भारत की सच्ची विदेशी बहू, जिसे देश ने भुला दिया

आज के दौर में जब गांधी परिवार की एक विदेशी बहू को भारत की बहू साबित करने की कोशिश होती है, भारत की उस असली बहू का जिक्र भी जरूरी है, जिसके बारे में कम लोगों को ही पता है। जो कांग्रेस पार्टी कोशिश करती है कि आज भी ईसाई परंपराओं का पालन करने वाली सोनिया गांधी को भारत के लोग बहू का दर्जा दें, खुद उसी ने उस विदेशी बहू को नकार दिया था, जिसने सही मायनों में भारत के लिए अपना सबकुछ छोड़ दिया था। हम बात कर रहे हैं नेताजी सुभाषचंद्र बोस की पत्नी एमिली शेंकल की। ऑस्ट्रिया की रहने वाली एमिली शेंकल और सुभाषचंद्र बोस का विवाह 1937 में हुआ था। जिस तरह से आजादी के बाद नेताजी को गुमनामी की मोटी चादर में छिपा दिया गया उसी तरह एमिली शेंकल की कहानी भी लोगों से छिपा ली गई। आजादी के बाद बनी जवाहरलाल नेहरू की सरकार ने कोई कोशिश नहीं की कि नेताजी की पत्नी अपनी बेटी के साथ अपने पति के देश में बस सकें। एमिली मार्च 1996 में अपनी मृत्यु तक वियना में ही रहीं। इस दौरान वो भारत से जुड़ी खबरों में बेहद दिलचस्पी लिया करती थीं। यह भी पढ़ें: गुमनामी बाबा ही थे नेताजी सुभाषचंद्र बोस

कौन थीं एमिली शेंकल?

26 दिसंबर 1910 को ऑस्ट्रिया के वियना में जन्मी एमिली की पूरी जिंदगी त्याग और बलिदान की मिसाल है। करीब 25 साल की उम्र में वो पहली बार सुभाष चंद्र बोस से मिलीं। तब सुभाष अपनी किताब ‘द इंडियन स्ट्रगल’ लिख रहे थे, जिसमें एमिली को उनकी मदद करनी थी। दोनों के बीच प्रेम की शुरुआत हुई और 1937 में बोस और एमिली हिंदू रीति-रिवाज से विवाह के बंधन में बंध गए। हालांकि दोनों की शादी रजिस्टर नहीं हो सकी, क्योंकि तब जर्मनी में ईसाई के अलावा किसी दूसरी धार्मिक परंपरा की शादी को मान्यता नहीं थी। 29 नवंबर 1942 को एमिली ने एक बेटी को जन्म दिया, जिसका नाम अनीता बोस रखा गया। दोनों का साथ कुछ साल का ही रहा, क्योंकि तब तक दूसरा विश्व युद्ध शुरू हो गया। नेताजी ने देश वापस लौटने का फैसला किया। इसके बाद वो दोबारा मिल नहीं पाए। 8-9 साल के शादीशुदा जीवन में दोनों करीब 3 साल ही एक साथ रह सके। एमिली ने बेटी अनीता को अकेले दम पर पाला। आजादी के बाद सुभाषचंद्र बोस के भाई शरतचंद्र बोस ने अपनी पत्नी के साथ वियना जाकर एमिली से मुलाकात भी की थी। वो चाहते थे कि एमिली भारत चलें, लेकिन किसी कारण वो इसके लिए तैयार नहीं हुईं?

भारत आने का अधूरा ख्वाब

बताते हैं कि पत्नी और नवजात बेटी से विदा लेते समय नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने कहा था कि पहले देश को आजाद करवा लूं, फिर हम साथ-साथ रहेंगे। अफसोस की बात है कि ऐसा नहीं हो सका। 1945 में रहस्यमय हालात में घोषित किया गया कि बोस की एक कथित विमान हादसे में मौत हो गई है। उस समय एमिली युवा थीं और चाहतीं तो यूरोपीय संस्कृति के मुताबिक दूसरी शादी कर लेतीं। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उन्होंने बहुत कठिन परिस्थितियों में जीवन बिताया। उन्होंने एक तार घर (टेलीग्राम सेंटर) में टाइपिस्ट की मामूली नौकरी की और बहुत कम वेतन से ही बेटी का पेट पाला। उस समय तक भारत आजाद हो चुका था। सुभाषचंद्र बोस के बड़े भाई शरत के बेटे अमियनाथ बोस की बेटी माधुरी बोस ने एमिली से कई बार मुलाकात की थी। 2014 में आउटलुक मैगजीन से बातचीत में माधुरी ने बताया था कि नेहरू नहीं चाहते थे कि एमिली और नेताजी के रिश्तों के बारे में कभी परिवारवालों या देश को पता चले। इसके बजाय उन्होंने इस संबंध को इस रूप में प्रचारित किया कि नेताजी अय्याश किस्म के व्यक्ति थे और उनके कई विदेशी महिलाओं से शारीरिक संबंध थे।

नेताजी सुभाषचंद्र बोस और एमिली शेंकल की एक साथ की तस्वीर।

क्यों भारत नहीं आईं एमिली?

पुराने दस्तावेजों के आधार पर इस सवाल का जवाब देना आसान नहीं है। क्योंकि इसके कई कारण दिखाई देते हैं। माधुरी बोस के अनुसार “एमिली का भारत आने का बहुत मन था। वो चाहती थीं कि एक बार भारत की मिट्टी को हाथों से छूकर अपने पति को महसूस कर सकें। उनके और सुभाषचंद्र बोस के भाई शरत के बीच कई पत्र व्यवहार भी हुए। लेकिन उनकी चिट्ठियां रास्ते में खोलकर पढ़ी जा रही थीं।” मोदी सरकार आने के बाद नेताजी की फाइल्स सार्वजनिक की गई हैं। उनसे ही यह बात सामने आई कि 1948 में शरतचंद्र बोस को लिखी एमिली की एक चिट्ठी (नीचे देखें वो चिट्ठी) पूरे 2 साल के बाद अपने पते पर पहुंची थी। उस चिट्ठी को भी रास्ते में खोला गया था। उस वक्त की जवाहरलाल नेहरू सरकार के इशारे पर खुफिया एजेंसियां ये काम कर रही थीं। उन्हें डर था कि नेताजी या उनकी पत्नी अगर भारत लौट आए तो जनता उन्हें हाथों-हाथ लेगी। उस दौर में नेताजी बोस के आगे नेहरू का कद बहुत कम था। दावा किया जाता है कि एमिली शेंकल ने एक बार वियना में भारत के दूतावास जाकर वीसा के लिए आवेदन भी दिया था, लेकिन देश की इस बहू को वीसा देने से इनकार कर दिया गया था। जबकि उन्हें सम्मान सहित भारत बुलाकर नागरिकता दी जानी चाहिए थी।

कहते हैं कि शुरू के दौर में एमिली शेंकल दो कारणों से भारत नहीं आईं, पहला कारण यह कि उनकी बुजुर्ग मां उनके साथ ही रहती थीं। दूसरा कारण यह कि खुद नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने उन तक यह संदेश भिजवाया था कि वो फिलहाल भारत न जाएं। क्योंकि नेताजी को अच्छी तरह से पता था कि कांग्रेस के नेता उनकी पत्नी और बेटी अनीता को कभी स्वीकार नहीं करेंगे और उनके खिलाफ कोई खतरनाक साजिश को अंजाम भी दिया जा सकता है। बाद के दौर में भी भारत की सरकारों के तरफ से कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिलने के कारण एमिली कभी भारत नहीं आ सकीं। वो पूरी उम्र किसी हिंदू महिला की तरह रहीं। वो अक्सर साड़ी भी पहना करती थीं। सुभाषचंद्र बोस के साथ बहुत कम समय रहने के बावजूद उन्होंने कामचलाऊ बांग्ला भाषा भी सीख ली थी। अपने पति की कई यादगारों को उन्होंने जीवन भर संजोकर रखा।  देश के सबसे प्रिय नेताओं में से एक सुभाषचंद्र बोस की पत्नी का 1996 में बेहद गुमनामी के बीच निधन हो गया।

एमिली शेंकल की बेटी अनीता बोस के साथ ये तस्वीर 1948 के बाद किसी समय की है।

 

माधुरी बोस और एमिली शेंकल की ये तस्वीर 90 के दशक की है। जब वो काफी बुजुर्ग हो चुकी थीं।

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