जंगलों से सफाया, लेकिन शहरों बढ़ा नक्सली खतरा

नक्सलियों के खिलाफ मोदी सरकार की रणनीति अगर ऐसे ही चलती रही, तो वो दिन दूर नहीं जब देश के जंगल वाले कई इलाकों में नक्सलियों का दबदबा बीते दिनों की बात हो जाएगी। पिछले दो दिन में कम से कम 40 नक्सली मार गिराए गए हैं। इनमें कई टॉप नक्सली नेता और ऐसे सप्लायर शामिल हैं जिनके दम पर उनका पूरा काम चलता रहा है। रविवार और सोमवार को दो बड़े ऑपरेशन में ये कामयाबी मिली है। महाराष्ट्र के नक्सल प्रभावित जिले गढ़चिरौली में हुए ये दोनों एनकाउंटर 60 किलोमीटर के अंतर पर हुए। मरने वालों की सही संख्या बताना मुश्किल है क्योंकि लाशें मिलना अभी जारी है। अभी हाल ही में देश के 44 जिलों को नक्सली हिंसा मुक्त घोषित कर दिया गया। जंगली इलाकों में नक्सलवाद की कमर टूट चुकी है और अब सुरक्षाबल पूरी तरह से हावी हैं। तो क्या अब अगला नंबर शहरी नक्सलियों का आएगा? यह भी पढ़ें: क्या आपके इर्द-गिर्द भी कोई शहरी नक्सली रहता है?

पहले बात जंगली नक्सलियों की

छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की सीमा के इलाकों में लंबे अरसे से नक्सलियों का कब्जा रहा है, लेकिन पहली बार उन्हें घर में घुसकर चुनौती मिली है। इस बार गढ़चिरौली में हुआ हमला इतना जबर्दस्त बताया जा रहा है कि नक्सलियों को संभलने का मौका नहीं मिला। कसनौर इलाके में हुए इस हमले में नक्सल कमांडर साईंनाथ और सीनू भी मारे गए। कई की लाशें पास ही पहने वाली इंद्रावती नदी में बहकर दूर-दूर के इलाकों में मिल रही हैं। एनकाउंटर की जगह से नक्सलियों के हथियारों का बड़ा जखीरा भी बरामद किया गया है। इस ऑपरेशन में महाराष्ट्र पुलिस के C60 कमांडो, गढ़चिरौली पुलिस की कांबैट यूनिट और सीआरपीएफ की नवीं बटालियन के जवानों ने हिस्सा लिया। करीब डेढ़ घंटे के अंदर ही नक्सलियों के दबदबे वाले इस पूरे इलाके को मुक्त करा लिया गया। दरअसल बीते कुछ समय से नक्सल विरोधी अभियान में सरकार और सुरक्षाबलों को लगातार सफलता मिल रही है। पिछले 5 साल में 605 नक्सली सरेंडर कर चुके हैं। जबकि 53 से ज्यादा मुठभेड़ों में मार गिराए जा चुके हैं।

शहरी नक्सलियों की बढ़ी घुसपैठ

एक तरफ जहां जंगलों में नक्सलियों का सफाया हो रहा है, शहरी इलाकों में उनकी घुसपैठ तेज हो रही है। जेएनयू जैसे विश्वविद्यालय, कई एनजीओ और मीडिया संस्थान शहरी नक्सलियों का सबसे पसंदीदा अड्डा माने जाते हैं। इसके अलावा सरकारी संस्थानों में भी नक्सलियों से सहानुभूति रखने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। गढ़चिरौली में मारे गए नक्सलियों के शहरी मददगारों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। हमेशा से यह माना जाता रहा है कि जंगलों में जो नक्सली सरकार और सेना के खिलाफ जंग लड़ रहे होते हैं उन्हें शहरों में रहने वाले उनके साथियों से आर्थिक और हथियारों की मदद मिल रही होती है। हाल के दिनों में दिल्ली में नक्सलियों के कई मददगार या तो पकड़े जा चुके हैं या एनकाउंटर में मारे गए हैं। जानकारों का मानना है कि जिस तरह से जंगलों में नक्सलियों का सफाया हो रहा है, उसकी बौखलाहट दिल्ली के शहरी नक्सलियों की तरफ से देखने को मिल सकता है। शहरी नक्सली आम तौर पर सामान्य लोगों की तरह रहते हैं, लेकिन इनके इरादे अक्सर बेहद खतरनाक होते हैं।

नक्सलियों के सफाये के बाद ज्वाइंट ऑपरेशन टीम के जवानों ने सपना चौधरी के गाने पर नाचकर जश्न मनाया। उसका वीडियो आप नीचे देख सकते हैं:

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