Home » Loose Top » हिंदू धर्म के खात्मे के लिए सोनिया गांधी का ‘गेमप्लान’
Loose Top

हिंदू धर्म के खात्मे के लिए सोनिया गांधी का ‘गेमप्लान’

बांटो और राज करो की अपनी नीति के तहत कांग्रेस पार्टी ने अब हिंदुओं को टुकड़े-टुकड़े बांटने का अभियान शुरू किया है। इसके तहत कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने लिंगायतों को अलग धर्म के तौर पर मान्यता देने का एलान किया है। यूं तो इसे कांग्रेस का चुनावी दांव बताया जा रहा है, लेकिन जानकारों के मुताबिक इसके पीछे सोनिया गांधी का बरसों पुराना एजेंडा है। बताया जाता है कि हिंदू धर्म को कमजोर करने और ईसाई मिशनरियों का काम आसान करने की नीयत से सोनिया गांधी काफी समय से कुछ लिंगायत धर्म गुरुओं को उकसाने में जुटी थीं। कर्नाटक में लिंगायत समुदाय की आबादी 20 फीसदी के आसपास है। कांग्रेस को लगता है कि इस दांव से उसे कर्नाटक में ताकतवर लिंगायत समुदाय का एकमुश्त वोट मिल जाएगा और वो दूसरी बार सरकार बना लेगी।

क्या अलग धर्म चाहते हैं लिंगायत?

कुछ दिन पहले तक कर्नाटक में लिंगायतों ने अलग धर्म की मान्यता के लिए प्रदर्शन आयोजित किए थे, लेकिन ऐसा नहीं था कि उनको हिंदू धर्म से कोई शिकायत थी। दरअसल अल्पसंख्यक का दर्जा पाने की मांग के पीछे कुछ और ही कारण ता। लिंगायतों की मांग है कि उन्हें राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग एक्ट 1992 के तहत अल्पसंख्यक माना जाए। मुस्लिम, सिख और ईसाई समुदाय को मिलाकर देश में अभी कुल 6 अल्पसंख्यक धर्म हैं। संविधान का अनुच्छेद 30 सभी अल्पसंख्यकों को धर्म आधारित शिक्षा संस्थान खोलने की छूट देता है। इन संस्थानों को अल्पसंख्यक संस्थान कहा जाता है। सरकार इनके कामकाज में कोई दखल नहीं दे सकती है। यही कारण है कि लिंगायतों में भी अल्पसंख्यक तबके का दर्जा पाने की मांग तेज़ हुई। कर्नाटक में लिंगायत समुदाय के कई पैसे वाले लोग इंजीनियरिंग, मेडिकल और मैनेजमेंट कॉलेज चला रहे हैं। अल्पसंख्यक बनने की मांग को इसी ताकतवर लॉबी ने बढ़ावा दिया। क्योंकि अभी उनके संस्थानों में सरकारी दखलंदाजी होती रहती है। यह भी पढ़ें: कर्नाटक में चर्च के लिए खुला सरकारी खजाना

मिशनरियों के लिए सोनिया का दांव

2005 में सोनिया गांधी के दबाव में मनमोहन सिंह सरकार ने संविधान में 93वें संशोधन के जरिए अनुसूचित जाति और जनजाति को भी यह छूट दिलवा दी। इस संशोधन का मतलब था कि सरकार किसी हिंदू के शिक्षा संस्थान को कब्जे में ले सकती है, लेकिन अल्पसंख्यकों और हिंदुओं की अनुसूचित जाति और जनजाति के संस्थानों को छू भी नहीं सकती। दलितों और आदिवासियों को हिंदू धर्म से अलग करने की सोनिया गांधी की ये सबसे बड़ी चाल थी। हैरानी इस बात की रही कि तब लालकृष्ण आडवाणी की अगुवाई वाली बीजेपी ने विरोध के बावजूद संसद में सरकार के पक्ष में वोट दिया था। इस संशोधन का असर यह हुआ कि किसी हिंदू के लिए स्कूल या कॉलेज चलाना लगभग असंभव हो गया। रही सही कसर सोनिया गांधी के ही दबाव में 2009 में लागू कराए गए शिक्षा के अधिकार कानून ने पूरी कर दी। क्योंकि आम संस्थानों को 25 फीसदी गरीब छात्रों को दाखिला देना जरूरी कर दिया गया, जबकि अल्पसंख्यक संस्थानों पर ऐसी कोई बाध्यता नहीं है। यहां तक कि उन्हें अनुसूचित जाति और जनजातियों को आरक्षण देना भी जरूरी नहीं किया गया।

हिंदू विरोधी है शिक्षा का अधिकार

सोनिया-मनमोहन की सरकार ने जब शिक्षा का अधिकार लागू किया तो उसके नियमों में ऐसी चालबाजी की गई कि देश में हिंदुओं के शिक्षा संस्थान धीरे-धीरे पूरी तरह खत्म हो जाएं। इसके कानून में नए स्कूल-कॉलेज खोलने के बजाय हिंदुओं के संस्थानों पर बंदिशें लगाने और ईसाई और मुसलमानों को बढ़ावा देने पर जोर था। आज हालत ये है कि केरल में 14 में से 12 प्राइवेट मेडिकल कॉलेज मुस्लिम संस्थाओं के हैं। इन कॉलेजों के जरिए ही सैकड़ों हिंदू लड़कियों को लव जिहाद का शिकार बनाया जा रहा है। पिछले दिनों चर्चा में आया हदिया का मामला भी इसी तरह का है। देश भर में अब तक 3000 से ज्यादा हिंदुओं द्वारा संचालित शिक्षण संस्थान बंद हो चुके हैं और इससे भी ज्यादा आखिरी सांसें गिन रहे हैं। जबकि ईसाई और इस्लामी संस्थाएं फल-फूल रही हैं।

लिंगायत ‘धर्म’ तो बस शुरुआत है

दरअसल ईसाई मिशनरियों की मदद से सोनिया गांधी ने हिंदू धर्म को पूरी तरह से नष्ट करने के लिए एक रोडमैप तैयार कर रखा है। इसके तहत बारी-बारी सभी जातियों और समुदायों को हिंदू मुख्यधारा से अलग करके सभी को आपस में लड़ाने की योजना है। ताकि ये सभी आसानी से ईसाई मिशनरियों के जाल में फंस सकें। आगे चलकर कबीरपंथी, नाथ संप्रदाय, वैष्णव जैसे समुदायों को भी अलग धर्म की मान्यता देने की मांग उठ सकती है। इससे पहले कांग्रेस जैन, सिख और बौद्ध को हिंदू धर्म से अलग कर ही चुकी है।
यह भी पढ़ें: हिंदू धर्म को टुकड़े-टुकड़े करना चाहती हैं सोनिया

आप से एक अपील: कृपया लेख कॉपी-पेस्ट न करें। कई लोग पोस्ट कॉपी करके फेसबुक और व्हाट्सएप पर शेयर कर देते हैं, जिससे वेबसाइट की आमदनी काफी कम हो गई है। राष्ट्रवाद की विचारधारा पर आधारित यह वेबसाइट बंद हो जाएगी तो क्या आपको खुशी होगी? कृपया खबरों का लिंक शेयर करें।

न्यूज़लूज़ के जरिए हम राष्ट्रवादी पत्रकारिता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। इस वेबसाइट पर होने वाला खर्च बहुत ज्यादा है और हमारी आमदनी काफी कम। हम अपने काम को जारी रख सकें इसके लिए हमें आर्थिक मदद की जरूरत है।



comments

Last update on:
Global Total
Cases

Deaths

Recovered

Active

Polls

क्या नरेंद्र मोदी सरकार इसी कार्यकाल में जनसंख्या कानून लाएगी?

View Results

Loading ... Loading ...

Trending Now

error: Content is protected !!