खुले में नमाज मामले में चिंगारी भड़का रही है कांग्रेस!

गुरुग्राम में सरकारी जमीन पर नमाज पढ़ने को लेकर पैदा विवाद में पहली बार राजनीतिक हाथ सामने आया है। लोकल इंटेलिजेंस ब्यूरो ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कांग्रेस पार्टी का एक स्थानीय नेता, जेएनयू के कुछ वामपंथी एक्टिविस्ट शुरू से ही इस मामले में काफी दिलचस्पी ले रहे हैं। ये लोग गुड़गांव के वजीराबाद गांव ही नहीं, बल्कि हरियाणा के कई इलाकों में बीते 10-15 साल में बसाए गए अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को उकसाने में जुटे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इन्हीं की शहर पर बीते कुछ साल से हर शुक्रवार को हरियाणा भर में सार्वजनिक जगहों पर नमाज़ के जरिए आम लोगों को परेशान करने का काम चल रहा है। नमाज पढ़ने की ये सार्वजनिक जगहें लगातार फैलती जा रही हैं। बीते 10 साल में गुड़गांव का एक बड़ा हिस्सा नमाज की चपेट में आ चुका है। यह बात हर कोई जानता है कि ये सरकारी जमीनें हड़पने का तरीका है। जिन जगहों पर ये लोग नमाज पढ़ते हैं उस पर कुछ दिन बाद मस्जिद बनाने की कोशिश भी शुरू हो जाती है। यह भी पढ़ें: ये हनुमान मंदिर गवाह है कि यूपी में बीजेपी क्यों जीती

सियासत की कोशिश में कांग्रेस

मामले की जांच में यह बात सामने आई है कि कुछ दिन पहले नमाज़ रोके जाने के बाद लोकल मुसलमानों की एक टीम पुलिस कमिश्नर से मिलने गई थी। इस टीम में जेएनयू से संबंधित एक महिला भी शामिल थी, जिसका नाम राखी है। ये महिला अखबारों और पत्रिकाओं में लेख भी लिखती है। इसके अलावा जेएनयू का ही एक वामपंथी प्रोफेसर अपूर्वानंद भी इस टीम का हिस्सा था। पूरे मामले में जो सबसे हैरतअंगेज नाम है वो है कांग्रेस के स्थानीय नेता प्रदीप जेलदार का। बताया जा रहा है कि बांग्लादेशी घुसपैठियों को जेलदार की तरफ से समर्थन मिला हुआ है। जेलदार ने बांग्लादेशियों के लिए आंदोलन कर रही वामपंथी टीम की अगुवाई की। कांग्रेस की सरकार के दौर में इन बांग्लादेशियों को आधार कार्ड दिलाने में भी राजनीतिक साजिश की बात सामने आ रही है।

बड़ी समस्या है खुले में नमाज़

हरियाणा के कई इलाकों में खुले में नमाज पढ़ने के मामलों के कारण अक्सर तनाव की स्थिति पैदा होती रही है। 2011 में कांग्रेस सरकार के वक्त स्थानीय भाजपा नेता कुलभूषण भारद्वाज ने याचिका दी थी कि हर साल दोनों ईद के मौके पर नमाज के दौरान नेशनल हाइवे 8 पर जाम हो जाता है, उन्होंने इस पर रोक की मांग की थी, जिसके बाद सरकार ने अस्थायी तौर पर नमाज के लिए देवीलाल स्टेडियम भी दे दिया था। इस बीच हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर ने साफ कर दिया है कि “नमाज मस्जिदों या ईदगाहों में ही पढ़ी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर स्थानीय लोगों को एतराज है तो मुसलमानों को खुद ही खुली जगह में नमाज से बचना चाहिए।” सार्वजनिक जगहों पर नमाज से दूसरे धर्म वालों को दिक्कत पैदा हो रही है और कांग्रेस की जिहादी सरकारों का अंत होने के साथ लोग अब आवाज उठाने लगे हैं। उम्मीद है कि जल्द दूसरे राज्यों में भी खुले में नमाज पर पाबंदी की मांग उठनी शुरू होगी।

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