क्या राहुल गांधी की बयानबाजी के पीछे अनिल अंबानी का हाथ है?

राफेल सौदे को लेकर बीते कुछ दिनों में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की बयानबाजी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कहा जा रहा है कि राहुल के आरोपों के पीछे कोई और नहीं, बल्कि खुद उद्योगपति अनिल अंबानी का हाथ है। बीजेपी के एक बड़े नेता ने न्यूज़लूज़ से बातचीत में ये दावा किया है। इसके मुताबिक राहुल गांधी ने जब राफेल सौदे में घोटाले के आरोप लगाने शुरू किए तो उनके निशाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ-साथ अनिल अंबानी भी थे। ऐसे में सवाल उठता है कि अनिल अंबानी आखिर खुद पर ही आरोप क्यों लगवाएंगे? इसका जवाब समझने के लिए हमें कुछ तथ्यों के बारे में जानना होगा।  दरअसल अनिल अंबानी अपनी कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस के डूबने के बाद से मुश्किल में हैं। केंद्र सरकार ने नियमों के तहत उन पर 2490 करोड़ के जुर्माना ठोंका है, क्योंकि अंबानी की कंपनी ने सरकार के स्पेक्ट्रम को इस्तेमाल किया और उसके पैसे भी नहीं दिए। वसूली के लिए केंद्र ने जैसे ही दबाव बढ़ाया, अनिल अंबानी सुप्रीम कोर्ट चले गए, जहां उनके वकील पूर्व दूरसंचार मंत्री और कांग्रेस के नेता कपिल सिब्बल हैं। कपिल सिब्बल पेशेवर वकील हैं ऐसे में कोई भी कह सकता है कि वो नेता के तौर पर नहीं, बल्कि बतौर वकील केस लड़ रहे हैं। लेकिन यह तर्क गलत है क्योंकि रिलायंस कम्युनिकेशंस ने जिस समय के पैसे नहीं चुकाए हैं उस दौरान कपिल सिब्बल ही दूरसंचार मंत्री थे। सूत्रों के मुताबिक ये मामला आगे न बढ़े, इसके लिए कांग्रेस हाईकमान के इशारे पर ही कपिल सिब्बल ने अनिल अंबानी के केस को हाथ में लिया है। क्योंकि कोई और वकील होने पर एक और घोटाले की पोल खुलने का डर है। अपील: कृपया पोस्ट कॉपी न करें, लिंक शेयर करें

अनिल अंबानी क्यों लगवा रहे हैं आरोप?

सूत्रों के मुताबिक दरअसल अनिल अंबानी  को उम्मीद थी कि राफेल सौदे में उनके हाथ मोटा हिस्सा लगेगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मोदी सरकार ने राफेल सौदे को इस तरह से डिजाइन किया है कि देश की कम से कम 60 से 70 कंपनियों को काम मिले। ताकि ज्यादा संख्या में रोजगार पैदा हो सके। 30 हजार करोड़ के ऑफसेट सौदे में से अनिल अंबानी की कंपनी  का हिस्सा सिर्फ 850 करोड़ का है। तकनीकी रूप से इसका भी आधा हिस्सा यानी 425 करोड़ ही रिलायंस लगाएगी। अनिल अंबानी की उम्मीदों के हिसाब से देखें तो ये बेहद मामूली है। लिहाजा अनिल अंबानी ने राफेल सौदे को ही खटाई में डालने की कोशिश शुरू कर दी। उनके इनपुट्स के आधार पर ही राहुल गांधी सरकार पर आरोप लगा रहे हैं। अनिल अंबानी ने राहुल गांधी और कांग्रेस के नेताओं पर जो मानहानि के मुकदमे किए हैं वो इसी मकसद से किए ताकि किसी को शक न हो। वैसे भी राहुल के आरोपों से अनिल अंबानी का तो कोई नुकसान नहीं होगा, उल्टा मोदी सरकार की छवि को नुकसान जरूर पहुंच सकता है। यह भी पढ़ें: क्या राफेल की खरीद में घोटाला हुआ है?

छोटे अंबानी के बचाव में आई कांग्रेस

2017 में अनिल अंबानी ने अपना टेलीकॉम कारोबार बड़े भाई मुकेश की कंपनी जियो को बेच दिया था। केंद्र सरकार ने बैंक गारंटी के तौर पर 2490 करोड़ रुपयों की मांग की है। लेकिन अनिल अंबानी के वकील के तौर पर पेश हुए कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने दलील दी है कि जब कंपनी दिवालिया हो चुकी है तो बैंक गारंटी कैसी? दरअसल अनिल अंबानी ने बहुत चालाकी दिखाते हुए बैंक में गारंटी के तौर पर रखी संपत्तियों को भी बेच दिया। ऐसे में कांग्रेस के आगे दबाव है कि वो अनिल अंबानी को इस मुश्किल से बाहर निकाले, जिसके लिए उसने उस कपिल सिब्बल को आगे किया है। इस घटना ने इस आरोप को एक तरह से बल दिया है कि कांग्रेस और अनिल अंबानी के बीच किसी तरह की अंडरस्टैंडिंग बनी हुई है। यहां हम आपको बता दें कि 2014 से पहले कांग्रेस के समय में अनिल अंबानी को खूब काम मिला करता था। यहां तक कि उन्हें दिल्ली की एयरपोर्ट मेट्रो और मुंबई मेट्रो का भी ठेका मिला था। इन दोनों प्रोजेक्ट्स को उन्होंने या तो अधूरा छोड़ दिया था या कामकाज की क्वालिटी को लेकर उनकी कंपनी सवालों के घेरे में रही। ऐसे में कई लोग हैरानी जताते रहे हैं कि राहुल गांधी आखिर अनिल अंबानी पर हमला क्यों कर रहे हैं? अपील: कृपया पोस्ट कॉपी न करें, लिंक शेयर करें

कपिल सिब्बल और अनिल अंबानी पर साठगांठ के आरोप नए नहीं हैं। बीजेपी नेता हर्षवर्धन ने 2014 के चुनाव के समय आरोप लगाया था कि टेलीकॉम मंत्री पद पर रहते हुए कपिल सिब्बल ने अपने विभाग के सचिव की अनदेखी करते हुए अनिल अंबानी की कंपनी को 650 करोड़ रुपये का फायदा पहुंचाया था। जबकि उन्हें कानूनन रिलायंस कंपनी पर भारी जुर्माना करके उसका 13 सर्किल में दूरसंचार का लाइसेंस रद्द करना चाहिए था। मोदी सरकार आने के बाद रिलायंस टेलीकॉम आर्थिक संकट का शिकार हो गई और इन आरोपों की जांच ठंडे बस्ते में चली गई।

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