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दिग्विजय की तीर्थयात्रा के पीछे ये है ‘असली’ कहानी!

क्या कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के परिवार में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है? यह सवाल अब सामने आने लगा है। दूसरी शादी के बाद परिवार में कलह की जो अटकलें लगाई जा रही थीं वो धीरे-धीरे हक़ीकत में बदल रही हैं। दरअसल दिग्विजय ने दशहरा के दिन नर्मदा यात्रा पर निकल गए हैं। छह महीने की उनकी इस यात्रा में नई पत्नी अमृता राय भी साथ हैं। दिग्विजय कह रहे हैं कि उनकी ये यात्रा पूरी तरह धार्मिक और आध्यात्मिक है, लेकिन अंदर से कुछ और ही कहानी सामने आ रही है। परिवार के सदस्यों का कहना है कि दिग्विजय ने नर्मदा यात्रा का ये सारा प्रोग्राम इसलिए बनाया ताकि उन्हें दशहरा पर अपने शहर राघोगढ़ न जाना पड़े। यह वो समय होता है जब राघोगढ़ राजपरिवार के सभी सदस्य वहां पर जुटते हैं। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक राघोगढ़ राजपरिवार में नई बहू को लेकर जबरदस्त कलह मची हुई है।

बेटे से मनमुटाव की खबरें

बताया जा रहा है कि दिग्विजय सिंह के विधायक बेटे जयवर्धन सिंह के साथ विवाद काफी बढ़ गया है। बेटा अपनी उम्र की लड़की के साथ पिता की शादी के सख्त खिलाफ था। लेकिन उस समय वो विदेश में पढ़ाई कर रहा था। अखबार का दावा है कि दिग्विजय सांसद के तौर पर दिल्ली में मिले अपने सरकारी घर में नहीं रहते। शादी के बाद से अब तक वो भोपाल भी नहीं गए। घर-परिवार से इस दूरी की सबसे बड़ी वजह उनकी दूसरी शादी को माना जा रहा है। दूसरी पत्नी अमृता राय राजपूत नहीं हैं। इसलिए वो अब तक परिवार में स्वीकार नहीं की जा सकी हैं। हालांकि दिग्विजय के दूसरे भाई लक्ष्मण सिंह की पत्नी भी राजपूत नहीं, बल्कि ब्राह्मण हैं।

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यात्रा के सियासी मतलब

नर्मदा यात्रा के दौरान पूरे छह महीने तक दिग्विजय पार्टी के कामकाज और अपने घरृपरिवार से दूर रहेंगे। इस दौरान वो मध्य प्रदेश की 120 और पड़ोसी राज्य गुजरात की भी कुछ विधानसभा सीटों से होकर गुजरेंगे। यात्रा पर निकलने से पहले दिग्विजय सिंह ने अपने करीबी माने जाने वाले जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का आशीर्वाद लिया। भगवान चंद्र मौलेश्वर की पूजा-अर्चना कर यात्रा की शुरुआत की। पहले दिन पांच किलोमीटर का सफर ही तय हो पाया। जिस तरह से यात्रा की शुरुआत में दिग्विजय सिंह ने सियासी मजमा लगाया और जिस तरह से उन्होंने यात्रा का कार्यक्रम तय किया है कई लोगों को यह भी लग रहा है कि 70 साल की उम्र में शायद वो फिर से मध्य प्रदेश की राजनीति में दांव आजमाने की सोच रहे हैं।

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