अहमद पटेल को खुफिया एजेंसी रॉ में दिलचस्पी क्यों?

बायीं तस्वीर कांग्रेस सांसद अहमद पटेल की और दायीं तस्वीर रॉ के पूर्व अधिकारी आरके यादव की है।

कांग्रेस नेता और सोनिया गांधी के बेहद करीबी अहमद पटेल से जुड़े अस्पताल में आतंकवादियों को पनाह दिए जाने को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। जिस तरह से यह मामला सामने आया है उससे सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं। पिछले दिनों सूरत में अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी गिरोह आईएसआईएस का एक आतंकवादी मोहम्मद कासिम पकड़ा गया था। कासिम गुजरात के अंकलेश्वर में चल रहे अहमद पटेल से जुड़े अस्पताल में नौकरी करता था। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां कासिम से पूछताछ करके मामले की तह तक जाने की कोशिश में हैं। लेकिन इस घटना ने कांग्रेस नेता अहमद पटेल की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वो भी तब जब देश की सबसे महत्वपूर्ण खुफिया एजेंसी रॉ के एक पूर्व अधिकारी आरके यादव काफी वक्त से ऐसे दावे करते रहे हैं, जो बेहद चौंकाने वाले हैं। यह भी पढ़ें: अहमद पटेल के अस्पताल का ‘आतंकी कनेक्शन’

अहमद पटेल की रॉ पर नज़र थी!

कहने को तो अहमद पटेल की हैसियत सिर्फ सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव की रही है। लेकिन राजनीतिक गलियारों में हर कोई जानता है कि 2004 से 2014 तक अहमद पटेल की मर्जी के बिना सरकार में एक पत्ता तक नहीं हिलता था। कहा तो यहां तक जाता है कि वो वो उस वक्त के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भी ज्यादा ताकतवर थे। सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव के तौर पर अहमद पटेल तमाम सरकारी कामों में दखलंदाजी देते रहते थे, लेकिन सबसे खास थी उनकी देश की सबसे जिम्मेदार और महत्वपूर्ण खुफिया एजेंसी रॉ के कामकाज में दिलचस्पी। रॉ वो एजेंसी है जो दूसरे देशों में अपने ऑपरेशन चलाती है और उसके अधिकारियों के कामकाज को टॉप सीक्रेट रखा जाता है।

‘रॉ को अपनी दुकान बना दिया’

रॉ के पूर्व अधिकारी आरके यादव ने कहा है कि यूपीए सरकार के दौरान अहमद पटेल ने रॉ को अपनी निजी कंपनी की तरह चलाया। उन्होंने पिछले दिनों में एजेंसी के कामकाज पर Mission R&AW के नाम से किताब भी लिखी है। इसमें उन्होंने वहां चल रही गड़बड़ियों के बारे में बताया है। उनके मुताबिक “यूपीए के समय में राष्ट्रीय सुरक्षा को ताक पर रख दिया गया और अयोग्य किस्म के लोगों को इसका चीफ बनाया गया।” आरके यादव ने अगस्त में गुजरात में राज्यसभा सीट के लिए हुए चुनाव के वक्त ट्विटर पर लिखा था कि “मुझे इससे मतलब नहीं कि गुजरात में राज्यसभा चुनाव में कौन सी पार्टी जीतती है, लेकिन अहमद पटेल का हारना जरूरी है। उन्होंने यूपीए सरकार के 10 सालों में रॉ को कलंकित कर दिया। 3 रॉ चीफ के लिए पैसे लेकर नियुक्तियां कीं।”

क्या थे अहमद पटेल के इरादे?

आरके यादव पिछले एक साल से ज्यादा वक्त से ये खुलासे कर रहे हैं, लेकिन मीडिया में इनका ज्यादा जिक्र नहीं मिलता। खास तौर पर मेनस्ट्रीम मीडिया में तो यह खबर पूरी तरह गायब है, क्योंकि ज्यादातर बड़े चैनलों और अखबारों में सीधे अहमद पटेल की सिफारिश पर रखे गए संपादक और रिपोर्टर हैं। अहमद पटेल के अस्पताल में आतंकवादी पकड़े जाने के ताजा मामले के बाद आरके यादव ने एक बार फिर से अपना पुराना बयान दोहराया है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा है कि “यूपीए के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा को एक तरह से तहस-नहस कर दिया गया। अहमद पटेल फैसले ले रहे थे और अयोग्य लोगों को रॉ का मुखिया बना रहे थे, मानो ये एजेंसी उनकी निजी कंपनी हो।”

  • आरके यादव के इन दावों से यह सवाल उठता है कि रॉ जैसी एजेंसी में अहमद पटेल की दिलचस्पी का कारण क्या था?
  • क्या यह सही नहीं है कि पाक एजेंसी ISI अपने यहां रॉ के तंत्र को तोड़ने के लिए काफी कोशिश करती रही है?
  • आरके यादव ने अहमद पटेल पर रॉ को ‘कलंकित’ करने का जो आरोप लगाया है उसका कितना नुकसान हुआ?
  • क्या आरके यादव के आरोपों की जांच नहीं होनी चाहिए? ताकि पता चल सके कि ये दावे क्या वाकई सच हैं?
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