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देखिए मीडिया ने कैसे बदला योगी के बयान का मतलब

मीडिया किस तरह से खबरों के बहाने अपना सियासी एजेंडा चलाती है इसकी एक नई मिसाल सामने आई है। शिकार बने हैं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। पिछले दिनों कई चैनलों और अखबारों ने खबर दिखाई कि योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि “लोग चाहते हैं कि उनके बच्चे भी सरकार ही पाले।” सभी को पहली ही नजर में लगा कि यह बयान गोरखपुर के मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत के मामले पर दिया गया है। अखबारों और वेबसाइटों ने खबर को पोस्ट किया। कई टीवी चैनलों पर बयान के आधार पर खबर दिखाई गई, लेकिन किसी ने भी मुख्यमंत्री योगी का वो बयान नहीं सुनाया, जिसके आधार पर यह दावा किया गया था। इस खबर पर लोगों ने खूब नाराजगी भरी प्रतिक्रियाएं दीं। सोशल मीडिया पर लोगों ने इसके लिए योगी को जमकर खरी-खोटी भी सुनाई और उन्हें असंवेदनशील तक करार दिया। लेकिन सच्चाई इससे कोसों दूर थी।

मीडिया ने गढ़ा था झूठ

दरअसल आदित्यनाथ ने ये बयान लखनऊ में ‘स्टार्टअप इंडिया, स्टैंडअप इंडिया’ स्कीम के बारे में एक प्रोग्राम में कही थी। उनके भाषण का गोरखपुर में बच्चों की मौत के मामले से कहीं कोई भी लेना-देना नहीं था। अपने भाषण में उन्होंने दो लड़कों के बारे में बताया जो सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट यानी कचरे के निपटान के बारे में कोई नया सुझाव लेकर आए थे। इस उदाहरण से योगी ने बताया कि हर कोई अपने-अपने तरीके से समाज में योगदान दे सकता है और इसके जरिए अपनी आजीविका भी कमा सकता है। ऐसे बहुत सारे काम हैं जिनके लिए किसी को सरकार का मुंह देखने की भी जरूरत नहीं। इसी बात को कहते हुए उन्होंने कुछ लोगों की मानसिकता का जिक्र किया, जिसमें वो हर बात के लिए सरकार का इंतजार करते हैं। उन्हें लगता है कि बच्चा दो साल का हो जाए तो उसे भी सरकार ही पाल दे तो अच्छा हो। (देखें वीडियो)

एएनआई ने की छेड़छाड़

न्यूज एजेंसी एएनआई ने इस खबर को सबसे पहले अपने ट्विटर अकाउंट से जारी किया। उन्होंने पूरे भाषण की एक लाइन को कुछ ऐसे लिखा जिससे उसके अर्थ का अनर्थ हो गया। किसी भी ट्वीट में एएनआई ने यह सफाई देने की जरूरत नहीं समझी कि यह बात स्टार्टअप कंपनियां शुरू करने के सिलसिले में बोली गई है। हिंदू विरोधी मीडिया को ऐसी खबरों का इंतजार ही रहता है। देखते ही देखते तमाम न्यूजपेपर वेबसाइट्स और चैनलों पर यह खबर दिखाई जाने लगी। लेकिन किसी ने भी भाषण का वीडियो नहीं दिखाया, वरना पोल खुल जाती। टाइम्स ऑफ इंडिया, इंडियन एक्सप्रेस ही नहीं, हिंदुत्ववादी कहे जाने वाे ज़ी न्यूज समूह की वेबसाइटों पर भी झूठी खबर ही परोसी गई।

टारगेट पर हैं सीएम योगी!

उत्तर प्रदेश में जबर्दस्त चुनावी जीत के बाद मीडिया ने योगी आदित्यनाथ के भाषणों और फैसलों को नॉनस्टॉप दिखाया था, क्योंकि तब उनकी खूब टीआरपी आ रही थी। लेकिन जैसे ही योगी सरकार ने ऐसे कदम उठाने शुरू किए जिससे सुविधाभोगी पत्रकारों और मीडिया समूहों को दिक्कतें पैदा होने लगीं, वैसे ही उन्हें लेकर झूठी खबरों की बाढ़ सी आ गई है। यही कारण था कि गोरखपुर में पिछले सालों के मुकाबले इस साल हालात बेहतर होने के बावजूद उन्हें खलनायक बनाने की कोशिश की गई। पूर्वी यूपी के कई इलाके भयानक बाढ़ से जूझ रहे थे, तब मुख्यमंत्री ने खुद राहत और बचाव की बागडोर संभाली और गांव-गांव तक गए। लेकिन इसे भी मीडिया ने नहीं दिखाया।

नीचे देखें योगी बयान जिसे तोड़ा-मरोड़ा गया:


अब देखिए इस भाषण की मीडिया कवरेज के कुछ नमूने:

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