तिरंगे के लिए मरा है चंदन, शहीद का दर्जा दे सरकार

यूपी के कासगंज में 26 जनवरी की सुबह तिरंगा यात्रा के दौरान अभिषेक उर्फ चंदन गुप्ता नाम के नौजवान की मौत पर पूरे देश में सदमा और गुस्सा है। तिरंगा लेकर भारत माता की जय के नारे लगाते हुए जा रहे युवकों पर मुस्लिम आबादी वाले इलाकों में एसिड बम और गोलियों से हमला किया गया, जिसमें चंदन की मौत हो गई, जबकि आधा दर्जन से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। चंदन की मौत गोली लगने से हुई है। चश्मदीदों के मुताबिक तिरंगा यात्रा के दौरान भारत माता के जय के नारों के जवाब में मुसलमानों ने ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाने शुरू कर दिए जिसके बाद हिंसा भड़क उठी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हालात पर नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने अधिकारियों को दंगाइयों पर पूरी सख्ती बरतने के आदेश दिए हैं। इस बीच मारे गए नौजवान को शहीद का दर्जा देने और उसके परिवार वालों को 5 करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की जा रही है। लोग यह पूछ रहे हैं कि 70 साल के गो हत्यारे अखलाक को 1 करोड़ रुपये मुआवजा, नौकरी, सभी भाइयों को मकान और पेंशन मिली थी तो चंदन के साथ भी न्याय होना चाहिए।

पहले से तय था हमला!

हालात किस तरह बिगड़े इसे लेकर तरह-तरह की बातें सामने आ रही हैं, लेकिन यह साफ है कि हमला पूरी तैयारी के साथ किया गया था। मुस्लिम बहुल बिलराम गेट इलाके से जैसे ही जुलूस गुजरा, मकानों की छतों से नारेबाजी शुरू हो गई। जब लोगों ने इस पर एतराज जताया था पत्थरों, एसिड बमों से धावा बोल दिया गया। छतों से ही देसी कट्टों से गोलियां भी चलाई जा रही थीं। इस तरीके को देखते हुए पुलिस मानकर चल रही है कि हमला पूरी तैयारी के साथ किया गया था। ये सबकुछ इतना अचानक हुआ कि पुलिस और तिरंगा यात्रा लेकर जा रहे लोगों को संभलने का मौका भी नहीं मिला। पुलिस ने कुछ मुस्लिम दंगाइयों को हिरासत में लिया है और असली गुनहगारों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

शहीद घोषित करने की मांग

चंदन गुप्ता नाम के जिस नौजवान की मौत हुई है उसका शव तिरंगे में लपेट कर घर लाया गया। जिस तरह से तिरंगा हाथ में लिए हुए उसे मौत के घाट उतारा गया है उससे लोगों में बहुत दुख है। कई लोगों ने चंदन गुप्ता को शहीद का दर्जा दिए जाने की मांग की है। सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर जबरदस्त गुस्सा देखने को मिल रहा है। लोगों की नाराजगी मीडिया के रवैये से भी है जिसने यह छिपाने की कोशिश की कि हत्यारे कौन थे। ज्यादातर अखबारों और चैनलों ने इसे दो गुटों का झगड़ा बताया है जबकि यही चैनल और अखबार तब हंगामा मचा देते हैं जब कोई गोतस्कर कहीं लोगों के गुस्से का शिकार बन जाए। कासगंज की घटना मुख्यमंत्री ने ट्वीट करके चिंता जताई है और चंदन गुप्ता की मौत पर दुख जताते हुए दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।

आम लोगों में भी इस घटना पर भारी गुस्सा है। लोग मीडिया के रवैये से भी नाराज हैं जो फिल्म पद्मावत के विरोध पर हिंदू समाज को गुंडा कहकर संबोधित कर रही थी, जबकि कासगंज में हत्या करने वालों को एक समुदाय बताया।

एक अपील: न्यूज़लूज़ के जरिए हम राष्ट्रवादी पत्रकारिता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। इस वेबसाइट पर होने वाला खर्च बहुत ज्यादा है और हमारी आमदनी काफी कम। हम अपने काम को जारी रख सकें इसके लिए हमें आर्थिक मदद की जरूरत है। ये हमारे लिए ऑक्सीजन का काम करेगी। डोनेट करने के लिए क्लिक करें:

comments

Tags: , , , ,