रोजगार में आए अच्छे दिन, 6 महीने में 31 लाख भर्तियां

रोजगार के मोर्चे पर मोदी सरकार ने जबर्दस्त कामयाबी हासिल की है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने भारत में नई नौकरियों के बारे में एक रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिसमें बताया गया है कि सितंबर से इस साल फरवरी तक के छह महीनों में 31 लाख से ज्यादा नए कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) खाते खोले गए हैं। नए खातों की ये संख्या सीधे-सीधे नई भर्तियों की संख्या की ओर इशारा करती है। इस आंकड़े में सरकारी नौकरियों, खेती-मजदूरी के रोजगार और दिहाड़ी का काम करने वालों की संख्या शामिल नहीं है। मतलब ये कि रोजगार सृजन का सही आंकड़ा इससे भी कहीं अधिक होगा।

बुधवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक फरवरी 2018 में 4 लाख 72 हजार 075 नए ईपीएफ खाते खुले। जबकि जनवरी 2018 में 6 लाख 4 हजार 557 नए खाते खुले। अगर सितंबर 2017 से फरवरी 2018 तक के कुल नए ईपीएफ खातों को जोड़ें तो यह संख्या 31 लाख से ज्यादा बैठती है। रॉयटर्स ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के चीफ इकोनॉमिस्ट सौम्यकांति घोष के हवाले से कहा है कि “इन आंकड़ों से यह साफ हो गया है कि बीते छह महीने में नए रोजगार देने में जबर्दस्त सफलता मिली है। इससे उन आलोचकों को जवाब मिल जाएगा जो कह रहे थे कि नए रोजगारों का सृजन नहीं हो रहा है।”

देश में हर साल डेढ़ करोड़ छोटी-बड़ी नौकरियों और रोजगार की जरूरत होती है। ऐसे समय में जब अर्थव्यवस्था के विकास की गति बहुत तेज है नए रोजगार पैदा न होने को लेकर सरकार की काफी आलोचनाएं हो रही थीं। लेकिन ताजा आंकड़े बताते हैं कि हालात उतने बुरे नहीं हैं जितना कि विपक्ष और मीडिया बता रहा था। इस रिपोर्ट में माना गया है कि नोटबंदी जैसे कड़े फैसलों से बीच में रोजगार सृजन में थोड़ी मंदी जरूर आई थी, लेकिन भारत अब उस दौर से निकल चुका है। जीएसटी लागू होने के बाद कारोबार में दोबारा तेजी देखने को मिल रही है। जिसका असर आने वाले दिनों में नई नौकरियों के रूप में दिखाई देगा। साथ ही मेक इन इंडिया और स्टार्ट अप इंडिया जैसी योजनाओं का असली असर अब दिखना शुरू हो रहा है।

अगले साल मार्च तक भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर 7 फीसदी से ऊपर रहने की उम्मीद है। ऐसे में आने वाला समय रोजगार के नजरिए से बेहतरीन होने की उम्मीद है। संगठित क्षेत्र में नए रोजगार लाने के मकसद से पीएम मोदी ने इसी साल घोषणा की थी कि निजी कर्मचारियों के ईपीएफ में कंपनी के योगदान का कुछ हिस्सा सरकार देगी। ये कर्मचारी के कुल वेतन का 12 फीसदी तक हो सकता है। इसका नतीजा हुआ है कि कंपनियां अब कर्मचारियों को ईपीएफ योजना में लाने से पल्ला नहीं झाड़ रहीं।

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