दो कौड़ी का एनडीटीवी चैनल करोड़ों में बिक गया!

करोड़ों के घोटाले और हवाला कारोबार के आरोपों में घिरे एनडीटीवी चैनल के बिकने की खबर है। जानकारी के मुताबिक स्पाइसजेट एयरलाइंस के मालिक अजय सिंह ने एनडीटीवी के पूरे कारोबार का 40 फीसदी हिस्सा खरीद लिया है। इसके बाद उनका कंपनी के मैनेजमेंट पर अधिकार हो जाएगा। जबकि मौजूदा प्रोमोटर प्रणय रॉय और राधिका रॉय की हिस्सेदारी घटकर 20 फीसदी हो गई है। देश विरोधी एजेंडा चलाने के लिए बदनाम रहे एनडीटीवी का बिकना बड़ी खबर माना जा रहा है। हालांकि औपचारिक तौर पर अभी स्पाइसजेट और एनडीटीवी, दोनों ने ही खबर का खंडन किया है। हालांकि शेयर बाजार के सूत्रों के मुताबिक खबर पक्की है और जल्द ही इसकी औपचारिक जानकारी जारी कर दी जाएगी। यह तय है कि संपादकीय अधिकार नए मैनेजमेंट के ही हाथ में होगा।

कंगाल कंपनी को करोड़ों रुपये!

एनडीटीवी पिछले कई साल से भयानक आर्थिक संकट से गुजर रही है। इसके बावजूद सूत्रों के मुताबिक जो डील हुई है वो प्रणय रॉय के लिए बेहतरीन मानी जा सकती है। क्योंकि कंपनी पर मोटे तौर पर करीब 400 करोड़ रुपये का कर्ज है। इस डील से उन्हें इससे छुटकारा मिल जाएगा। साथ ही 100 करोड़ रुपये अतिरिक्त मिल सकते हैं। एनडीटीवी में उनकी 20 फीसदी हिस्सेदारी भी बनी रहेगी। हालांकि ये सिर्फ कारोबारी हिस्सेदारी होगी। सौदे के बाद मुश्किल है कि उनका चैनल पर कोई संपादकीय नियंत्रण रहे। शेयर बाजार में इस सौदे की सुगबुगाहट पिछले कुछ वक्त से चल रही थी। इसके कारण एनडीटीवी के शेयरों में लगातार तेजी देखी जा रही थी। न्यूज़लूज़ पर हमने तभी यह बता दिया था कि कंपनी के अंदरखाने में कुछ चल रहा है और शायद प्रणय रॉय इस बिजनेस से निकलने का रास्ता देख रहे हैं।

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बीजेपी के करीबी हैं अजय सिंह

स्पाइसजेट के मालिक अजय सिंह पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी के प्रचार की कोर टीम में थे। अबकी बार, मोदी सरकार के नारे के पीछे भी उन्हीं का दिमाग बताया जाता है। अजय सिंह अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान मंत्री प्रमोद महाजन के ओएसडी भी रह चुके हैं। उस दौरान उन्होंने डीडी स्पोर्ट्स और डीडी न्यूज को लॉन्च करवाने में बेहद अहम भूमिका निभाई थी। इससे पहले 1996 में वो दिल्ली परिवहन निगम यानी डीटीसी के बोर्ड में भी रहे थे। उस दौरान डीटीसी बसों की संख्या 300 से 6000 हो गई थी। दिल्ली के सेंट कोलंबस से पढ़े अजय सिंह आईआईटी, दिल्ली से बीटेक हैं। उन्होंने कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से एमबीए किया है और दिल्ली विश्वविद्यालय से कानून की भी पढ़ाई की है।

हिंदू विरोधी पत्रकारिता का अंत!

एनडीटीवी शुरू से ही हिंदू विरोधी पत्रकारिता का प्रतीक रहा है। इसके अलावा सीमा पर सेनाओं के खिलाफ खबरें चलाने का भी उसका रिकॉर्ड रहा है। उसके कई पत्रकारों पर आरोप लग चुका है कि उनके कारण भारतीय सेना को नुकसान उठाना पड़ा। आज भी एनडीटीवी के ज्यादातर पत्रकारों के कांग्रेस के नेताओं के साथ पारिवारिक संबंध हैं। केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद जब एनडीटीवी के काले कारोबार पर शिकंजा कसा गया, तब से इसकी हालत बिगड़ने लगी थी। हालांकि उसने मोदी सरकार से डील करने की पूरी कोशिश की, लेकिन दाल नहीं गली।

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