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मोदी की ‘चाणक्य नीति’ जानना आपके लिए जरूरी है!

खैर ये तो हुई समस्या, अब हल क्या है? इस सरकार और पिछली सरकार में फर्क क्या है? फर्क है नीयत का और कोशिश का। ये सरकार देश में अवैध धन लाने वाले 13 हजार एनजीओ को रातों-रात बंद कर सकती है। ये सरकार फ्रांस से मोलभाव करके राफेल विमानों की खरीद में 56 हजार करोड़ रुपये बचा लेती है। इतना ही नहीं उस कंपनी से कहती है कि हमें बेचने के लिए फाइटर जेट की फैक्ट्री भी भारत में ही लगाओ। हम आपको बता दें कि राफेल वो लड़ाकू विमान है जिससे चीन भी डरता है। ये दुनिया का सबसे खतरनाक लड़ाकू विमान है। ये सरकार रक्षा सौदों की रफ्तार बढ़ाती है। सैनिकों के लिए बुलेट प्रूफ जैकेट, नाइट विज़न और बढ़िया क्वालिटी के हेलमेट खरीदती है। उनके लड़ने के लिए लेज़र और बेहतर क्वालिटी की गन खरीदती है। नई तोपें खरीदी जाती हैं जोकि पिछले 30 साल में नहीं हुआ। इजराइल से समझौते करती है ताकि युद्ध की स्थिति में गोला-बारूद की सप्लाई बेरोक-टोक रहे। इरान और अफगानिस्तान में बेस बनाती है, जिससे युद्ध की स्थिति में दुश्मन के खिलाफ दूसरा मोर्चा खोला जा सके। चाइना बॉर्डर पर परमाणु क्षमता वाली ब्रह्मोस मिसाइलें तैनात करती है। चाइना के लगभग सारे पड़ोसी देशों से दोस्ती बढ़ाती है ताकि युद्ध की स्थिति में उसे चारों तरफ से घेरा जा सके। श्रीलंका में भारत समर्थक सरकार लाई जाती है (ये नहीं समझ सकते कि कैसे तो जाने दो)। और हाँ देश में तेल रिज़र्व भी बनाया जा रहा है जिससे कि किसी भी आपात स्थिति का सामना किया जा सके क्योंकि देश तेल के लिए अरब देशों के भरोसे है, जो किसी भी संकट में सप्लाई बंद कर सकते हैं। वैसे मोदी इन अरब देशों को भी साथ लाने में जुटे हैं। कुछ को उनका फायदा दिखाकर तो कुछ को शिया-सुन्नी की लड़ाई का फायदा उठाकर। एक बात और, इन सब चीज़ों के पैसे लगते हैं, फ्री में नहीं आतीं और इसीलिए तेल के दाम भी अभी कम नहीं होंगे और ना ही टैक्स अभी कम होगा। यह भी पढ़ें: चीन पर नेहरू की ये करतूत जान आपका खून खौल उठेगा

तो संक्षेप में मोदी ठंडा करके खा रहे हैं क्योंकि हमें गलती करने पर दोबारा मौका नहीं मिलेगा। देश सीधी लड़ाई से हमेशा बचने की कोशिश करेगा। लेकिन सीधी लड़ाई की तैयारी भी पूरी रखेगा। जब तक तैयारी पूरी न हो कुछ बड़ा नहीं होने वाला। सीमा पर छोटी-मोटी मुठभेड़ें जारी रहेंगी। हमारे कुछ सैनिकों को वीरगति भी प्राप्त होगी और कश्मीर भी सुलगता रहेगा। कांग्रेस की रोटी खाकर मोटे हुए पत्रकार भी गला फाड़कर चिल्लाते रहेंगे, जेएनयू के झोलाछाप बुद्धिजीवी भी शोर मचाएंगे। यानी कि सब कुछ पहले जैसा ही रहेगा (बल्कि ज्यादा चिल्लायेंगे)। लेकिन मोदी पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। वो बिलकुल चुपचाप रहेगा और अपना काम करता रहेगा। इन सबकी चिल्लपों का काम तमाम एक झटके में होगा तब तक आपकी मर्ज़ी है कि आप भी इनकी तरह से शोर मचाएंगे या चुपचाप बैठकर तमाशा देखेंगे। यह भी पढ़ें: स्विस बैंक खातों की जानकारी मिलने का रास्ता साफ

आप अपना वोट 2019 में किसी भी पप्पू, टीपू, केजरीवाल या ममता बनर्जी को देने के लिए स्वतंत्र हैं लेकिन मेरा वोट सिर्फ मोदी को है। क्योंकि ना मैं देश को बंगाल बनते देखना चाहता हूँ, ना योगी के आने से पहले का यूपी, ना लालू का बिहार और ना ही आज के जैसी दिल्ली। मैं देखना चाहता हूँ एक सशक्त भारत और उसके लिए मैं इंतज़ार करने को तैयार हूँ। मेरे लिए पकिस्तान के 10, 100 या फिर हज़ार सैनिको के सर से ज्यादा महत्वपूर्ण उसकी संपूर्ण हार है। मैं उस बड़ी जीत के लिए इंतज़ार करने को तैयार हूँ। जब अपनी नींव कमजोर होती है तो उसे भरने में समय लगता है। कमजोर नींव पर बने महल भरभरा कर गिर जाते हैं। इसलिए मैं ये समय मोदी को देने के लिए तैयार हूँ।

(अनाम लेखक के विचार, सोशल मीडिया से प्राप्त)

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