डॉक्टर की जिंदगी तबाह कर बेल पर छूटे ये ‘पत्रकार’

बायीं तस्वीर चैनल के मालिक राघव बहल की है। बीच की तस्वीर राजदीप सरदेसाई की, जबकि दायीं तस्वीर आशुतोष की है, जो तब आईबीएन7 चैनल का एडिटर हुआ करता था।

मीडिया किस तरह से माफिया की तरह काम करता है, ये खबर उसकी मिसाल है। दरअसल ये मामला 2006 का है जब नोएडा के सरकारी अस्पताल के डॉक्टर अजय अग्रवाल के खिलाफ आईबीएन7 और सीएनएन-आईबीएन चैनल ने ‘शैतान डॉक्टर’ नाम से एक स्टिंग ऑपरेशन किया था। इस स्टिंग ऑपरेशन में दावा किया गया था कि डॉक्टर अग्रवाल भीख मंगवाने वाले गिरोहों के लिए बच्चों के हाथ-पैर काटने का काम करते हैं। इस स्टिंग ऑपरेशन के बाद डॉक्टर अग्रवाल की जिंदगी में तूफान आ गया। उनके घर पर लोगों ने पथराव भी किया और उनका घर से निकलना तक मुश्किल हो गया। स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की तमाम जांच में डॉक्टर अग्रवाल निर्दोष पाए गए। 2008 में उन्होंने स्टिंग ऑपरेशन करने वाले चैनल के संपादक राजदीप सरदेसाई, आशुतोष (अब आम आदमी पार्टी का नेता), नेटवर्क18 के तब के मालिक राघव बहल, रिपोर्टर जमशेद खान समेत 9 लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया। बाकी आरोपियों के नाम हैं- अरुणोदय मुखर्जी, संजय रॉय चौधरी, हरीश चावला, समीर मनचंदा और नीति टंडन। अब पूरे 10 साल के बाद बीते शुक्रवार यानी 6 जुलाई को तीन आरोपियों- राजदीप सरदेसाई, आशुतोष और अरुणोदय मुखर्जी ने गाजियाबाद की कोर्ट के आगे सरेंडर किया है। यहां पर यह बताना जरूरी है कि ये सभी पत्रकार कांग्रेस के करीबी माने जाते हैं। यह भी पढ़ें: देखिए कैसे फर्जी खबरें फैलाते हैं एनडीटीवी के पत्रकार

शातिर अपराधी जैसे पत्रकार

टीवी पर बैठकर बड़ी-बड़ी बातें करने वाले ये कथित पत्रकार किस कदर शातिर हैं ये इसी से पता चलता है कि उन्होंने गलती पकड़े जाने के बावजूद कभी माफी नहीं मांगी। जब उन्हें कोर्ट का नोटिस आया तो वो उसकी भी कई साल तक अनदेखी करते रहे। आखिरकार अदालत ने जब उनके खिलाफ वारंट जारी किया, तब जाकर कुछ आरोपियों ने कोर्ट में सरेंडर किया है। कोर्ट ने उनको फिलहाल जमानत पर रिहा कर दिया। चैनल के रिपोर्टर जमशेद खान के मकान की कुर्की का आदेश भी कोर्ट जारी कर चुकी है, लेकिन अब तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। यह बात सामने आई है कि 2006 में लॉन्च होने के कुछ दिनों के अंदर ही जुलाई में चैनल पर स्टिंग ऑपरेशन दिखाया था। ये कार्यक्रम पूरे एक हफ्ते तक चलाया गया था। डॉक्टर अग्रवाल तब नोएडा के सरकारी अस्पताल में ऑर्थोपेडिक सर्जन के तौर पर तैनात थे। लंबे कानूनी दांवपेच के बाद इस साल फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टर अग्रवाल के पक्ष में फैसला सुनाया और आदेश दिया कि राजदीप सरदेसाई, आशुतोष, राघव बहल समेत सभी 9 आरोपियों पर मुकदमा चलाया जाए। दो आरोपी संजय रॉय चौधरी और हरीश चावला दो दिन पहले ही कोर्ट में सरेंडर करके जमानत पर छूट चुके हैं। यह बात भी सामने आ चुकी है कि चैनल ने नोएडा के सरकारी अस्पताल के ही एक डॉक्टर की सुपारी पर डॉक्टर अजय अग्रवाल को बदनाम करने के लिए ये पूरी साजिश रची थी। यह भी पढ़ें: रवीश कुमार की ये ‘बहन’ सुर्खियों में क्यों है?

कांग्रेस की करीबी का फायदा

आरोपी चैनलों को चलाने वाली कंपनी नेटवर्क18 को उसका मालिक राघव बहल अब रिलायंस को बेच चुका है। नए मैनेजमेंट ने चैनलों का नाम बदलकर न्यूज18 और सीएनएन न्यूज18 कर दिया। राघव बहल ने अब द क्विंट (The Quint) नाम से एक प्रोपोगेंडा वेबसाइट शुरू की है, जो मोदी सरकार और भारतीय सेना के खिलाफ फर्जी खबरें छापती है। इसी वेबसाइट ने कुछ दिन पहले रिपोर्ट पब्लिश की थी कि पाकिस्तान की जेल में बंद कुलभूषण जाधव वास्तव में रॉ का एजेंट है। 2017 में इस वेबसाइट के एक फर्जी स्टिंग ऑपरेशन के कारण नासिक आर्मी कैंट में तैनात एक जवान को खुदकुशी करनी पड़ी थी। कांग्रेस का करीबी होने के कारण सभी आरोपियों को 2014 तक खुलेआम सरकारी मदद मिली। नियमों के मुताबिक फर्जी स्टिंग ऑपरेशन साबित होने पर सूचना प्रसारण मंत्रालय किसी चैनल का लाइसेंस कुछ समय के लिए रद्द कर सकता है। लेकिन इन चैनलों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। 2014 में मोदी सरकार आने के बाद इन पत्रकारों के बुरे दिन शुरू हो गए।

बायीं तस्वीर गाजियाबाद कोर्ट में राजदीप सरदेसाई और आशुतोष की पेशी के वक्त की है। दोनों पूरे समय हंसी-मजाक करते रहे थे और उनके चेहरों पर अपनी करनी का कोई अफसोस नहीं था। दायीं तस्वीर उन डॉक्टर अजय अग्रवाल की है, जिनके खिलाफ झूठा स्टिंग ऑपरेशन किया गया था।

डॉक्टर अग्रवाल ने सभी आरोपियों पर ढाई करोड़ रुपये का मानहानि का मुकदमा भी ठोक रखा है। वो कहते हैं कि मुझे पैसे नहीं चाहिए, मैं चाहता हूं कि सभी आरोपी मेरे साथ किए गए सलूक के लिए कम से कम माफी मांग लें। इसके बावजूद किसी ने कभी उनसे मिलकर माफी मांगने क जरूरत नहीं समझी। 2008 में एक बार आशुतोष ने उनसे मुलाकात की थी, लेकिन उसने भी माफी मांगने से मना कर दिया था। आशुतोष का कहना था कि अगर आप केस वापस ले लें तो हम इस केस के बारे में आपका इंटरव्यू अपने चैनल पर चला देंगे। लेकिन डॉक्टर अग्रवाल ने उसका ये प्रस्ताव नामंजूर कर दिया।

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