चंदा कोचर और कांग्रेस का है ‘पद्म भूषण कनेक्शन’

आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ चंदा कोचर इन दिनों विवादों में हैं। यह पता चला है कि उनके बैंक ने साल 2012 में वीडियोकॉन कंपनी को 3,250 करोड़ रुपये का लोन दिया था। इसके बाद वीडियोकॉन के चेयरमैन वेणुगोपाल धूत ने 64 करोड़ रुपये का निवेश चंदा कोचर के पति दीपक कोचर की कंपनी न्यूपावर रिन्यूएबल में किया। पहली नजर में ये वीडियोकॉन को गलत तरीके से फायदा पहुंचाने और इसके बदले में रिश्वत लेने का मामला है। इस मामले में सीबीआई और इनकम टैक्स की जांच चल रही है। दरअसल आईसीआईसीआई बैंक और वीडियोकॉन में निवेश करने वाले अरविंद गुप्ता नाम के शख्स ने पीएम नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर इस मामले का खुलासा किया था।  इसी के आधार पर प्रधानमंत्री ने जांच शुरू करवाई है। इस मामले में आरोपी चंदा कोचर के परिवार ने विदेश भागने की भी कोशिश की थी, लेकिन जांच एजेंसियों ने उन्हें एयरपोर्ट पर हिरासत में ले लिया। चंदा कोचर पर कुछ राजनीतिक दलों को फायदा पहुंचाने के भी आरोप हैं। पूरे मामले में तब के वित्त मंत्री पी चिदंबरम की भूमिका भी सवालों में है। क्योंकि आम तौर पर माना जाता रहा है कि उस दौर में चिदंबरम के दबाव में निजी और सरकारी दोनों बैंकों ने कई ऐसे लोगों को लोन दिए जो आज दिवालिया हो चुके हैं।

चंदा कोचर पर मेहरबान थी कांग्रेस!

ICICI बैंक में ट्रेनी के तौर पर ज्वाइन करने वाली चंदा कोचर का करियर ग्राफ अपने आप में काफी कुछ कहता है। 2007 में वो बैंक की चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर बन गईं और इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा। बैंक में ऊंचे पदों पर रहते हुए चंदा कोचर ने कई कारोबारी समूहों और नेताओं को उपकृत किया। उन्हें बिना शर्तों पर लोन बांटे और कथित तौर पर बदले में निजी फायदा हासिल किया। वीडियोकॉन को 2012 में 3,250 करोड़ रुपये के लोन के अलावा उन्होंने ही मेहुल चोक्सी के गीतांजली ग्रुप को भी वर्किंग कैपिटल की सुविधा दे रखी थी। लेकिन मोदी सरकार के आने के बाद से चंदा कोचर का वक्त खराब चल रहा है। सरकार के दबाव में ही बैंक को वीडियोकॉन को दिए लोन की रकम को डूबी हुई यानी डिफाल्ट घोषित करना पड़ा। हालांकि निजी बैंक की अधिकारी होने के नाते इस दौरान वो कई बार प्रधानमंत्री के साथ भी नजर आईं। पीएम मोदी लोकसभा में बता चुके हैं कि 2014 से पहले कॉरपोरेट और सरकारी बैंकों को कुल 52 लाख करोड़ रुपये का चूना लगाया गया है। समझना मुश्किल नहीं है कि चंदा कोचर भी अपने बैंक का माल भी ऐसे कारोबारियों को बांट रही थीं, जिनसे रिकवरी के चांस कम थे।

कांग्रेस ने दिलवाया था पद्म भूषण

यह किसी से छिपा नहीं है कि कांग्रेस सरकार के समय फायदा-नुकसान देखकर पद्म पुरस्कार बांटे जाते रहे। 2011 में मनमोहन सरकार ने चंदा कोचर को सीधे पद्म भूषण सम्मान देने का एलान किया था। सवाल ये कि किसी सरकारी बैंक के बड़े अधिकारी के बजाय एक प्राइवेट बैंक के अफसर को सर्वोच्च सम्मान देने के पीछे कुछ न कुछ तो हिसाब-किताब रहा ही होगा। पद्म भूषण पाने के एक साल बाद ही वीडियोकॉन को लोन दिया गया। सिर्फ कांग्रेस सरकार ही नहीं, उस दौर में मीडिया ने भी चंदा कोचर की तारीफों के खूब पुल बांधे। कई चैनलों-अखबारों ने उन्हें देश की सबसे ताकतवर महिलाओं की लिस्ट में भी डाला। उस दौर में चंदा कोचर के बारे में मैगजीनों में लेख छपा करते थे। अब इस बात की जांच की मांग हो रही है कि कहीं इस महिमामंडन की आड़ में चंदा कोचर ने कुछ और लोगों को भी अनुचित फायदा पहुंचवाया।

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