जब रेप के आरोपों से सुप्रीम कोर्ट में छूटे थे राहुल गांधी!

ऐसे समय में जब देश में बलात्कार के मामलों को लेकर भारी हंगामा मचा हुआ है, इस अपराध को लेकर सरकारों और राजनीतिक दलों के रवैये पर भी सवाल उठ रहे हैं। न्यूज़ वेबसाइट pgurus.com ने इसी सवाल को उठाते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और उनके करीबी नेता अहमद पटेल पर लगे आरोपों से जुड़ी खबर पोस्ट की है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इन दोनों पर बलात्कार के आरोप लगे थे, लेकिन कांग्रेस सरकार के वक्त केस वापस ले लिया गया। वेबसाइट के मुताबिक ये मामला 2007 का है जब यूपीए-1 की सरकार थी। तब सोनिया गांधी के बेटे राहुल गांधी पर बलात्कार का आरोप लगा था और ये केस सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। ठीक इसी तरह अहमद पटेल पर भी आरोप लगे और वो केस भी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। इन दोनों ही मामलों में याचिकाकर्ता ने बहुत ही रहस्यमय तरीके से सुप्रीम कोर्ट में जाकर अपने आरोप वापस ले लिए। जब ये मामले चल रहे थे तब मीडिया, सामाजिक संगठनों, महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने पूरी तरह चुप्पी साध रखी थी। किसी चैनल या अखबार ने खबर नहीं दिखाई। यहां तक कि तब भी नहीं जब कोर्ट में याचिकाकर्ता ने आरोप वापस लिए और केस रद्द कर दिया गया। न्यूज़लूज़ इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है। किसी भी शंका की स्थिति में वेबसाइट pgurus.com की मूल रिपोर्ट को पढ़ें।

राहुल गांधी का क्या मामला था?

2007 की शुरुआत में इंटरनेट पर प्राइवेट ब्लॉग्स के जरिए कई लोगों ने राहुल गांधी पर आरोप लगाए। इनमें कहा गया था कि 3 दिसंबर 2006 की रात को अमेठी के सर्किट हाउस में राहुल गांधी और उनके कुछ दोस्तों ने एक स्थानीय कांग्रेसी नेता की बेटी सुकन्या देवी के साथ बलात्कार किया। इनमें दावा किया गया था कि लड़की और उसके परिवार ने दिल्ली आकर सोनिया गांधी से शिकायत की, लेकिन उसके बाद से पूरा परिवार गायब है। उस वक्त उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी। इस दौरान मीडिया और दूसरे तमाम माध्यमों पर इस मसले का कोई जिक्र तक नहीं मिलता है। लेकिन मार्च 2011 में समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक किशोर समरीते ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में एक अर्जी देकर आरोपों की जांच और सुकन्या देवी और उसके परिवार का पता लगाने की याचिका डाल दी। इसके बाद एक जज की खंडपीठ ने राज्य सरकार, पुलिस और राहुल गांधी को नोटिस जारी किया। लोकल अखबारों में ये खबर छपी, लेकिन दिल्ली के न्यूज चैनलों ने अब भी चुप्पी साधे रखी। याचिका में समाजवादी पार्टी के नेता ने दावा किया था कि वो खुद सुकन्या देवी के गांव गए थे और पाया कि घर पर कोई नहीं है। गांववालों को कुछ पता नहीं था कि परिवार अचानक कहां गायब हो गया। इससे भी हैरानी वाली घटना तब हुई जब दो दिन बाद ही कृति सिंह नाम की एक लड़की सामने आई और उसने इलाहाबाद हाई कोर्ट की ही एक अन्य बेंच में अर्जी डालकर कहा कि मैं ही सुकन्या देवी हूं और याचिकाकर्ता किशोर समरीते के खिलाफ जांच की जाए। उसका आरोप था कि किशोर समरीते ने उसके चरित्र हनन के मकसद से कोर्ट में याचिका दी है। इस मामले में किशोर समरीते का पक्ष पूछे बगैर ही जज ने मामले की सीबीआई जांच के आदेश दे दिए। ये आदेश उन सभी ब्लॉग्स के खिलाफ था जिन पर इस मामले से जुड़ी कहानियां छापी गई थीं। पता करने को कहा गया कि इन रिपोर्ट्स को छपवाने के पीछे क्या साजिश है। अदालत ने किशोर समरीते पर 50 लाख रुपये का जुर्माना भी ठोंक दिया। इस आदेश का नतीजा यह हुआ कि पहली बेंच का राहुल गांधी को भेजा गया नोटिस अपने आप ही अमान्य हो गया। किशोर समरीते ने डिवीजन बेंच के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने डिवीजन बेंच के फैसले पर रोक लगा दी और 2012 में केस की सुनवाई शुरू हुई। लेकिन अचानक किशोर समरीते ने आरोप वापस ले लिए और कहा कि मेरे पास निजी तौर पर घटना की कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि मैंने याचिका समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव और उनके बेटे अखिलेश यादव के कहने पर डाली थी। उन्होंने यहां तक कहा कि याचिका डालने का फैसला दिल्ली में मुलायम सिंह यादव के घर पर हुआ था।
राहुल गांधी के वकील के तौर पर पीपी राव कोर्ट में हाजिर हुए थे और उन्होंने तीन दिन तक जिरह किया था। उनका जोर इस बात पर था कि शिकायत एक राजनीतिक साजिश के तहत डलवाई गई है, ताकि राहुल गांधी को राजनीति में आगे बढ़ने से रोका जा सके। सीबीआई ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा कि आरोप गलत है। अक्टूबर 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने किशोर समरीते की याचिका को खारिज कर दिया और इसे राजनीतिक साजिश मानते हुए याचिकाकर्ता पर 10 लाख का जुर्माना लगा दिया। वेबसाइट के मुताबिक कुछ सवाल अब भी बने रहे। यह साफ नहीं हुआ कि किशोर समरीते ने सुप्रीम कोर्ट में यू-टर्न क्यों ले लिया? अगर ये मुलायम सिंह और अखिलेश यादव की साजिश थी तो उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई? दोनों ने कभी इस मामले पर एक भी शब्द क्यों नहीं बोला? 2017 में यूपी चुनाव से ठीक पहले राहुल गांधी ने उन्हीं अखिलेश यादव से दोस्ती क्यों कर ली, जिन्होंने कभी उनके खिलाफ इतनी घिनौनी साजिश रची थी? वेबसाइट pgurus.com ने इस बारे में सुप्रीम कोर्ट के फैसले की पूरी कॉपी भी पोस्ट की है।

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