काशी विश्वनाथ मंदिर के पास अवैध निर्माणों में दबी मिलीं प्राचीन धरोहरें

काशी विश्वनाथ मंदिर के आसपास अवैध निर्माण हटाने के दौरान कई प्राचीन धरोहरों का पता चला है। इनमें कई ऐसे मंदिर भी हैं, जिनकी स्थापना खुद जगतगुरु आदि शंकराचार्य ने की थी। दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी विश्वनाथ क्षेत्र को पुरानी गरिमा के अनुरूप बनाने के लिए यहां पर एक प्रोजेक्ट शुरू किया था। जिसके तहत काशी विश्वनाथ मंदिर के आसपास बने कई मकानों और दुकानों को हटाया जा रहा था। ये वो दुकानें और मकान थे जिन्हें मंदिरों पर कब्जा करके अवैध तरीके से बनाया गया था। यह बात हमेशा से कही जाती रही है कि प्राचीन मंदिरों को घेरकर कई गेस्टहाउस भी चल रहे थे जिनमें ठहरने वालों को मांस और मदिरा तक परोसी जाती थी। भ्रम पैदा करने की नीयत से इन होटलों और गेस्टहाउसों को दिखने में मंदिर जैसा बनाया गया था। जब ये प्रोजेक्ट शुरू हुआ था तो यह कहते हुए कुछ लोगों ने विरोध किया कि मोदी सरकार मंदिरों को तुड़वा रही है। इस विरोध की अगुवाई शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती और उनके अनुयायी अविमुक्तेश्वरानंद ने किया था। इस बारे में कुछ महीने पहले हमने ये रिपोर्ट पोस्ट की थी: क्या मोदी वाकई काशी के प्राचीन मंदिर तुड़वा रहे हैं?

सीएम को सौंपा गया मंदिर का प्रोजेक्ट

काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरीडोर की डीटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) के मुताबिक यह सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि कई मंदिरों का एक प्राचीन परिसर हुआ करता था। इसमें वास्तुकला के हिसाब से ढेरों खूबसूरत मंदिर बने हुए थे। 23 नवंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जब वाराणसी दौरे पर आए थे तो उन्हें यह रिपोर्ट सौंपी गई थी। अब राज्य कैबिनेट की मंजूरी के बाद इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो जाएगा। एक अंग्रेजी अखबार से बातचीत में मंदिर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विशाल सिह ने इसकी पुष्टि की है। सरकार ने इस क्षेत्र में पड़ने वाले भवनों को मोटा मुआवजा देकर खरीदा है। अब उन्हें तोड़ने का काम चल रहा है। इन भवनों की तुड़ाई बुलडोजरों के बजाय छेनी-हथौड़े से की जा रही है क्योंकि ज्यादातर इमारतों के अंदर प्राचीन मंदिर दबे हुए हैं। इन मंदिरों को चारों तरफ से घेर कर उन पर 3 से 4 तले के मकान बनाए गए हैं। यह ध्यान रखा जा रहा है कि किसी इमारत की दीवार तोड़ने के दौरान उसके अंदर के प्राचीन मंदिर को कोई नुकसान न पहुंचे। यह बात भी समझनी होगी कि मंदिरों का ये हाल किन्हीं विदेशी हमलावरों ने नहीं, बल्कि यहीं के कुछ पंडे-पुजारियों ने किया है।निवेदन: कृपया पोस्ट कॉपी न करें, लिंक शेयर करें

समुद्रगुप्त के जमाने का मंदिर बाहर आया

सरकार को सौंपी गई रिपोर्ट के मुताबिक काशी विश्वनाथ मंदिर से कुछ दूर मणिकर्णिका घाट के पास राजा समुद्रगुप्त के काल यानी तीसरी और चौथी शताब्दी का एक मंदिर मिला है। इस मंदिर के चारों तरफ ईंटों की दीवार बना दी गई थी। मंदिर के शिखर के ठीक ऊपर एक छत बनाई गई थी और छत पर टायलेट बना हुआ था। इस तरह से मंदिर दीवारों के अंदर दब चुका था और टायलेट का गंदा पानी मंदिर के गुंबद से होते हुए नीचे जमीन पर बनी नाली तक जाता था। अवैध निर्माण हटाने के इस अभियान के दौरान कुल 43 प्राचीन मंदिर, पुस्तकालय, यज्ञशालाएं और दूसरे पुराने भवन बाहर आए हैं। यहां के लोगों ने इन सभी को अवैध निर्माणों से ढंक दिया था। कुछ मंदिरों में संकरी गलियों और दरवाजों से घुसा जा सकता था, जबकि कुछ में तो उसकी भी गुंजाइश नहीं थी। कॉरीडोर प्रोजेक्ट के दूसरे चरण में इलाके की 130 और इमारतों को हटाया जाना है। ये सभी काशी विश्वनाथ मंदिर और गंगा घाटों के बीच में हैं। यह भी पढ़ें: जानिए क्यों हजारों साल से अमर और अडिग है काशी

क्या है काशी विश्वनाथ कॉरीडोर प्रोजेक्ट?

इस परियोजना के तहत काशी विश्वनाथ मंदिर के आसपास के कुल 296 भवनों की पहचान की गई है। इनमें से 175 को उनके मालिकों से पहले ही खरीदा जा चुका है। इनमें से 40 को तोड़ा जा चुका है। जबकि 60 को तोड़ने का काम जारी है। यह पूरा काम आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) की देखरेख में हो रहा है। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस परियोजना के लिए 600 करोड़ रुपये पास किए हैं। इस अभियान के दौरान मकान मालिकों ही नहीं, बल्कि वहां पर दुकान चलाने वालों और किराये पर रहने वालों का भी पुनर्वास किया जा रहा है। यह प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद काशी विश्वनाथ मंदिर एक बार फिर से उस रूप में दिखाई देगा जैसा वो मुसलमानों के आक्रमण से पहले हुआ करता था। हालांकि यहां पर अवैध रूप से बनी ज्ञानवापी मस्जिद एक बदनुमा दाग की तरह फिलहाल बनी रहेगी। लेकिन उसका रास्ता अलग होगा। मंदिर तक जाने के चौड़े रास्ते होंगे और यहां से गंगा घाट तक पहुंचना आसान होगा। अभी ये पूरी जगह इतनी संकरी और खराब हालत में है कि भरोसा करना मुश्किल होता है कि ये हिंदुओं का सबसे सिद्ध ज्योतिर्लिंग है। निवेदन: कृपया पोस्ट कॉपी न करें, लिंक शेयर करें

यह आश्चर्य की बात है कि हिंदू धर्म के सबसे बड़े गुरु कहे जाने वाले शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती और उनके शिष्य अविमुक्तेश्वरानंद ने काशी विश्वनाथ मंदिर के इस पुनरुद्धार के खिलाफ दुष्प्रचार अभियान चलाया था। उन्होंने लोगों के बीच यह भ्रम फैलाना शुरू कर दिया था कि मोदी सरकार मंदिरों को तुड़वा रही है, जबकि  सच्चाई अब सबके सामने आ चुकी है।

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