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टोंटी ही नहीं, अखिलेश ने 1 लाख करोड़ रुपये भी चुराए!

उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव सरकार के दौरान फिजूलखर्ची का पूरा हिसाब-किताब सामने आ गया है। कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल यानी सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार पिछली अखिलेश यादव सरकार ने करीब 97 हजार करोड़ रुपये का हिसाब ठीक से नहीं दिया है। न ही इतनी बड़ी रकम का उपयोगिता प्रमाणपत्र (यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट) ही जमा किया गया है। ये वो रकम है जो यूपी सरकार के पंचायती राज विभाग, शिक्षा विभाग और सोशल वेलफेयर विभागों के खाते से खर्च की गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक साल 2014 से लेकर मार्च 2017 तक इन खर्चों का यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट करीब 97906.27 करोड़ का है जो कि अभी तक पेंडिंग है। माना जाता है कि अखिलेश यादव सरकार के दौरान अलग-अलग मदों में हुई फिजूलखर्ची में ये सारी रकम उड़ा दी गई।

जनता का पैसा मौजमस्ती पर खर्च

जिन तीन विभागों में सबसे बड़ी धांधली हुई है वो गांव और गरीबों से जुड़े हुए हैं। माना जा रहा है कि ये सारी रकम दूसरे मदों में डायवर्ट कर दी गई। रिपोर्ट के मुताबिक पंचायती राज विभाग में कुल 25,491 करोड़ रुपये, शिक्षा विभाग की तरफ से कुल 25,694 करोड रुपये और सामाजिक कल्याण विभाग के कुल 26927 करोड़ रुपयों का हिसाब-किताब सरकार ने नहीं दिया है। सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक इतने बड़े यूटिलाइजेशन फंड के सर्टिफिकेट जमा होने में देरी की वजह से साफ है इन विभागों में पैसों के साथ हेराफेरी की गई है। खास बात यह भी कि यह फंड बार-बार इन विभागों को दिए गए जबकि पिछले दिए गए फंड का हिसाब-किताब भी नहीं दिया गया था। पुराने अनुदानों का भी कोई ब्यौरा जमा नहीं किया गया है। सीएजी रिपोर्ट में साफ-साफ कहा गया है कि प्रदेश का वित्त विभाग इन सभी विभागों को आगे से किसी भी तरीके का फंड देने पर रोक लगाए जब तक कि पिछले खर्चों का ठीक से निपटारा नहीं होता।

दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का वादा

सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक साल 2014 से मार्च 2017 तक कुल 255023 यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट लंबित हैं। इस बारे में उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा का कहना है सीएजी रिपोर्ट सामने आई है और इस मामले में अंदरूनी जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी ने इन सभी आरोपों को सिरे से नकार दिया है समाजवादी पार्टी के मुताबिक सीएजी रिपोर्ट का मतलब यह नहीं है कि कोई भ्रष्टाचार हुआ है। उत्तर प्रदेश के अलावा महाराष्ट्र, गुजरात में भी सीएजी रिपोर्ट ऐसा ही कुछ कहती है जहां पर बीजेपी की सरकार है। हालांकि उन्होंने इसका कोई उदाहरण नहीं दिया। अब देखने वाली बात होगी कि करीब एक लाख करोड़ रुपये के जनता के पैसे की इस लूट के दोषियों को अंजाम तक कैसे पहुंचाया जाता है।

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