प्रियंका चोपड़ा का ये ‘इतिहास’ जानना बहुत जरूरी है!

आइए प्रियंका_चोपड़ा को समझते है। प्रियंका को बरेली में मैंने अपने बैंक मैनेजर मित्र की बेटी की बर्थडे पार्टी में देखा था। उस समय वह अमेरिका के किसी कॉलेज से दसवीं क्लास की परीक्षा पास करके लौटी थीं। फर्स्ट ईयर आर्मी स्कूल की छात्रा थीं। उन्हें अमेरिका की हवा लग चुकी थी। 16-17 की उम्र में काफी बिंदास थीं प्रियंका चोपड़ा। उसी पार्टी में खबर सुनी थी कि इसी लड़की की फोटो और प्रोफ़ाइल मिस इंडिया कॉन्टेस्ट के लिए अप्रूव हो चुकी है। मेरी पत्नी उस पार्टी में साथ थीं। मेरा ख्याल था कि इस ‘बालिका’ को मिस इंडिया कंटेस्ट में आखिरी नंबर मिलेगा। मेरी पत्नी की राय थी कि इन प्रतियोगिताओं में चेहरे की कम दिमाग और हाज़िरजवाबी की ज़्यादा कद्र होती है। मुझे आज भी प्रियंका चोपड़ा की वह भाव-भंगिमा याद है, जिसमें वह हर उपस्थिति व्यक्ति को इस उम्मीद से देख रहीं थीं कि वह उन्हें देख ज़रूर रहा हो। कुछ ही दिनों में खबर आई कि ‘बरेली की बेटी’ ने मिस इंडिया का खिताब जीत लिया है। बहुत खराब परफॉर्मेन्स के बाबजूद चीफ ज्यूरी शाहरुख खान ने मिस इंडिया का खिताब प्रियंका चोपड़ा को थमा दिया।

प्रियंका चोपड़ा के लिए अब मिस वर्ल्ड का रास्ता खुल गया था। शाहरुख खान प्रियंका की नाव के खेवनहार बने। आगे चलकर प्रियंका चोपड़ा ने शाहरुख को नियमानुसार ‘धन्यवाद आभार’ पेश किया। डॉक्टर कर्नल अशोक चोपड़ा जो प्रियंका के पिता थे, आर्मी से प्री-मेच्योर रिटायर्ड थे। वो कस्तूरी अस्पताल नाम से नर्सिंग होम चलाते थे। पत्नी भी आर्मी से रिटायर डॉक्टर थीं। अस्पताल इस बात के लिए मशहूर था कि आसपास के गांवों के झोला छाप डॉक्टर अपने मरीजों का केस खराब होने पर उनके यहां ही रेफर करते थे, बदले में उन्हें मोटा कमीशन मिला करता था। पास ही कर्नल अशोक चोपड़ा, मधु चोपड़ा, प्रियंका चोपड़ा और उनके छोटे भाई का घर था। परिवार रानीखेत के पास बाबा हेड़ा खान का भक्त था। मज़े की बात यह है कि प्रियंका चोपड़ा का पोर्टफोलियो फोटो सेशन बरेली में ही हुआ था। इसे करने वाले मेरे ही मित्र थे, जो सूरी स्टूडियो चलाया करते थे। चोपड़ा निवास में आज भी एक पुराना नौकर रहता है। कस्तूरी अस्पताल बिक चुका है। प्रियंका की नानी एक ईसाई थीं, जिन्होंने एक हिंदू से शादी की थी, लेकिन मरते दम तक वो ईसाई ही रहीं। प्रियंका की असली गाथा आनी अभी बाकी है।

विशुद्ध भारतीय नैन-नक्श, अमेरिकी एक्सेंट वाली अंग्रेज़ी की वजह से गलत जवाब देने के बावजूद प्रियंका चोपड़ा मिस वर्ल्ड का खिताब जीतने में कामयाब हो गईं। सारा आकाश अब उनका था। दर्जनों फिल्में साइन हुईं। फिल्में सफल भी होने लगीं। पुराने पुरुष मित्र पुराने होने लगे। शाहिद कपूर जैसे नए लोग ज़िन्दगी में आये तो यह भी हुआ कि प्रियंका चोपड़ा के परिचित जब घर आते तो शाहिद कपूर दरवाज़ा खोल कर वेलकम बोला करते थे। बोल्ड-बिंदास हैं अपनी प्रियंका। अपने तन पर ज़्यादा कपड़ों का भी बोझ नहीं लादतीं। 15 साल पहले एक भाजपाई ने प्रियंका की बोल्ड-बिंदास जीवन शैली पर कमेंट कर दिया तो उन्हें राष्ट्रवाद और हिंदुओं से मानो नफरत ही हो गई। वैसे भी शाहरुख कैंप की मेंबरशिप के लिए आपका हिंदू धर्म और राष्ट्रवाद को गाली देना जरूरी होता है। प्रियंका ने यह पॉलिसी समझने में देरी नहीं की।

अमेरिकी टीवी शो क्वांटिको में हिंदुओं के खिलाफ प्रियंका का एपिसोड भी इसी बात का जीता-जागता प्रमाण है। सिर्फ हिंदुओं ही नहीं, उन्होंने अपने देश को भी कलंकित करने में शर्म महसूस नहीं की। उन्हें यह जानकर कुछ भी बुरा नहीं लगा कि जिस कहानी में वो एक्टिंग कर रही हैं, उसमें बताया गया है कि रुद्राक्ष की माला पहनने वाला एक राष्ट्रवादी हिंदू अमेरिका में परमाणु बम से हमला करने की साजिश रच रहा है। वो भी सिर्फ इसलिए ताकि पाकिस्तान और मुसलमानों को बदनाम किया जा सके। इस साजिश के बारे में भारत की सरकार को सबकुछ पता है और वो एक तरह से साजिश की मास्टरमाइंड है। लेकिन प्रियंका ने अपनी बहादुरी से पूरे अमेरिका को बचा लिया। शो में प्रियंका चोपड़ा ने एक डायलॉग भी बोला है, जिसमें वो आतंकवादी की पहचान करते हुए कहती हैं “ये पाकिस्तानी नहीं है। इसने गले में रुद्राक्ष पहना है। ये पाकिस्तानी मुसलमान के गले में नहीं हो सकता। यह भारतीय राष्ट्रवादी है और पाकिस्तान को फंसाने की कोशिश कर रहा है।”

प्रियंका चोपड़ा का रोहिंग्या कैंपों में तब जाना जब ये खबर आई कि उन्होंने सौ से ज्यादा हिंदुओं की गर्दन काटी है और सैकड़ों हिंदू महिलाओं से बलात्कार किया है, अपने आप में बहुत कुछ बताता है। उनका रोहिंग्या को आर्थिक मदद देना, पाकिस्तानियों में बहुत पॉपुलर होना, शाहरुख में प्रियंका के यकीन का एक जीता-जागता सबूत है। उनके पास अब तो अमेरिका की नागरिकता भी है। कोई भी नई हीरोइन तीनों खान कैंपों से हटकर मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में अपना अस्तित्व नहीं बना सकती। कोई बड़ी बात नहीं है कि प्रियंका चोपड़ा मज़हबे-इस्लाम कबूल कर चुकी हों। आखिर वो बरेली में आला हजरत में चादर जो चढ़ाती रही हैं और उन्हें मालूम है कि जिस धंधे में वो हैं उसमें मुसलमानों का दबदबा रहने वाला है।

बरेली में रहने वाले पवन सक्सेना की फेसबुक टाइमलाइन से साभार

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