाद 2010 में मनमोहन सिंह की सरकार ने डील रद्द कर दिया। इटली की कोर्ट की कार्रवाई में यह बात सामने आई थी कि भारत के ‘सबसे ताकतवर राजनीतिक परिवार’ ने सौदे में 125 करोड़ रुपये कमीशन लिया। चूंकि इस मामले का भंडाफोड़ इटली में ही हुआ था, लिहाजा वहां भी इस पर मुकदमा चला। मिलान शहर की अदालत के फैसले के पेज नंबर-193 और 204 पर कुल मिलाकर 4 बार सोनिया गांधी का नाम आया। इसमें उनके नाम की स्पेलिंग Signora Gandhi लिखा गया। कोर्ट ने कहा कि सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल ने बिचौलिए जरिए 125 करोड़ रुपये कमीशन लिया। कुल 225 करोड़ रुपए रिश्वत की लेन-देन हुई, जिसमें से 52% हिस्सा कांग्रेस के नेताओं को दिया गया। 28% सरकारी अफसरों को और 20% एयरफोर्स के अफसरों को मिला। बाकी करीब 50 करोड़ की रकम कुछ बड़े पत्रकारों को बांट दी गई। इस पूरी बंदरबांट की मास्टरमाइंड सोनिया गांधी ही थीं।

क्यों महत्वपूर्ण है क्रिश्चियन मिशेल

बिचौलिया मिशेल जून 2018 में भारतीय एजेंसियों की टिप पर दुबई में पकड़ा गया था। भारतीय एजेंसियों ने जब उसके प्रत्यर्पण की कोशिश शुरू की तो उसे रोकने के लिए कांग्रेस ने पूरी ताकत लगा दी। इस केस में सबसे खास बात यह है कि इस बिचौलिए ने 1997 से 2013 के बीच भारत के 300 चक्कर लगाए थे। जैसे ही घोटाला खुला वो भारत छोड़कर भाग गया। तब से कानूनी लड़ाई लगातार जारी है और अब ये अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। इससे पहले इटली की कोर्ट केस में फैसला सुना चुकी है और उसने मिसेज सिग्नोरा गांधी, मनमोहन सिंह, अहमद पटेल और ऑस्कर फर्नांडिस को दोषी माना है। इटली की अदालती कार्यवाही में क्रिश्चियन मिशेल की डायरी ने बेहद अहम रोल निभाया था। इसे सीबीआई को इटली की अदालत ने हैंडओवर किया है। इस डायरी में जिक्र है कि कैसे भारत सरकार में हर चरण पर उसने अपने एजेंट फिट कर रखे थे। सौदे से जुड़ी किसी भी मीटिंग का उसे सबसे पहले पता चल जाता था।

गांधी परिवार का करीबी है मिशेल

क्रिश्चियन मिशेल और उसके पिता वॉल्फगॉन्ग मिशेल इंदिरा के जमाने से गांधी परिवार के साथ रिश्ते रहे हैं। वॉल्फगॉन्ग भी हथियारों की दलाली का ही काम करता था। वॉल्फगॉन्ग 1970 के दशक में इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री रहते होने वाले हथियार सौदों में बिचौलिए का काम करता था। वो अक्सर दिल्ली आता-जाता रहता था। उसके इंदिरा गांधी, राजीव और सोनिया तीनों से मिलना-जुलना था। तब एयरबस, डेसॉल्ट के सौदों के अलावा ब्रिटिश कंपनियों के भारत में कारोबार में वो दलाल काम करता था। अगस्त 2012 में उसकी मौत हो गई थी। मरने से पहले 90 के दशक में ही उसने अपना दलाली का सारा धंधा बेटे क्रिश्चियन मिशेल को सौंप दिया था। द पायनियर अखबार ने इस बारे में 2013 में 2 रिपोर्ट्स छापी थीं। 90 के दशक में जब नरसिंह राव प्रधानमंत्री थे तब वॉल्फगॉन्ग मिशेल उनका खबरी बन गया था। वो सोनिया गांधी की लंदन यात्राओं के बारे में नरसिंह राव को बताया करता था कि वो कहां गईं और किससे मिलीं। यह भी पढ़ें: केजरीवाल जी अब जरा अगस्ता की बात कर लें!

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