पाकिस्तान में पेट्रोल महंगा, लेकिन भारत में सस्ता क्यों!

Courtesy- DAWN

भारत में जब भी पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ती हैं उसकी तुलना पाकिस्तान के दामों से की जाती है। लोग शिकायत करते हैं कि अगर पाकिस्तान इतना सस्ता तेल बेच सकता है तो भारत क्यों नहीं? इस सवाल का जवाब अगर आप जानना चाहें तो पाकिस्तान के ताजा हालात पर नज़र डालनी होगी। पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की कीमतें इन दिनों उफान पर हैं। जबकि अपने देश में ये लगातार सस्ता हो रहा है। पाकिस्तानी रुपये के हिसाब से प्रति लीटर पेट्रोल 100 के पार पहुंचने को है। पाकिस्तान सरकार कह रही है कि उसे इस कीमत के कारण भारी घाटा हो रहा है। ऐसे में पाकिस्तान की आयल एंड गैस रेगुलेटरी अथॉरिटी (OGRA) तेल के दाम फौरन कम से कम 13 रुपये बढ़ाने की जरूरत है। दरअसल डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपया लगातार गिरता जा रहा है। नवंबर में ये 135 रुपये के भी नीचे जा पहुंचा। नतीजा यह कि पाकिस्तान सस्ता पेट्रोल बेचने के चक्कर में कंगाली की तरफ बढ़ रहा है। इमरान खान सरकार को डर सता रहा है कि अगर दामों में बढ़ोतरी अधिक हुई तो इससे लोगों में नाराजगी बढ़ सकती है।

पाकिस्तान का पेट्रोल संकट

अंतरराष्ट्रीय बाजार में इन दिनों कच्चे तेल के भाव लगातार गिर रहे हैं। लेकिन पाकिस्तान इसका फायदा अपने नागरिकों को नहीं दे पा रहा है क्योंकि जब जरूरत थी तब उसने कीमतें नहीं बढ़ाईं। लेकिन अब जब दाम कम करने का समय आया है तो वो उलटा दाम बढ़ाने को मजबूर हो रहा है। तेल खरीदने के लिए डॉलर की जरूरत होती है और इस पर बेतहाशा खर्च ने पाकिस्तानी रुपये की हालत को बेहद कमजोर कर दिया है। जबकि इसी दौरान भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले सुधर रहा है। बीते करीब एक महीने में रुपया 70 के आसपास आ चुका है। जिससे भारत में तेल की कीमतें कम होना आसान हो गया। लेकिन पाकिस्तान सरकार की गलत आर्थिक नीतियों का नतीजा यह हुआ कि डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपया लगातार टूट रहा है और इसके बहुत जल्द 150 तक चले जाने की आशंका जताई जा रही है। अगर ऐसा हुआ तो पाकिस्तान में दो साल पहले पैदा पेट्रोल संकट जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।

ईरान ने कसी पाक की नकेल

पाकिस्तान में मौजूदा संकट का एक बड़ा कारण ईरान को माना जा रहा है, जिसने ऐलान किया है कि वो पाकिस्तान को बेचे जाने वाले तेल पर लिमिट लगाएगा। दरअसल ईरान और पाकिस्तान की सीमा आपस में लगी हुई है। बॉर्डर वाले इलाकों से बड़े पैमाने पर तेल की तस्करी होती है। तस्कर बड़े-बड़े टैंकरों में तेल भरकर पाकिस्तान में बेचते हैं। अनुमान के मुताबिक ईरान से रोज करीब 200 लाख लीटर पेट्रोल तस्करी के जरिए पाकिस्तान भेजा जा रहा है। इससे ईरान को विदेशी मुद्रा का नुकसान हो रहा है। दरअसल ईरान के बाजारों में बिकने वाला खुदरा तेल बहुत सस्ता है। इस तस्करी को रोकने के लिए ईरान ने फ्यूल कार्ड जारी करने की बात कही है। अगर ऐसा हो गया तो पाकिस्तान में वैध तरीके से आने वाले तेल की डिमांड बढ़ेगी और इस चक्कर में पाकिस्तान की पहले से खस्ताहाल अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी।

भारत से सबक लेने की सलाह

पेट्रोलियम मार्केट के जानकारों के मुताबिक भारत की सोची-समझी नीति के कारण वो कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव रोकने में सफल रहा है। जबकि पाकिस्तान ने खुद को मुसीबत में डाल दिया। पाकिस्तानी अखबार दी एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने लिखा है कि “ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल के दाम महीने भर के अंदर करीब 25 फीसदी कम हो चुके हैं, लेकिन पाकिस्तान में कीमतें घटने की जगह बढ़ रही हैं। अखबार के मुताबिक दिसंबर में भी दाम कम होने के कोई आसार नहीं हैं। जबकि 30 अक्टूबर को ही दाम 5 रुपये प्रति लीटर बढ़ाने पड़े थे। ऐसे में पाकिस्तान को भारत वाली पेट्रोलियम नीति अपनानी चाहिए।” वैसे रुपये की कीमत के हिसाब से देखें तो भारत में पेट्रोल महंगा दिखेगा। लेकिन इसके पीछे की कहानी को समझें तो पता चलता है कि भारत एक मजबूत अर्थव्यवस्था की नीति पर चल रहा है, जबकि पाकिस्तान आर्थिक संकट में फंसता जा रहा है।

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