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हिंदुओं को तोड़कर नया धर्म बनवाना चाहती है कांग्रेस!

क्या है बीजेपी की रणनीति?

कर्नाटक में बीजेपी के लिए ये बहुत संवेदनशील मामला है। पार्टी के लिए संतोष की बात यही है कि बीएस येदियुरप्पा समेत राज्य में बीजेपी के तमाम बड़े नेता लिंगायत समुदाय से ही आते हैं। येदियुरप्पा लिंगायतों में वीरशैव समुदाय से आते हैं। बीजेपी के लिए मुश्किल यह है कि वो खुलकर अलग धर्म का विरोध नहीं कर सकती, लेकिन वो इसका समर्थन भी नहीं कर रही। बीएस येदियुरप्पा अब तक यही कहते रहे हैं कि कांग्रेस राज्य में लिंगायतों को बांटने की साजिश कर रही है। क्योंकि कांग्रेस ने वीरशैव समुदाय को लिंगायतों से अलग मानने का दांव चल दिया था। कई जानकार इसे कांग्रेस की रणनीतिक चूक मानते हैं क्योंकि येदियुरप्पा में ही वो क्षमता है कि वो इसे समाज की एकता का मामला बना सकते हैं। अगर वो सफल रहे तो वोट के लिए हिंदुओं को बांटने की कांग्रेस की रणनीति उसे भारी भी पड़ सकती है।

क्या वाकई हिंदू नहीं हैं लिंगायत?

लिंगायत दरअसल भगवान शिव के लिंग रूप की पूजा करते हैं। 12वीं शताब्दी में सामाजिक सुधारक और संत कवि बासवअन्ना ने समाज में मौजूद तमाम हिंदू जातियों को एक धागे में पिरोकर लिंगायत समुदाय शुरू किया था। बराबरी के सिद्धांत पर आधारित इस समुदाय की पूजा पद्धति हिंदुओं से अलग नहीं है। लिंगायतों में भी जाति परंपरा है, लेकिन उनका जोर इस बात पर होता है कि इसका आधार जन्म नहीं, बल्कि कर्म हो। ये लोग माथे पर तिलक भी लगाते हैं। बस फर्क यह है कि ये लोग शव को जलाते नहीं, बल्कि उसको दफनाते हैं। कुछ लोग दावा करते हैं कि बासवअन्ना मूर्तिपूजा के खिलाफ थे, लेकिन खुद उन्हीं की मूर्तियां आप जगह-जगह देख सकते हैं। दुनिया भर में ईसाई धर्म के प्रचार से जुड़े जोशुआ प्रोजेक्ट की वेबसाइट में लिंगायतों को ईसाई बनाने का टारगेट प्रमुखता के आधार पर रखा गया है। एक बार जब यह समुदाय हिंदुओं से अलग हो जाएगा तो मिशनरियों के लिए उनका धर्मांतरण करवाना आसान हो जाएगा। लिंगायतों की कुल आबादी 18 लाख के करीब है।

कर्नाटक में अगले साल के शुरू में विधानसभा के लिए चुनाव होने हैं। कांग्रेस अगर यहां हिंदू धर्म तोड़ने की अपनी रणनीति में सफल रहती है तो इसमें हैरानी नहीं होनी चाहिए कि अगले कुछ साल में हिंदुओं के कई और समुदायों को अलग धर्म के लिए उकसाने की रणनीति पर काम शुरू हो जाएगा। ऐसे में हिंदू धर्म की बुनियाद को कमजोर करने की सोनिया गांधी की रणनीति के लिहाज से कर्नाटक का चुनाव बेहद अहम साबित होने वाला है।

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