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क्या कांग्रेस के इशारे पर फिर से जाग उठा है ‘कोबरा’?

कोबरा पोस्ट का स्टिंग ऑपरेशन मैंने नहीं देखा है। लेकिन जो जानकारी मिली है, उसके मुताबिक कई मीडिया संस्थान पैसे लेकर हिन्दुत्व का एजेंडा चलाने को तैयार हो गए। हमारा कहना है कि पैसे लेकर मीडिया संस्थान इस्लाम और क्रिश्चियनिटी का एजेंडा भी चला सकते हैं। आप उनके सामने पैसे और एजेंडे लेकर तो पहुंचिए। आखिर विचारधारा के नाम पर इस देश के अनेक मीडिया हाउस पहले से ही नक्सलवादियों-माओवादियों और अलगाववादियों-आतंकवादियों तक का एजेंडा चला रहे हैं कि नहीं? कौन जानता है कि विचारधारा के नाम पर चलाए जा रहे इस एजेंडे के लिए भी कहीं-कहीं से पैसे आ रहे हों।

मैं तो काफी समय से शक ज़ाहिर करता आ रहा हूं कि रूट डायवर्ट करके काफी सारा पैसा पाकिस्तान की ख़ुफिया एजेंसी आईएसआई और अन्य भारत-विरोधी ताकतों से भी आता ही है, वरना कोई हिन्दुस्तानी बेकसूर नागरिकों के हत्यारे आतंकवादियों को हीरो क्यों बताता या उनके मानवाधिकार की चिंता में दुबला क्यों होता रहता? बहरहाल, ये भी कौन नहीं जानता है कि कोई मीडिया हाउस क्यों कांग्रेस का एजेंडा चलाता है और कोई क्यों बीजेपी का एजेंडा चलाता है? जिसे अन्य दलों से पैसे मिल रहे हैं, वह अन्य दलों का भी एजेंडा चलाता ही है। यह कोई छिपी हुई बात नहीं है। लगभग तमाम राज्यों में सुशासन की सरकारों ने कैसे पैसे के बल पर स्थानीय मीडिया को ख़रीद रखा है या गुलाम बना रखा है या मैनेज कर रखा है, इसे कौन नहीं जानता है? इसलिए मुझे लगता है कि कोबरा पोस्ट का स्टिंग ऑपरेशन सिक्के के केवल एक पहलू को सामने लाता है। सिक्के के दूसरे पहलू में शामिल लोगों को उसने बख्श दिया है।

कौन जानता है कि सिक्के का केवल एक ही पहलू सामने लाने के लिए उसे भी कहीं से सपोर्ट (जिसमें पैसा भी शामिल हो सकता है) मिला हो? मेरी राय में कोबरा पोस्ट का स्टिंग ऑपरेशन तब और अधिक धारदार हो जाता, जब वह केवल हिन्दुत्व का ही नहीं, बल्कि अलग-अलग एजेंडा लेकर मीडिया हाउसेज के पास पहुंचता और उन्हें एक्सपोज़ करता। यदि उसने तरह-तरह का एजेंडा लेकर मीडिया संस्थानों को बेनकाब किया होता, तो उसे देखने के लिए मैं अवश्य समय निकालता, लेकिन एक ही एजेंडे को लेकर मीडिया संस्थानों को घेरना ख़ुद उसके ऊपर किसी एजेंडे से संचालित होने का शक पैदा करता है।

(वरिष्ठ पत्रकार अभिरंजन कुमार के फेसबुक पेज से साभार)

नोट: पाठकों की सुविधा के लिए बता दें कि कोबरा पोस्ट भी तहलका का ही एक छिपा हुआ रूप है। यह बात हमेशा से उठती रही है कि कांग्रेस ने तहलका, कोबरापोस्ट, गुलेल डॉटकॉम जैसे कई सुपारी संस्थान खुलवा रखे हैं जो चुनावों से ठीक पहले ऐसे स्टिंग ऑपरेशन करते हैं जिनसे कांग्रेस को फायदा और बीजेपी को नुकसान होता हो।

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