जब रेप के आरोपों से सुप्रीम कोर्ट में छूटे थे राहुल गांधी!

अहमद पटेल के खिलाफ क्या आरोप थे?

Pgurus.com के मुताबिक 2005 के शुरुआत में मेरठ में रहने वाली सुनीता सिंह नाम की महिला ने दिल्ली पुलिस में शिकायत की कि कांग्रेस नेता अहमद पटेल ने उनके साथ बर्बर तरीके से बलात्कार किया है। शिकायत के मुताबिक ये सब महिला कांग्रेस की नेता और उस वक्त राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य यास्मीन अबरार के घर पर हुआ। महिला का दावा था कि वो एक पूर्व फौजी की पत्नी है और उनका पति अक्सर मारपीट करता है। जिससे परेशान होकर वो एक दिन घर से भाग गईं और मदद के लिए राष्ट्रीय महिला आयोग के दफ्तर पहुंचीं। आयोग ने उन्हें नारी निकेतन में ठहरवाया। करीब हफ्ते भर बाद यास्मीन अबरार वहां पर निरीक्षण के लिए आईं और उनसे मिलीं। उन्होंने महिला को अपने घर में नौकरानी के तौर पर काम करने का ऑफर दिया। महिला ने रोजी-रोटी के लिए यह काम शुरू कर दिया। कुछ दिन बाद अहमद पटेल यास्मीन अबरार के घर आए। चाय और पानी लेकर वो जब आई तो अहमद पटेल की उस पर नजर पड़ गई। शिकायत के मुताबिक यास्मीन अबरार कमरे से चली गईं और अहमद पटेल ने उसके साथ रेप किया। इसके बाद मेरठ के स्थानीय बीएसपी विधायक ने भी उसके साथ बलात्कार किया। कई कांग्रेसी नेताओं ने भी बाद में उसके साथ रेप किया। इस दौरान उसे जयपुर और अजमेर ले जाया गया। दिल्ली पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की जिसके बाद सुनीता सिंह ने हाई कोर्ट में अपील की। लेकिन वहां पर उसकी याचिका रद्द कर दी गई, क्योंकि कोर्ट में पुलिस ने कह दिया कि मामले की जांच चल रही है और इसमें कुछ वक्त लग सकता है।

2006 में महिला ने सुप्रीम कोर्ट में फरियाद लगाई। लेकिन इसी दौरान रहस्यमय तरीके से महिला ने आरोप वापस ले लिए। उसने याचिका में बदलाव करते हुए उसमें अहमद पटेल समेत सारे नामों को हटा दिया और कहा कि सफेद खादी कुर्ता पहने हुए आदमी ने उससे बलात्कार किया। लेकिन यह शिकायत बनी रही कि राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य यास्मी अबरार के घर पर बलात्कार हुआ। यह खबर भी देश के किसी अखबार या चैनल ने नहीं छापी या दिखाई। सिर्फ ट्रिब्यून अखबार ने एक रिपोर्ट 2006 में छापी थी। जिसकी तस्वीर भी pgurus.com ने अपनी वेबसाइट पर पोस्ट की है। वेबसाइट ने इस बात पर सवाल उठाया है कि हाईप्रोफाइल मामलों में मीडिया चुप्पी क्यों साध लेता है। हो सकता है कि राहुल गांधी या अहमद पटेल पर बदनीयती के तहत आरोप लगवाए गए हों, लेकिन मामले की जांच और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई की खबरों को मीडिया ने क्यों सेंसर कर दिया? सुकन्या देवी और उसका परिवार आज भी रहस्य बना हुआ है। क्या उसका सच जानने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए?

(इस रिपोर्ट में किए गए दावों की न्यूज़लूज़ पुष्टि नहीं करता। हालांकि अदालती कार्रवाई के सभी दस्तावेजी सबूत उपलब्ध हैं। फिर भी किसी स्पष्टीकरण के लिए वेबसाइट pgurus.com से संपर्क करें)

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