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क्या आप देश के टॉप-12 बैंक लुटेरों के नाम जानते हैं?

पिछली कांग्रेस सरकार के वक्त बैंक लोन के नाम पर हुए गबन की कहानियां आजकल सुर्खियों में है। हर कोई विजय माल्या और नीरव मोदी की बात कर रहा है। लेकिन क्या आपको पता है कि ये दोनों दरअसल सबसे छोटे जालसाज हैं। बैंकों का पैसा नहीं लौटाने वाले टॉप-12 डिफाल्टरों के नाम मीडिया छिपाता रहता है। जबकि उनके पास बैंकों के कुल डूबे कर्जे का चौथाई हिस्सा है। केंद्र सरकार पिछले साल ही इन 12 कंपनियों के नाम उजागर कर चुकी है। इनसे रकम की वसूली का काम भी जारी है। हैरानी की बात है कि इनकी कहीं पर कोई चर्चा नहीं होती है। एक नजर उन कंपनियों की लिस्ट पर जिन्हें 2014 से पहले कथित तौर पर कांग्रेस सरकार के इशारे पर अरबों रुपये बांटे गए और वो पैसा नहीं लौटा रही थीं।

1. एस्सार स्टील

2015-16 के आंकड़ों के मुताबिक एस्सार कंपनी पर बैंकों का कुल करीब 30,000 करोड़ रुपया बकाया है। जबकि कंपनी खुद को 5,800 करोड़ के घाटे में दिखा रही है। कंपनी की कुल संपत्तियां 63,000 करोड़ के आसपास आंकी गई हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी पर बैंकों का कुल 45,000 करोड़ रुपये का बकाया है। लोन लेने के कुछ समय बाद ही उसने इसे चुकाना बंद कर दिया था और लोन को रीस्ट्रक्चर करने के लिए बैंकों से बातचीत शुरू कर दी थी। लेकिन इसमें उन्हें कामयाबी नहीं मिल पाई। कंपनी की दलील है कि स्टील सेक्टर में मंदी के कारण उनका ये हाल है। फिलहाल कंपनी का मामला नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में चल रहा है। यह कंपनी कांग्रेस की बेहद करीबी मानी जाती है।

2. लैंको इन्फ्राटेक

इस कंपनी पर 2017 के आंकड़ों के मुताबिक 44,000 करोड़ के करीब का बकाया है। 2012 से 2017 तक कंपनी ने 8000 करोड़ रुपये का घाटा दिखाया है। कंपनी की कुल संपत्तियां 45,000 करोड़ रुपये के आसपास हैं। यानी बकाये की वसूली के लिए इस कंपनी को पूरी तरह बेचना जरूरी होगा। लैंको इन्फ्राटेक का मामला फिलहाल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल के सामने है और उसका फैसला भी जल्द आने के आसार हैं। शेयर बाजार में कंपनी के शेयरों की कीमत ज़ीरो पर चल रही है। कुछ अपुष्ट सूत्रों के मुताबिक कंपनी का कुल कर्जा 50,000 करोड़ रुपये से भी अधिक हो सकता है।

3. भूषण स्टील

इस कंपनी पर 40 हजार करोड़ रुपये के करीब बकाया था। ज्यादातर लोन स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और पंजाब नेशनल बैंक के थे। केंद्र सरकार के दबाव के बाद बैंकों ने 2016 में इस रकम को एनपीए घोषित किया। फिलहाल भूषण स्टील पूरी तरह से टाटा स्टील्स के हाथों बिक चुकी है। उससे 12 फीसदी की दर से ब्याज की वसूली भी की गई है।

4. भूषण पावर एंड स्टील

ये कंपनी शेयर बाजार में लिस्टेड नहीं है। लेकिन इसने बैंकों के 37,248.26 करोड़ रुपये ले रखे हैं। 2014 से पहले इस कंपनी पर कांग्रेस सरकार की मेहरबानी ऐसी थी कि पिछला लोन न चुकाने के बावजूद उसे लगातार नए लोन मिलते गए।

5. आलोक इंडस्ट्रीज़

कपड़ा क्षेत्र की ये कंपनी 2015 में करीब 25 हजार करोड़ रुपये की कमाई करती थी। लेकिन इसके बाद के दो साल में ये घाटे में चली गई और घाटा साढ़े सात हजार करोड़ से भी अधिक हो चुका है। मोदी सरकार का डंडा चलने के बाद 2015 में पहली बार यह बात सामने आई थी कि कंपनी पर 24 हजार करोड़ से ज्यादा बकाया है।

6. मोनेट इस्पात

2015 तक इस कंपनी की आमदनी 3307 करोड़ रुपये हुआ करती थी। लेकिन जब मोदी सरकार ने बैंक के पैसे लूट कर बैठने वालों पर कार्रवाई शुरू की तो कंपनी की इनकम गिरकर 1275 करोड़ पर आ गई। अब कंपनी हर साल 4 से 5 हजार करोड़ रुपये के घाटे में है। इसकी वजह है 10 हजार करोड़ का वो कर्जा जो इस कंपनी ने ले रखा है।

7. इरा इन्फ्रा इंजीनियरिंग

इस कंपनी ने भी बैंकों के 11 हजार करोड़ रुपये डकार रखे हैं। मनमोहन सरकार के समय में इस कंपनी को इतनी रकम तब दे दी गई, जबकि पता था कि कंपनी की कुल संपत्तियां 8 हजार करोड़ के करीब हैं।

8. एबीजी शिपयार्ड

2012 में 2500 करोड़ रुपये सालाना कमाई वाली ये कंपनी 2016 में सिमट कर 38 करोड़ रुपये पर सिमट गई। इस खस्ताहाल कंपनी पर बैंकों का करीब 9000 करोड़ रुपये का कर्ज है। ये कर्ज गलत तरीके से बिना योग्यता के बांटा गया था।

9. जेपी इन्फ्राटेक

बैंकों की लूट के मामले में यह कंपनी भी खासी चर्चा में रही है। 2016 में इस कंपनी का पतन शुरू हुआ, जब यह बात सामने आई कि वो करीब 9 हजार करोड़ रुपये का कर्ज लिए बैठी है। जबकि कंपनी के कुल एसेट्स 15 हजार करोड़ के करीब थे।

10. इलेक्ट्रोस्टील स्टील

करीब 5-6 साल से घाटे में चल रही ये कंपनी 8 हजार करोड़ से अधिक के कर्जे में है। ये सारी रकम 2014 से पहले से उसे मिली थी। अब मोदी सरकार कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल के जरिए पैसे वसूलने की प्रक्रिया में है।

इन 10 कंपनियों के अलावा एमटेक ऑटो पर 4000 करोड़ और ज्योति स्ट्रक्चर्स पर 3300 करोड़ रुपये का कर्ज बकाया है। हालांकि ये तमाम रकम की ब्याज को जोड़कर बढ़ सकती है। फिलहाल इन 12 कंपनियों के एनपीए का मामला प्राथमिकता के साथ नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में सुनवाई के लिए है। ये 12 कंपनियां सबसे बड़ी डिफाल्टर हैं। इनके अलावा माल्या और नीरव मोदी के जितने कर्जे बताए जाते हैं वो रकम दरअसल ब्याज को जोड़कर होती है।

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