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पीयूष गोयल के खिलाफ फर्जी खबर के पीछे कांग्रेस?

मोदी सरकार ने फेक न्यूज़ फैलाने वाले पत्रकारों पर सख्ती के अपने नोटिफिकेशन को विवाद के डर से वापस ले लिया। उधर, फर्जी खबरों का खेल बेरोक-टोक जारी है। कांग्रेस समर्थक प्रोपोगेंडा वेबसाइट ‘द वायर’ ने एक रिपोर्ट छापी है, जिसमें दावा किया गया है कि पीयूष गोयल के परिवार से जुड़ी एक कंपनी ने 650 करोड़ रुपये का बैंक का लोन वापस नहीं किया। तथ्यों की जांच करें तो पहली नजर में ही समझ में आ जाता है कि रिपोर्ट पूरी तरह से मनगढ़ंत है। इससे पहले द वायर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल के बेटे शौर्य डोवाल से जुड़ी ऐसी ही फर्जी रिपोर्ट पब्लिश कर चुका है। जय शाह ने तो वेबसाइट पर 100 करोड़ रुपये मानहानि का मुकदमा भी कर रखा है। खास बात है कि ये सारी रिपोर्ट राडिया टेप कांड में बदनाम हो चुकी पत्रकार रोहिणी सिंह की हैं। उन्हें कांग्रेस पार्टी का बेहद करीबी माना जाता है। आप समझ सकते हैं कि मोदी सरकार ने जब फेक न्यूज छापने वाले पत्रकारों के खिलाफ नोटिफिकेशन जारी किया तो इतना हंगामा क्यों मचा था।

पीयूष गोयल पर मढ़े फर्जी आरोप

‘द वायर’ ने रिपोर्ट में जताने की कोशिश की है कि पीयूष गोयल और उनके परिवार के शिरडी इंडस्ट्रीज नाम की उस दिवालिया कंपनी से रिश्ते हैं। जबकि सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है। आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक पीयूष गोयल 2008 में इस कंपनी के डायरेक्टर बने थे और 2010 में ही उन्होंने इससे इस्तीफा दे दिया था। वेबसाइट की रिपोर्टर ने इस बुनियादी तथ्य को छिपा लिया। जबकि अपने इस्तीफे में पीयूष गोयल ने साफ-साफ लिखा है कि राज्यसभा सांसद के तौर पर चुनाव के कारण वो शिरडी इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड से इस्तीफा दे रहे हैं। ये कंपनी मीडियम डेन्सिटी फाइबर बनाने का काम करती थी। बिना जांच के ‘द वायर’ ने लिखा है कि उन्होंने इस बात को घोषित नहीं किया है। इससे भी अहम बात यह कि लोन लेने और वापस न करने का खेल पीयूष गोयल के कंपनी छोड़ने के बाद हुआ है। इस दौरान केंद्र में मनमोहन सिंह की सरकार थी। लोन की लेनदेन और पैसे न लौटाने का सारा मामला 2010 के बाद हुआ। पीयूष गोयल पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं। कोई भी सीए ऐसी तमाम कंपनियों में डायरेक्टर जैसे पदों पर रहता है। सवाल ये कि कंपनी छोड़ देने के बाद अगर उसमें कोई गड़बड़ हो तो सीए क्या कर सकता है। वैसे भी अगर ये कोई घोटाला है तो कांग्रेस को जांच की मांग करते हुए कोर्ट जाना चाहिए था, लेकिन इसके बजाय उसकी दिलचस्पी झूठ फैलाने में अधिक मालूम होती है।

डायरेक्टर बनने के पहले का लोन

शिरडी इंडस्ट्री ने जिन लोन को वापस नहीं किया वो पीयूष गोयल के डायरेक्टर बनने के पहले से ही मिल चुके थे। लोन मिलने के समय तक कंपनी से पीयूष गोयल के कोई संबंध नहीं थे। शुरू में बैंकों के लोन वापस होते रहे। जिस दौरान पीयूष गोयल डायरेक्टर थे, उस दौरान भी नियमित तौर पर बैंकों को रकम लौटाई जा रही थी। इस बात का जिक्र कंपनी के बारे में जारी क्रिसिल की रिपोर्ट में भी किया गया है। सबसे मजेदार बात यह हुई कि द वायर की इस फर्जी रिपोर्ट का मतलब समझे बिना राहुल गांधी ने इसे ट्वीट करके मोदी सरकार पर हमला बोलने की कोशिश की। लेकिन जो तथ्य सामने आ रहे हैं उससे तो यही साबित होता है कि नेशनल हेराल्ड घोटाले में खुद जमानत पर चल रहे राहुल गांधी को मामला समझने से ज्यादा जल्दी उसके आधार पर जनता में भ्रम फैलाने में है। देखिए प्रधानमंत्री बनने के सपने देख रहे राहुल गांधी की समझ का एक नमूना: 

क्यों निशाने पर हैं पीयूष गोयल?

दरअसल बीते कुछ साल में पीयूष गोयल सरकारी मोर्चे पर मोदी सरकार के सबसे अहम चेहरों में से एक साबित हुए हैं। वो रेलवे और कोयला मंत्रालय का काम देख रहे हैं। ये वो दो मंत्रालय हैं जिनमें पिछली कांग्रेस सरकार ने सबसे ज्यादा घोटाले किए। मोदी सरकार बनने के वक्त ये दोनों विभाग कंगाल हो चुके थे और बीते 4 साल में वहां हालत में काफी सुधार हुआ है। इसी तरह बिजली मंत्रालय में रहते हुए उन्होंने उन गांवों तक बिजली पहुंचाई, जिन्हें 70 साल तक कांग्रेस की सरकारों ने अंधेरे में रखा था। ऐसे में कांग्रेस ने पीयूष गोयल को टारगेट करने की रणनीति बनाई है।

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