जानिए क्यों भारत के टुकड़े-टुकड़े चाहते हैं शहरी नक्सली

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“भारत तेरे टुकड़े होंगे… इंशा अल्लाह… इंशा अल्लाह”… शहरी नक्सलियों का यही अरमान है। सवाल उठता है कि आखिर इनके मन में भारत के टुकड़े-टुकड़े करने का ये विचार आया कहां से? जैसे ही आप किसी वामपंथी के सामने राष्ट्र या राष्ट्रवाद की बात करेंगे तो उसे अचानक 440 वोल्ट का करंट लग जाता है। वो आपको फासीवादी कहने लगता है। ध्यान रहे, हमारे बीच में रहने वाला ये वामपंथी दरअसल शहरी नक्सली भी हो सकता है। आखिर हमारे राष्ट्र या राष्ट्रवाद से इन वामपंथियों (टुकड़े-टुकड़े गैंग) को इतनी नफरत क्यों हैं? दरअसल इसकी वजह हैं इनके ‘परमपिता परमेश्वर’ कार्ल मार्क्स। जिनकी नजर में भारत एक देश नहीं, बल्कि टुकड़ों में बंटा एक इलाका था। भारत के बारे में कार्ल मार्क्स के ये विचार 25 जून 1853 को न्यूयार्क के डेली ट्रिब्यून (अंक 3804) में प्रकाशित भी हुए थे। अब अपने ‘परमपिता परमेश्वर’ के विचारों का पालन करते हुए हमारे भारतीय वामपंथियों यानी ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ ने भारत के टुकड़े-टुकड़े करने के लिए क्या किया आप ये जान लीजिए। यह भी पढ़ें: क्या आप भी नक्सली हैं?

पुराना है देश तोड़ने का ये सपना

मार्च 1940 में जब जिन्ना ने पाकिस्तान की मांग की तो सबसे पहले भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी यानी ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ ने इसका समर्थन किया था। लेकिन इस सच्चाई को इतिहास की किताबों से गायब कर दिया गया है, क्योंकि इन किताबों को तो इन्ही वामपंथियों ने लिखा है। लेकिन एक वामपंथी ऐसा था जिसने इस सच को लिख दिया। जनता द्वारा चुने गए दुनिया के पहले कम्युनिस्ट नेता और केरल के पूर्व मुख्यमंत्री ईएमएस नंबूदरीपाद ने अपनी किताब “Reminiscences of an Indian Communist” में लिखा है कि “भारत की जनता कम्युनिस्ट पार्टी से सिर्फ इसलिए दूर नहीं रहती है क्योंकि उसने स्वतंत्रता संघर्ष और भारत छोड़ो आंदोलन का विरोध किया था बल्कि इसका एक बड़ा कारण ये है कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने पाकिस्तान के निर्माण और बंटवारे का खुलेआम समर्थन किया था।” यह भी पढ़ें: क्या आपके इर्दगिर्द कोई शहरी नक्सली रहता है?

अपने उसी मिशन में जुटे हैं वामपंथी

1946 में भारत की आजादी की मांग पर विचार करने के लिए जब कैबिनेट मिशन भारत आया तो भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने उसके सामने देश को 17 हिस्सों में बांटने की वकालत की थी। यह सब कुछ दस्तावेजों में दर्ज भी है। दरअसल ये ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ सोवियत संघ के खूनी तानाशाह स्टालिन के उस विचार पर चल रहा था जिसके मुताबिक सोवियत संघ के राज्यों को आत्मनिर्णय का अधिकार था। और हुआ क्या नब्बे की दशक की शुरुआत में सोवियत संघ ‘टुकड़े-टुकड़े’ हो गया। आज भी ये वामपंथी गैंग हमारे राष्ट्र को सोवियत संघ की तरह ‘टुकड़े-टुकड़े’ करने के मिशन में जुटा हुआ है। समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया (जोकि बिल्कुल संघी नहीं थे) ने अपनी किताब ‘भारत विभाजन के गुनाहगार’ में लिखा है कि – “वामपंथी लोग जब सत्ता में नहीं रहते तो राष्ट्रवाद को अपना दुश्मन समझते हैं और इसीलिए उसे कमज़ोर बनाने के लिए अलगाव (बंटवारे की नीति) को बढ़ावा देने लगते हैं। वामपंथ ने हमेशा भारत देश को कमज़ोर बनाया है, लेकिन फिर भी वामपंथी अपने सपने (भारत के टुकड़े-टुकड़े करना) को पूरा करने की आशा में अब तक अंधे हैं।”

(वरिष्ठ पत्रकार प्रखर श्रीवास्तव का लेख, उनके फेसबुक पेज से साभार)

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