‘कांग्रेस के लुटाए 4 लाख करोड़ रुपए वसूले जा चुके हैं’

सरकारी बैंकों के डूबे हुए करीब 9 लाख करोड़ रुपये के कर्जे के मामले में मोदी सरकार को बड़ी कामयाबी मिली है। यह जानकारी सामने आई है कि पैसे लेकर भागने वाली कंपनियों और व्यक्तियों से अब तक 4 लाख करोड़ रुपये की रकम वसूली जा चुकी है। इसमें से ज्यादातर वो लोन हैं जो 2014 से पहले कांग्रेस सरकार की दौर में बांटा गया था। दरअसल 2016 में मोदी सरकार ने कंपनियों के दिवालिया होने से जुड़े इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) को लागू किया था। जिसके बाद से बैंकों से कर्ज लेकर खुद को दिवालिया घोषित कर देने का जाना-माना तरीका अब खत्म हो गया है। सीआईआई के एक सम्मेलन में कंपनी मामलों के सचिव इंजेती श्रीनिवासन ने बताया कि डूबे पैसे की वसूली का काम तेजी से चल रहा है और जल्दी ही कानूनी प्रक्रिया से बाकी रकम भी वापस आने की पूरी उम्मीद है।

माल्या, नीरव मोदी से भी बड़े चोर!

मीडिया का सारा ध्यान विजय माल्या और नीरव मोदी पर रहा है। लोग भी इन्हीं दोनों को जानते हैं। जबकि सच्चाई यह है कि ये दोनों बहुत छोटे चोर हैं। माल्या का घोटाला 9 हजार करोड़ का जबकि नीरव मोदी का घोटाला 11.5 हजार करोड़ का है। कांग्रेस सरकार के वक्त इससे कहीं अधिक रकम ऐसी कंपनियों को बांटी गई थी जो अब पैसे लौटाने के बजाय खुद को दिवालिया घोषित करवाना चाह रहे थे। आरबीआई ने पिछले साल जून में ऐसे 12 कर्जदारों के नाम कोर्ट को सौंपे थे जिनके पास कुल डूबे हुए कर्जों (एनपीए) का 25 फीसदी है। इन सभी के खिलाफ अब नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में केस चल रहा है। यही वो कानूनी प्रक्रिया है जिससे गुजरकर किसी बेइमान बिजनेसमैन या कंपनी से रकम की वसूली की जाती है। ये 12 सबसे बड़ी लुटेरी कंपनियां हैं- एस्सार स्टील (45000 करोड़), लैंको इन्फ्राटेक (44000 करोड़), भूषण स्टील्स (42000 करोड़), भूषण पावर एंड स्टील (37000 करोड़), आलोक इंडस्ट्रीज (23000 करोड़), मॉनेट इस्पात (10000 करोड़), इरा इन्फ्रा इंजीनियरिंग, एबीजी शिपयार्ड, जेपी इन्फ्राटेक, इलेक्ट्रोस्टील, एमटेक ऑटो, ज्योति स्ट्रक्चर्स।

कांग्रेस सरकार ने लुटाया देश का धन

संसद में पीएम मोदी भी कह चुके हैं कि पिछली कांग्रेस सरकार के वक्त बिना सोचे-समझे बैंकों के पैसे को कंपनियों को बांटा गया। इनमें से ज्यादातर कंपनियों ने कभी भी कर्ज वापस करने की कोशिश तक नहीं की और खुद को दिवालिया घोषित करने के लिए अर्जी डाल दी। लेकिन मोदी सरकार के आने के बाद उनके मंसूबे नाकाम हो गए। प्रधानमंत्री मोदी लोकसभा को बता चुके हैं कि 2014 में सत्ता में आने के वक्त उन्हें बताया गया था कि बैंकों का 36 फीसदी लोन डूबा हुआ है, लेकिन जब जांच करवाई तो पता चला कि 82 फीसदी तक पैसा वापस नहीं आया है। बैंकों की खस्ता हालत को देखते हुए सरकार ने सुधार लागू कराए और 2.12 लाख करोड़ का री-कैपिटलाइजेशन किया। ताकि बैंक खुद ही दिवालिया न हो जाएं।

भ्रम फैलाने में जुटी है कांग्रेस पार्टी

बैंकों के पैसे को प्राइवेट कारोबारियों के बीच लुटाने के मामले में सीधे तौर पर 2004 से 2014 तक की कांग्रेस सरकार शामिल रही है। कई लोन तो बाकायदा वित्त मंत्रियों की सिफारिश पर दिए गए हैं। यही कारण है कि बार-बार तब के वित्त मंत्री पी चिदंबरम की भूमिका पर सवाल उठते हैं। यह बात भी कही जाती है कि खुद अर्थशास्त्री होने के बावजूद तब के पीएम मनमोहन सिंह ने इस पर कभी ध्यान क्यों नहीं दिया। हैरानी की बात यह है कि वही कांग्रेस पार्टी अब खुल रहे घोटालों के लिए मोदी सरकार को दोषी ठहराने की कोशिश कर रही है, जबकि ये सारी रकम उसके वक्त में ही बांटी गई थी। इस मामले में मीडिया की भी मिलीभगत दिखाई देती है। क्योंकि वो बड़ी सफाई से सारा फोकस माल्या और नीरव मोदी पर करके केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा करती है। कारण ये कि बैंकों से दिलाई गई रकम का अच्छा-खासा हिस्सा मीडिया कंपनियों को भी मिला है।

नीरव मोदी के भागने की घटना के बाद मोदी सरकार ने 91 उद्योगपतियों को नो-फ्लाई लिस्ट में डाल दिया है, ताकि वो विदेश न भाग सकें। ICICI बैंक घोटाले के आरोपी राजीव कोचर को सिंगापुर भागने की कोशिश करते हुए बीते दिनों मुंबई एयरपोर्ट पर हिरासत में भी लिया जा चुका है।

कृपया लेख कॉपी-पेस्ट न करें। कई लोग पोस्ट कॉपी करके फेसबुक और व्हाट्सएप पर शेयर कर देते हैं, जिससे वेबसाइट की आमदनी काफी कम हो गई है। राष्ट्रवाद की विचारधारा पर आधारित यह वेबसाइट बंद हो जाएगी तो क्या आपको खुशी होगी? कृपया खबरों का लिंक शेयर करें।
एक अपील: न्यूज़लूज़ के जरिए हम राष्ट्रवादी पत्रकारिता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। इस वेबसाइट पर होने वाला खर्च बहुत ज्यादा है और हमारी आमदनी काफी कम। हम अपने काम को जारी रख सकें इसके लिए हमें आर्थिक मदद की जरूरत है। ये हमारे लिए ऑक्सीजन का काम करेगी। डोनेट करने के लिए क्लिक करें:

comments

Tags: , ,