फेक न्यूज फैलाने वालों पर मोदी सरकार का डंडा

दायीं तस्वीर स्मृति ईरानी की है। बायीं चारों तस्वीरें विवादित पत्रकारों की हैं। इस खबर से इनका कोई संबंध अगर पाया जाता है तो यह संयोग मात्र होगा।

नरेंद्र मोदी सरकार आने के बाद से उसे बदनाम करने के लिए मीडिया में फर्जी खबरों की बाढ़ आई हुई है। इस समस्या से निपटने के लिए आखिरकार सरकार ने सख्ती शुरू कर दी है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने एक सर्कुलर जारी किया है, जिसके मुताबिक प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो यानी पीआईबी से मान्यताप्राप्त कोई भी पत्रकार अगर फेक न्यूज फैलाने की कोशिश करता है तो इसकी एक तय प्रक्रिया के तहत शिकायत की जा सकेगी। पत्रकार अगर प्रिंट मीडिया का हुआ तो प्रेस काउंसिल और टीवी का हुआ तो न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन यानी एनबीए को सूचना भेजी जा सकेगी। इस आदेश से देश के कई कथित फाइवस्टार पत्रकारों की नींद उड़ी हुई। अब तक मीडिया की आजादी के नाम पर इन पत्रकारों को कुछ भी करने की छूट मिलती रही है। जिसके कारण आम लोगों में काफी नाराजगी है। पिछले दिनों यह जानकारी भी सामने आ चुकी है कि कांग्रेस के लिए चुनावी रणनीति बनाने वाली ब्रिटिश एजेंसी कैंब्रिज एनालिटिका कई पत्रकारों को बाकायदा पैसे देकर झूठी खबरें उड़वा रही है।

मीडिया की आजादी का दुरुपयोग बंद होगा!

देश में मीडिया को आजादी है, लेकिन कुछ पत्रकार इस आजादी का गलत इस्तेमाल करते हुए फर्जी खबरें फैलाने में जुटे हैं। अब ऐसे पत्रकारों की शिकायत के बाद संबंधित एजेंसी को 15 दिन में मामला सुलझाना होगा। शिकायत दर्ज होने के बाद आरोपी पत्रकार की पीआईबी एक्रिडेशन/मान्यता जांच पूरी होने तक रद्द रहेगी। शिकायत सही पाए जाने पर पहली बार मान्यता छह महीने के लिए रद्द कर दी जाएगी। अगर दूसरी बार कोई पत्रकार फर्जीवाड़े की कोशिश करता है तो यह सज़ा एक साल तक हो सकती है। तीसरी बार फर्जी खबर फैलाते पकड़े जाने पर पीआईबी का एक्रिडेशन हमेशा के लिए रद्द कर दिया जाएगा। इन पत्रकारों की मान्यता में भी इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि कहीं वो फेक न्यूज फैलाने में शामिल तो नहीं रहे हैं।

कांग्रेस से जुड़े कई पत्रकारों पर है आरोप

ऐसा महसूस किया जा रहा है कि मोदी सरकार आने के बाद से मीडिया में फेक न्यूज की समस्या कुछ ज्यादा ही बढ़ गई है। ऐसी ज्यादातर खबरें सरकार के खिलाफ जनता के बीच भ्रम फैलाने के मकसद से उड़ाई गई होती हैं। उदाहरण के तौर पर पिछले दिनों ‘कारवां’ नाम की वामपंथी रुझान वाली पत्रिका ने सीबीआई के जज ब्रज गोपाल लोया की मौत को लेकर झूठी खबर उड़ाई थी। कांग्रेस ने उसे जमकर मुद्दा बनाया था और उसी के इशारे पर एनडीटीवी के रवीश कुमार और आज तक चैनल के राजदीप सरदेसाई और पुण्य प्रसून वाजपेयी ने इसे खूब हवा दी थी। जबकि सारे तथ्य सामने आ चुके थे कि वो खबर सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की छवि खराब करने के लिए छपवाई गई थी।

फिलहाल इस आदेश से एनडीटीवी और ऐसे दूसरे मीडिया संस्थानों में सबसे ज्यादा बेचैनी देखने को मिल रही है। उन्हें लग रहा है कि खुलेआम झूठी खबरें फैलाने की उनकी आजादी कहीं खत्म न हो जाए।

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