मोदीजी बहुत हुआ विकास, जरा हिंदुओं की भी सुनिए!

प्रिय प्रधानमंत्री जी, कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजे जब आए तो मैं बहुत खुश था, जिस तरह से आपने और आपकी पार्टी ने ये चुनावी मुकाबला लड़ा वो बेहतरीन था। लेकिन अब लगता है कि खुशी का वो एहसास दरअसल राहत की सांस थी, क्योंकि नतीजों को लेकर हम सभी बहुत आशावादी थे। विश्वास मत के नतीजे और वाजपेयी स्टाइल में येदियुरप्पा के इस्तीफे के बाद मुझे इस पूरे चुनावी नतीजे के नकारात्मक पहलू के बारे में भी सोचने को मजबूर होना पड़ा। मेरे मन में सवाल आया कि जब पूरा माहौल बीजेपी के पक्ष में था, तो फिर आखिर पार्टी पूरा बहुमत पाने से चूक क्यों गई? जहां तक चुनावी राजनीति की बात है, हम सभी इस बात को समझते हैं कि वाजपेयी जी का तरीका निश्चित तौर पर जीत की गारंटी नहीं देता है।

बीजेपी जब बिहार और दिल्ली में हारी थी, तो मैं खुश था क्योंकि मुझे लगा कि आपने अपने राजनीतिक करियर में थोड़ा हार का स्वाद भी चख लिया। मेरा मानना है कि हर हार बड़े इम्तिहानों के लिए एक सबक सिखाकर जाती है। पहले गुजरात में मुख्यमंत्री के तौर पर और फिर प्रधानमंत्री उम्मीदवार के तौर पर आपने कभी हार का मुंह नहीं देखा। हार उस कड़वी दवा की तरह था, जो आपको यह एहसास दिलाए कि सिर्फ विकास से चुनाव नहीं जीते जा सकते। कर्नाटक के नतीजे भी इसी बात को दोबारा याद दिला रहे हैं।

सोशल मीडिया पर आपकी एक बड़ी समर्थक ने गौर करने वाली बात कही कि बीजेपी अब अपने कोर समर्थकों के लिए टीना (There is no alternative) बन गई है। (नीचे आप उसका ट्वीट देख सकते हैं) मतलब ये कि उनके पास आपको वोट देने के सिवा कोई दूसरा विकल्प ही नहीं है। जबकि कांग्रेस के साथ ऐसा नहीं है, उसके कोर वोटरों के लिए वो हमेशा इकलौती पसंद है। उन्हें पता है कि सत्ता में आने के बाद उनकी पार्टी भले ही देश को लूट ले, लेकिन निजी तौर पर उनके लिए ठीक होगी। इसलिए मेरा मानना है कि कर्नाटक का चुनावी नतीजा विकास पर जरूरत से ज्यादा जोर देने के बदले आपको सज़ा है।

अब जरा सिद्धारमैया और कांग्रेस को देखिए। जब वो सत्ता में आए थे तो सबसे पहले उन्होंने गोहत्या रोकने के अध्यादेश को रद्द कर दिया था। ताकि उनका कोर वोटर खुश हो जाए। उन्होंने शादी भाग्य स्कीम शुरू की, अल्पसंख्यकों के लिए नई स्कॉलरशिप लेकर आए, ताकि उनके कोर वोटर को एहसास हो कि उन्हें ज्यादा अहमियत मिल रही है। उन्होंने टीपू जयंती मना कर अपने वोटरों का आत्मविश्वास बढ़ाया। इतने से भी जी नहीं भरा तो उन्होंने लिंगायतों को अलग धर्म का दर्जा देकर हिंदुओं को बांटने की कोशिश की। कर्नाटक का अलग झंडा घोषित कर दिया। मुसलमानों को खुश करने के लिए कांग्रेस ने राज्यसभा में तीन तलाक बिल को पास नहीं होने दिया। ये सारी बातें बताती हैं कि कांग्रेस अपने कोर वोटर की परवाह करती है, जबकि बीजेपी ऐसा नहीं करती। क्या बीजेपी अब कुछ सीखेगी?

कांग्रेस सत्ता में आते ही हर वो कानून या नीति बदल देती है, जिसे उसके कोर वोटर पसंद नहीं करते। लेकिन बीजेपी के अंदर ऐसा करने की हिम्मत नहीं है। आपकी सरकार अब तक राइट टु एजुकेशन कानून (RTE) के उन प्रावधानों को नहीं हटा पाई, जिससे सीधे-सीधे हिंदू हितों को नुकसान हो रहा है। बीजेपी बार-बार सत्ता में आई, लेकिन वो उस कानून को छू तक नहीं पाई, जिससे सरकारों को हिंदू मंदिरों के आंतरिक मामलों में दखलंदाजी की छूट मिली हुई है। क्या कारण है कि आप हिंदू मंदिरों में सरकारी दखल को बंद नहीं करवा पाए?जहां तक राम मंदिर की बात है, कोर्ट में अपनी राय देने के अलावा आपकी सरकार कुछ खास नहीं कर पाई।

प्रधानमंत्री जी, आप तो उन लोगों को भी जेल नहीं भिजवा पाए जिन्होंने कोयला और 2जी घोटाले में देश को लूटा। जम्मू में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों को हटाने के लिए आपकी पार्टी ने कुछ भी नहीं किया। विरोधी कोर्ट के जरिए स्टे लगवा देते हैं और आपकी सरकार लाचार होकर कोर्ट के फैसले की राह देखती रहती है। आप तो एक कदम और आगे चले गए जब रमजान पर कश्मीर में आतंकवादियों के खिलाफ सीजफायर का एलान कर दिया। हम कैसे मानें कि आप मुस्लिम तुष्टीकरण के मामले में कांग्रेस से अलग हैं? मोदी जी ये बातें आपके हर समर्थक के दिल में हैं। विकास-विकास करके आप इन्हें बहुत दिन तक अनदेखी नहीं कर सकते।

हो सकता है कि मेरे जैसे समर्थक अगले चुनाव में भी आपको ही वोट दें, लेकिन बहुत सारे लोग आपको गच्चा भी दे सकते हैं। नीचे आप अपने ही एक वोटर (अब पूर्व वोटर) की बात पढ़ लीजिए। उसकी पीड़ा को समझने की कोशिश कीजिए।

मोदीजी जब देखो आप विकास का बीन बजाते रहते हैं, वंशवाद पर हमले बोलते रहते हैं। लेकिन आप ऐसा कुछ नहीं करते जिससे उस परिवार या उसके चमचों को कोई खास दिक्कत हो। ज्यादा से ज्यादा इनकम टैक्स के छापे पड़वाए उससे ज्यादा कुछ नहीं। आपके ऐसे भाषणों पर बहुत तालियां बज चुकी हैं, लेकिन बार-बार उनसे आप चुनाव नहीं जीत सकते। जरा सी बात पर इधर से उधर होने वाले वोटर और आपके इस रवैये से निराश कोर वोटर आपको गच्चा देने वाले हैं। आपने काफी विकास कर लिया। कम से कम अब अपने वोटरों के लिए भी कुछ कीजिए। मैंने एक लिस्ट तैयार की है जिस पर आपको फौरन गौर करना चाहिए:

1. शिक्षा के अधिकार के कानून (RTE) में बहुसंख्यक आबादी के हितों को नुकसान पहुंचाने वाले प्रावधानों को हटाइए, चाहे इसके लिए अध्यादेश ही क्यों न लाना पड़े।

2. कानून लाकर हिंदू मंदिरों के मामलों में दखलंदाजी के सरकारी अधिकार को खत्म कीजिए।

3. युद्ध स्तर पर बांग्लादेशियों और रोहिंग्या शरणार्थियों को बाहर निकालने का काम शुरू कीजिए। कम से कम उन राज्यों से जहां पर आपकी सरकारें हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अगर स्टे लगाया है तो उसका कोई रास्ता निकाला जा सकता है।

4. राम मंदिर पर देश को कोई भरोसा दीजिए, बताइए कि कब तक ये काम पूरा होगा।

5.जैसे आपने नोटबंदी जैसा बोल्ड स्टेप लिया था, उस तरह से फैसले कीजिए। TINA नहीं, पहला विकल्प बनिए।

आपका
एक वोटर और शुभचिंतक
नीतेश एस

(यह पोस्ट न्यूज़ वेबसाइट opindia.com में छपे नीतेश के लेख का हिंदी अनुवाद है। किसी भी प्रतिक्रिया के लिए ट्विटर पर आप उनसे सीधे संपर्क कर सकते हैं।)

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