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कारोबार में आसानी पर कांग्रेसी झूठ की पोल-खोल

झूठ नंबर-05

कांग्रेसी चैनल एनडीटीवी ने दलील दी कि ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस आर्थिक सुधार का कोई पैमाना ही नहीं है। मतलब इससे यह पता नहीं चलता कि अर्थव्यवस्था बेहतरी की तरफ बढ़ रही है। जबकि विश्व बैंक की रिपोर्ट में खुद ही कहा गया है कि दक्षिण एशियाई क्षेत्र में भारत इकलौता देश है जिसने उन टॉप-10 देशों में जगह बनाई, जहां पर सुधारों की रफ्तार सबसे तेज है। इसमें सिंगल विंडो सिस्टम से लेकर टैक्स सिस्टम और बुनियादी ढांचे में हुए आमूलचूल बदलावों का जिक्र किया गया है। ये वो बदलाव हैं जो देश में 2014 के बाद ही शुरू हुए।

झूठ नंबर-06

कहा जा रहा है कि ये रैंकिंग सिर्फ बड़े कारोबारियों के लिए है। छोटे कारोबारियों को इससे कोई फायदा नहीं होता है। जबकि इसकी रिपोर्ट में लिखा गया है कि यह रैंकिंग इस बात को ध्यान में रखकर तय की जाती है कि छोटे और मंझोले उद्योगों के लिए स्थितियों में कितना सुधार हो रहा है।

झूठ नंबर-07

अगली दलील है कि रैंकिंग तो सुधरी लेकिन रोजगार पैदा नहीं हो रहा। यह ऐसा सफेद झूठ है जिसे बार-बार बोलकर मीडिया ने लोगों को इस पर भरोसा करवा दिया है। जबकि सच यह है कि 2014 के बाद से देश में 2.63 करोड़ लोगों ने अपने पहले रोजगार के लिए अलग-अलग सरकारी योजनाओं से लोन लिया है। लेकिन पत्रकारों और कांग्रेस की नजर में नौकरी वही होती है जो सरकारी हो। जबकि ये डेढ़ करोड़ से ज्यादा लोग न सिर्फ खुद का काम कर रहे हैं, बल्कि कई लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं। कुछ क्षेत्रों में बेरोजगारी जरूर है, लेकिन अगर कोई नया रोजगार शुरू करना चाहे तो उसे आसानी से फंडिंग मिल रही है।

झूठ नंबर-08

खुद राहुल गांधी ने अपने श्रीमुख से कहा है कि मोदी ने वर्ल्ड बैंक को फिक्स कर लिया। इससे बड़ा बेवकूफी भरा बयान सिर्फ और सिर्फ राहुल गांधी ही दे सकते हैं। क्योंकि बाकी दुनिया को सच्चाई का अच्छी तरह एहसास है।

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