गुजरात में पिटे हुए मोहरों से चुनाव जीतेगी कांग्रेस?

गुजरात चुनाव से पहले दिल्ली का मीडिया बीजेपी और नरेंद्र मोदी के खिलाफ अभियान चलाने में जी-जान से जुटा हुआ है। जिस कथित ओबीसी नेता अल्पेश ठाकोर के राहुल गांधी से मिलने और उसके कांग्रेस में शामिल होने की खबरें दिखाई जा रही हैं, वो दरअसल पहले से ही कांग्रेस का सदस्य है। एलान किया गया था कि अल्पेश राहुल गांधी की मौजूदगी में कांग्रेस की सदस्यता लेगा। मीडिया में भी इस बात को जोर-शोर से दिखाया जा रहा है। लेकिन सच्चाई कुछ और ही है। गुजरात में लोग इस बात को जानते हैं कि अल्पेश और उसका परिवार पुराना कांग्रेसी है और एक खास रणनीति के तहत उसने 2012 में ओबीसी की राजनीति शुरू की थी। अल्पेश एक बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़कर हार भी चुका है।

कांग्रेस का मोहरा है अल्पेश ठाकोर

अल्पेश ठाकोर गुजरात में हुए पिछले जिला पंचायत के चुनाव में मांडल सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुका है। इस चुनाव में अल्पेश ठाकोर बुरी तरह से हारा था। इससे पहले 2009 से 2012 तक भी अल्पेश ठाकोर कांग्रेस में था। दरअसल उसका पूरा परिवार शुरू से ही कांग्रेस का समर्थक रहा है। अल्पेश के पिता खोड़ाजी ठाकोर अहमदाबाद कांग्रेस के ग्रामीण जिलाध्यक्ष के पद पर हैं। ऊपर बायीं तस्वीर में आप अल्पेश ठाकोर को कांग्रेस के लिए प्रचार करते हुए देख सकते हैं। बताया जाता है कि 2017 विधानसभा चुनाव की तैयारी के लिए कांग्रेस ने करीब एक साल पहले अल्पेश ठाकोर को सक्रिय किया था। इस दौरान उसने कांग्रेस से दूरी बना ली थी ताकि अपने समुदाय में समर्थन हासिल करने में दिक्कत न हो।

दिल्ली की मीडिया ने बनाया नेता!

अल्पेश ठाकोर के बारे में कहा जाता है कि राजनीति में उसकी पहचान बनाने में दिल्ली की मीडिया का बड़ा हाथ है। कई चैनलों ने पिछले एक साल के दौरान उसे अपने कार्यक्रमों में जगह दी, ताकि उसे एक बड़े नेता के तौर पर उभारा जा सके। ये कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा था। अल्पेश कुछ समय पहले तक कहते रहे हैं कि वो किसी भी राजनीतिक दल से कभी नहीं जुड़ेंगे और गुजरात में किंग मेकर की भूमिका निभाएंगे। लेकिन गुजरात चुनाव आते ही उन्होंने यू-टर्न मार दिया। सबसे खास बात यह है कि अल्पेश पटेल हार्दिक पटेल के धुर विरोधी माने जाते रहे है। वो पटेलों को ओबीसी कोटे में आरक्षण देने का विरोध करते रहे हैं। लेकिन दिल्ली की मीडिया इन विरोधाभासों को जानबूझकर छिपाता है, ताकि लगे कि गुजरात में कांग्रेस जीतने वाली है।

बीजेपी के रणनीतिकारों को यह अच्छी तरह पता है कि अल्पेश ठाकोर के कांग्रेस में शामिल होने से पाटीदार समुदाय में आशंकाएं पैदा हो गई हैं। उन्हें यह एहसास है कि कांग्रेस एक तरफ उन्हें आरक्षण का झुनझुना दिखा रही है, दूसरी तरफ उस नेता को शामिल कर रही है जो पाटीदार आरक्षण का कट्टर विरोधी माना जाता है।

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