पीएनबी घोटाले के कांग्रेसी कनेक्शन पर चुप्पी क्यों?

क्या आपको पता है कि पंजाब नेशनल बैंक में कारोबारी नीरव मोदी के घोटाले में अब तक कुल 3 नेताओं के नाम सामने आ चुके हैं। लेकिन इन तीनों के सवाल पर ज्यादातर चैनल और अखबारों ने चुप्पी साध रखी है। आम तौर पर जब भी कोई आर्थिक घोटाला होता है तो सबसे पहले मन में यह प्रश्न आता है कि घोटालेबाजों के पीछे की राजनीतिक ताकत कौन है। पीएनबी घोटाले पर मीडिया खूब खबरें तो दिखा रहा है लेकिन बड़ी सफाई से उन तीन नेताओं का जिक्र गायब है जिनकी नीरव मोदी से करीबी की बात सामने आई है। ये महज संयोग नहीं कि ये तीनों ही नेता कांग्रेस के हैं। इनके नाम हैं- राहुल गांधी, अभिषेक मनु सिंघवी और कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया।

1. राहुल गांधी

नीरव मोदी से करीबी के मामले में सबसे पहले जिस नेता का नाम सामने आया वो थे राहुल गांधी। कांग्रेस पार्टी के नेता रहे शहजाद पूनावाला ने ट्वीट करके बताया कि राहुल गांधी 2013 तक फाइवस्टार होटलों में नीरव मोदी के प्रचार इवेंट्स में जाया करते थे। उन्होंने चुनौती दी है कि कोई चाहे तो इस बात की जांच दिल्ली के इंपीरियल होटल और राहुल गांधी को सुरक्षा देने वाले एसपीजी के रिकॉर्ड्स से कर सकता है। शहजाद पूनावाला का कहना है कि 2010 से 2014 तक कम से कम 6 बार सरकार को औपचारिक तौर पर घोटाले की जानकारी दी गई। लेकिन उलटा शिकायत करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की गई। जाहिर है ऐसे में राहुल गांधी को नीरव से रिश्तों पर सफाई देनी चाहिए।

2. अभिषेक मनु सिंघवी

कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और वकील अभिषेक मनु सिंघवी का भी नाम सीधे तौर पर नीरव मोदी से जुड़ा है। छापे में मिले दस्तावेजों के मुताबिक नीरव मोदी ने अभिषेक मनु सिंघवी की पत्नी अनीता सिंघवी को करोड़ों के जेवरात बेहद कम कीमतों पर बेचे। 20 मई, 21 अगस्त 2014 और 17 जनवरी 2015 को अनीता सिंघवी ने करीब 1.5 करोड़ के गहने खरीदे हैं। इस पर टैक्स भी दिया गया है और बिल पर पैन नंबर भी दर्ज है। ये भुगतान चेक के जरिए किया गया। लेकिन एक और डायरी मिली है जिसमें उसी तारीख पर बेचे गए उसी सामान की सही कीमत दर्ज की गई है। इसके मुताबिक गहनों की कीमत 5 करोड़ के करीब है। टाइम्स नाऊ चैनल ने इस बात पर सवाल उठाया है कि आखिर 5 करोड़ रुपये के गहने 1.5 करोड़ में क्यों दिए गए? कहीं ये रिश्वत देने का तरीका तो नहीं था?

3. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया

नीरव मोदी के मामा मेहुल चोक्सी के खिलाफ कर्नाटक में 2016 में एक गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था। टाइम्स नाऊ ने खुलासा किया है कि कर्नाटक हाई कोर्ट से जारी इस गैर-जमानती वारंट को कांग्रेस की सिद्धारमैया ने दबा दिया था और इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। लेकिन मीडिया में कर्नाटक सरकार से मिली इस मदद का भी कोई जिक्र आपको नहीं मिलेगा।

घोटाले के पीछे का खेल

यह बात लगातार सामने आ रही है कि पीएनबी घोटाले और आरोपी नीरव मोदी को भगाने के पीछे कांग्रेस का हाथ है। कांग्रेस के बड़े नेताओं को 2014 के पहले से पता था कि बैंक में ये घोटाला चल रहा है। सरकारी तंत्र में अपने कुछ मददगार अफसरों की मदद से उन्होंने इस घोटाले को 2017 तक होने दिया। कांग्रेस के रणनीतिकारों को पता था कि नीरव मोदी के भागने पर उसका नाम सीधे पीएम नरेंद्र मोदी से जुड़ जाएगा। इसकी तैयारी काफी समय से चल रही थी। दावोस में भारतीय कारोबारियों के प्रतिनिधिमंडल में नीरव मोदी को घुसाने के पीछे भी यही रणनीति थी। क्योंकि यह तथ्य सामने आ चुका है कि नीरव मोदी भारत से गए कारोबारी प्रतिनिधिमंडल का सदस्य नहीं था। नीरव मोदी को कुछ समय पहले अलर्ट कर दिया गया था कि वो कारोबार समेट कर विदेश भाग जाए और उसने ऐसा ही किया। इसके बाद घोटाला खुला और सरकार के पास ज्यादा कुछ करने को बचा नहीं। बाकी का काम मीडिया कर रही है, जो पूरी घटना का ठीकरा बड़ी सफाई पर मोदी सरकार पर फोड़ रही है।

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