सीपीएम की पोलित ब्यूरो में दलितों का प्रवेश मना है!

दलितों, मजदूरों और शोषितों की बात करने वाली मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी यानी सीपीएम ने एक बार फिर से अपनी सर्वोच्च संस्था पोलित ब्यूरो में दलितों की एंट्री बंद रखी है। 17 सदस्यों की पोलित ब्यूरो में एक भी दलित नेता को जगह नहीं दी गई है। सीपीएम ने अपने पूरे इतिहास में कभी पोलित ब्यूरो के दरवाजे किसी दलित के लिए नहीं खोले। इस बार उस पर भारी दबाव था कि इसमें किसी दलित को भी मौका दिया जाए, लेकिन इस बार भी उन्हें अछूत का दर्जा ही दिया गया। यह स्थिति तब है जब पार्टी के अंदर कई बड़े और प्रतिभावान दलित नेता मौजूद हैं। लेकिन उन्हें कभी तवज्जो नहीं दी जाती है। जबकि जिस बीजेपी को दलित विरोधी बताया जाता है उसकी राष्ट्रीय कार्यकारिणी में हमेशा अच्छी-खासी संख्या में दलित, पिछड़े और आदिवासी जातियों का प्रतिनिधित्व होता है। यह भी पढ़ें: कहता था लाश पर नमक डाल दो, अब मुख्यमंत्री है!

जानबूझ कर दलितों से भेदभाव

माना जा रहा था कि केरल के प्रमुख वामपंथी दलित नेता एके बालन को इस बार पोलित ब्यूरो में जगह मिलेगी। वो काफी समय तक सेंट्रल कमेटी के सदस्य भी रहे हैं। इस समय वो केरल सरकार में मंत्री भी हैं। लेकिन पार्टी के बड़े नेताओं ने उनके साथ अछूतों जैसा बर्ताव इस बार भी जारी रखा। जबकि कई पुराने और निकम्मे सदस्यों को जस का तस बनाए रखा गया। जिन 17 सदस्यों को चुना गया है उनमें से ज्यादातर ऊंची जातियों से ताल्लुक रखते हैं। महासचिव सीताराम येचुरी खुद तेलुगु ब्राह्मण समुदाय से आते हैं। खुद सीपीएम के कई कार्यकर्ता मानते हैं कि पार्टी के बड़े नेताओं के बीच जमकर जातिवाद और क्षेत्रवाद चलता है। सभी एक-दूसरे से दुश्मनी की हद तक घृणा करते हैं। यह भी पढ़ें: एक बार फिर चीन के समर्थन में खड़ी हुई सीपीएम

महिलाओं के साथ भी बुरा बर्ताव

महिलाओं के मुद्दों पर मोमबत्ती लेकर खड़े हो जाने वाले वामपंथी संगठनों में महिलाओं की स्थिति भी बदतर है। 95 सदस्यों वाली सेंट्रल कमेटी में सिर्फ 14 महिलाओं को ही जगह मिली है। एक जगह को खाली रखा गया है। उससे ऐसा लगता है मानो सीपीएम के अंदर महिला नेताओं की कमी पैदा हो गई है। सेंट्रल कमेटी की 14 महिलाओं में से 2 को पोलित ब्यूरो में जगह दी गई है, जिनमें से एक पूर्व महासचिव और दिग्गज नेता प्रकाश करात की पत्नी बृंदा करात हैं। वो 2005 से इस पद पर जमी हुई हैं। जबकि उनका कोई जनाधार नहीं है। बृंदा करात पहली महिला थीं जिन्हें 2005 में पोलित ब्यूरो में जगह मिली थी। पार्टी की सीनियर नेता सुभाषिनी अली को भी 2015 में पोलित ब्यूरो में घुसने का मौका मिला था। इस बार वो भी अपनी जगह बचाने में किसी तरह कामयाब हो पाई हैं।

कांग्रेस से रिश्तों पर भी सीपीएम में घमासान की स्थिति है। नए महासचिव सीताराम येचुरी कांग्रेस समर्थक माने जाते हैं। जबकि पार्टी की केरल यूनिट कांग्रेस से रिश्तों की विरोधी है। केरल में लेफ्ट पार्टियों का कांग्रेस के साथ सीधा मुकाबला है। सवाल ये है कि केरल में आपस में झगड़ने वाले लेफ्ट और कांग्रेस केंद्र में कब तक एक-दूसरे के भरोसे चल पाएंगे?

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