Dharm Loose Top

क्या ब्रह्मा के पैरों से शूद्रों का जन्म हुआ! सच क्या है?

दलितों को उकसाकर हिंदू धर्म से अलग करने में जुटे लोग अक्सर दलील देते हैं कि हिंदू धर्म की मान्यता है कि शूद्रों का जन्म ब्रह्मा के पैरों से हुआ है। इस आधार पर जाति व्यवस्था को भेदभाव वाला साबित करे की कोशिश लगातार चलती रहती है। दरअसल ये बात पूरी तरह गलत है। पुरुषसूक्त ऋग्वेद संहिता के दसवें मंडल का एक प्रमुख सूक्त यानी मंत्र संग्रह (10.90) है, जिसमें एक विराट पुरुष का वर्णन किया गया है और उसके अंगों का वर्णन है। “ब्राह्मणोऽस्य मुखामासीद्वाहू राजन्यः कृतः। ऊरू तदस्य यद्वैश्यः पद्भ्यां शूद्रो अजायत॥ इसका अर्थ बताया जाता है कि उस विराट परमात्मा के मुख से ब्राह्मणों की उत्पत्ति हुई, बाहुओं से क्षत्रियों की, उदर से वैश्यों की और पदों यानी पैरों से शूद्रों की उत्पत्ति हुई।

क्या है सच?

सच्चाई जानने के लिए आपको मंत्र 13 से पहले मंत्र 12 को पढ़ना होगा। इस मंत्र में पूछा जाता है कि कौन मुख के समान है? कौन हाथ के समान, कौन पेट के समान और कौन पैर के समान? “यत्पुरुषं व्यदधुः कतिधा व्यकल्पयन्। मुखं किमस्य कौ बाहू का उरू पादा उच्येते॥12॥” इसके जवाब में बताया जाता है कि ब्राह्मण (शिक्षक और बुद्धिजीवी) इस शरीर संरचना के मुख हैं, क्षत्रिय (रक्षक) हाथों के समान, वैश्य (पालन करने वाले) पेट के समान और शूद्र (श्रमिक) पैरों के समान हैं। यानी समाज के अलग-अलग हिस्सों को उनकी जिम्मेदारी के हिसाब से उनकी तुलना मानव शरीर से की गई है। इसमें पैदा करने या उत्पन्न होने जैसी कोई बात ही नहीं है। अक्सर समाज की तुलना मानव शरीर से की जाती है।

वेदों में शूद्र

चारों वेदों में ‘शूद्र’ शब्द लगभग 20 बार आया है। कहीं भी उसका अपमानजनक अर्थों में प्रयोग नहीं हुआ है। वेदों में किसी भी स्थान पर शूद्र के जन्म से अछूत होने, उन्हें वेदों का अध्ययन करने से वंचित रखने, अन्य वर्णों से उनका दर्जा कम होने या उन्हें यज्ञादि से अलग रखने का उल्लेख नहीं है। वेदों में अति परिश्रमी कठिन कार्य करने वाले को शूद्र कहा है (“तपसे शूद्रम” यजुर्वेद 30.5), इसीलिए पुरुष सूक्त शूद्र को मानव समाज का आधार स्तंभ कहता है। इसका जन्म से कोई लेना-देना नहीं है। क्योंकि ऐसे सैकड़ों उदाहरण भरे पड़े हैं जहां शूद्र माता-पिता से पैदा हुआ कोई व्यक्ति विद्वान पंडित बना। लेकिन वामपंथी कांग्रेसी शिक्षाविदों ने एक साजिश के तहत लगातार यह भ्रम पैदा किया कि वैदिक व्यवस्था में समाज के श्रमिक वर्ग का अपमान किया गया है और उसे अछूत माना गया है।

कृपया लेख कॉपी-पेस्ट न करें। कई लोग पोस्ट कॉपी करके फेसबुक और व्हाट्सएप पर शेयर कर देते हैं, जिससे वेबसाइट की आमदनी काफी कम हो गई है। राष्ट्रवाद की विचारधारा पर आधारित यह वेबसाइट बंद हो जाएगी तो क्या आपको खुशी होगी? कृपया खबरों का लिंक शेयर करें।
एक अपील: न्यूज़लूज़ के जरिए हम राष्ट्रवादी पत्रकारिता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। इस वेबसाइट पर होने वाला खर्च बहुत ज्यादा है और हमारी आमदनी काफी कम। हम अपने काम को जारी रख सकें इसके लिए हमें आर्थिक मदद की जरूरत है। ये हमारे लिए ऑक्सीजन का काम करेगी। डोनेट करने के लिए क्लिक करें:
Donate with

comments

Polls

क्या नरेंद्र मोदी सरकार इसी कार्यकाल में जनसंख्या कानून लाएगी?

View Results

Loading ... Loading ...

Popular This Week

Don`t copy text!