सोमनाथ मंदिर में राहुल गांधी ने माना, मैं हिंदू नहीं हूं!

जो बात लंबे समय से अटकलबाजियों की शक्ल में रही उस पर मुहर लग गई है। पहली बार राहुल गांधी ने माना है कि वो हिंदू नहीं, बल्कि किसी और धर्म को मानने वाले हैं। गुजरात के चुनावी दौरे पर सोमनाथ मंदिर में गए राहुल गांधी ने वहां पर खुद को ‘गैर हिंदू’ के रूप में दर्ज कराया है। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया है कि वो किस धर्म को मानने वाले हैं। सोमनाथ मंदिर हिंदुओं के 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम है। मंदिर की परंपरा है कि जब वहां कोई गैर-हिंदू दर्शन के लिए आता है तो उसे रोका नहीं जाता। इसके बजाय उसे मंदिर में रखे एक अलग रजिस्टर में अपनी एंट्री कर देनी होती है। गुजरात दौरे पर पहुंचे राहुल गांधी ने भी उस रजिस्टर में बाकायदा अपनी एंट्री करवाई है। यहां यह जानना जरूरी है कि राहुल गांधी के नाना जवाहरलाल नेहरू ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निमाण का कड़ा विरोध किया था।

पहली बार सामने आई सच्चाई

सोमनाथ मंदिर में दर्शन के लिए राहुल गांधी कांग्रेस नेता अहमद पटेल के साथ पहुंचे थे। मंदिर के नियमों के मुताबिक दोनों ने गैर-हिंदू श्रेणी के तहत प्रवेश किया। मंदिर के रजिस्टर पर पहले राहुल गांधी और अहमद पटेल की एंट्री करवाई गई। एंट्री करवाने वाले का नाम मनोज त्यागी है, जोकि कांग्रेस के नेता हैं। ये दोनों इसके बाद साथ-साथ दर्शन के लिए गए। जहां पर उन्होंने तय विधि के मुताबिक भगवान सोमनाथ की पूजा-अर्चना की। आम तौर पर यूरोप और अमेरिका जैसे देशों से आने वाले पर्यटक इस श्रेणी में दर्शन करते हैं। राहुल गांधी के गैर-हिंदू श्रेणी में एंट्री करने के साथ ही यह बात सही साबित हो गई है कि वो और उनका परिवार शुरू से ही हिंदू धर्म से दूर जा चुका था।

गैर-हिंदुओं के लिए बने रजिस्टर में आप राहुल गांधी की एंट्री देख सकते हैं।

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नेहरू के बाद हिंदू धर्म छोड़ा!

जवाहरलाल नेहरू ने एक बार कहा था कि मैं दुर्घटनावश हिंदू हूं। उन्होंने खुद को संस्कारों से मुसलमान बताया था। लेकिन भारत का प्रधानमंत्री बनने के लिए उन्होंने अपने नाम के आगे अपनी कश्मीरी पहचान ‘पंडित’ को चिपकाए रखा। इसका उन्हें फायदा भी हुआ। कहते हैं कि नेहरू की बेटी इंदिरा गांधी को हिंदू कर्मकांडों और तंत्र-मंत्र की परंपरा में रुचि थी। लेकिन वो अपनी सत्ता को बचाए रखने के लिए ऐसा करती थीं। इंदिरा ने भी फिरोज से शादी की, जो गांधी जी के स्वघोषित दत्तक पुत्र थे। कई लोग उन्हें पारसी और कई लोग मुसलमान बताते हैं। इसके बाद राजीव गांधी ने भी किसी हिंदू लड़की से शादी करने के बजाय कैथोलिक ईसाई सोनिया गांधी को चुना। इस दौरान गांधी परिवार के सदस्यों को कभी कोई हिंदू रीति-रिवाज मानते या त्यौहार मनाते नहीं देखा गया।

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और ये वो विजिटर्स बुक है, जो निकलते वक्त अपना अनुभव लिखने के लिए दी जाती है। इसमें राहुल गांधी ने मंदिर को प्रेरणा देने वाली जगह बताया है। मंदिर में आने वाली बड़ी हस्तियों को ये रजिस्टर निकलते वक्त दिया जाता है।

इस मामले के मीडिया में आने पर कांग्रेस पार्टी ने सफाई दी है कि रजिस्टर की जो एंट्री दिखाई जा रही है वो फर्जी है। हालांकि मंदिर प्रशासन ने किसी फर्जीवाड़े की बात से इनकार किया है।

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