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नोटबंदी से देश को क्या मिला?, जानिए 5 बड़े फायदे

नोटबंदी को लेकर औपचारिक आंकड़े पहली बार सामने आए हैं। रिजर्व बैंक ने अपनी सालाना रिपोर्ट में बताया है कि 500 और 1000 के जिन नोटों को बंद किया गया था, उनमें से करीब 98.6 फीसदी बैंकों के पास वापस जमा करवा दिया गया। यानी करीब 1.4 फीसदी नोट वापस नहीं लौटे। नोटबंदी लागू होने के बाद से ही इसे लेकर अफवाहें फैलाने वाले इसी आधार पर इसे नाकाम बताने में जुटे हैं। उनका कहना है कि जो नोट बंद किए गए अगर उनमें से ज्यादातर वापस आ गए तो इसका मतलब हुआ कि देश में ज्यादा काला धन था ही नहीं। मीडिया इस थ्योरी को हवा देने में जुटा है क्योंकि नोटबंदी से जिनको सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है उनमें से एक मीडिया भी रहा है। यहां हम आपको याद दिला दें कि नोटबंदी का विरोध करने वाले ज्यादातर वो लोग हैं जिन्हें या तो केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार से दिक्कत है या वो बड़े लोग जिनके पास भारी मात्रा में अवैध कमाई पड़ी हुई थी और इस कदम से उन्हें परेशानियां उठानी पड़ीं। हम आपको बताते हैं वो 5 फायदे जिनसे आप खुद समझ जाएंगे कि नोटबंदी देश के लिए ठीक थी या खराब।

पहला फायदा:
नोटबंदी के बाद ज्यादातर नोटों का लौटना दरअसल सकारात्मक संकेत है। सरकार शुरू से ही कहती रही है कि यह सोचना गलत है कि जो पैसा बैंक में जमा हो गया वो सफेद हो गया। असलियत ये है कि बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी काली कमाई को जाकर चुपचाप बैंकों में जमा करवा दिया। अब ऐसे लोगों से इस कमाई का जरिया पूछा जा रहा है और उस रकम पर उन्हें टैक्स देना होगा। सरकार बारी-बारी ऐसे धन्नासेठों को नोटिस जारी करके हिसाब-किताब के लिए बुला रही है। ऐसे लोगों को अब तक 30 से लेकर 80 फीसदी तक टैक्स भरना पड़ा है। रेगुलर इनकम वालों को 30 फीसदी, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत माफी पाने वालों से 50 फीसदी और धोखा देने की कोशिश करने वालों को 80 फीसदी तक टैक्स देना पड़ रहा है। कुल करीब 3 लाख करोड़ रुपये बाजार में आए हैं। ये वो रकम थी जो अब तक तिजोरियों में बंद थी।

दूसरा फायदा: हमें यह याद रखना चाहिए कि ऊपर जो लोग पकड़े गए हैं वो कोई छोटे-मोटे लोग नहीं हैं। एक बार टैक्स के जाल में फंसने के बाद अब वो आगे ऐसी टैक्स चोरी नहीं कर पाएंगे। क्योंकि उनका पूरा हिसाब सरकार के पास पहुंच चुका है। ये लोग अब अगर फिर से टैक्स रिटर्न फाइल करने से बचने की कोशिश करते हैं तो इनकम टैक्स विभाग उन्हें पकड़ सकेगा। जबकि पहले ऐसे लोगों तक पहुंचने का कोई तरीका नहीं हुआ करता था। सरकार ने खुद बताया है कि नोटबंदी के कारण 56 लाख नए करदाता जुड़े हैं। ये वो लोग हैं जिनकी कमाई तो करोड़ों अरबों में थी, लेकिन वो टैक्स नहीं दिया करते थे। ऐसे लोगों के कारण ही टैक्स का पूरा बोझ ईमानदार कारोबारियों और नौकरीपेशा लोगों पर आ जाता है। इनकम टैक्स रिटर्न भरने वालों की संख्या में भी 25 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जोकि अब तक 9 फीसदी से कम रहा करता था।

तीसरा फायदा:
नोटबंदी ही सबसे बड़ा जरिया था जिससे 2 लाख फर्जी कंपनियां पकड़ी गईं। ये वो कंपनियां थीं जिनके जरिए बड़े लोग काले धन को इधर से उधर करने का काम करते रहे हैं। ये एक ऐसा काम था जो बिना नोटबंदी के संभव नहीं था, क्योंकि कानूनों के मकड़जाल का फायदा उठाकर ऐसी कंपनियां बच निकलती थीं। सामान्य तरीके से इन्हें पकड़ने की कोशिश में 8 से 10 साल तक लगने का अनुमान था। ऐसे में नोटबंदी का रास्ता बेहतर लगता है। कई ऐसी कंपनियां पकड़ी गईं जो कोई कामधाम नहीं करती थीं, लेकिन उनमें रोज लाखों-करोड़ों का ट्रांजैक्शन हो रहा था। ज्यादातर अर्थशास्त्री इसे नोटबंदी की सबसे बड़ी कामयाबियों में से एक मान रहे हैं।

चौथा फायदा: नोटबंदी ने नकली नोटों की अर्थव्यवस्था को लगभग पूरी तरह चौपट कर दिया। हालांकि आरबीआई की रिपोर्ट में यह माना गया है कि नए 2000 औ 500 के नकली डिजाइन बनने के कई मामले सामने आए हैं। लेकिन स्थिति उतनी खतरनाक नहीं है जैसी कि पहले थी। तब बड़ी संख्या में नकली नोट बैंकिंग सिस्टम में भी घुस गए थे। जबकि अब नए नोटों में नकली की पहचान बहुत आसान हो गई है। अब तक जब भी नकली नोट पकड़े गए मीडिया ने उसे बहुत जोरशोर से दिखाया लेकिन यह नहीं बताया कि ज्यादातर मामले असली नोट की तस्वीर लेकर उसका कलर प्रिंटआउट निकालने के थे। शुरू में कुछ लोग ठगे गए क्योंकि उन्होंने असली नोट नहीं देखा था। लेकिन अब नए नोट के नकली पकड़े जाने के मामलों में भारी कमी दर्ज की गई है।

पांचवां फायदा:
किसी भी स्वस्थ अर्थव्यवस्था की निशानी होता है कि उसकी विकास दर और नकदी का अनुपात बहुत ज्यादा न हो। नोटबंदी से पहले अर्थव्यवस्था में करंसी का कुल अनुपात 12.2 फीसदी था। जो कि नोटबंदी के बाद कम हो कर 8.8 फीसदी हो गया। यह एक ऐसा लक्ष्य था जिसे नोटबंदी के जरिए बहुत कम समय में हासिल कर लिया गया।

इन पांच बड़ी कामयाबियों
के अलावा एक जरूरी बात यह भी है कि नोटबंदी के बाद देश के पूर्व प्रधानमंत्री और जाने-माने अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि इससे विकास दर में 2 फीसदी की गिरावट आ जाएगी, यह बात पूरी तरह निराधार साबित हुई है। दरअसल दुनिया भर के कई बड़े अर्थशास्त्री नोटबंदी को आर्थिक समानता लाने वाले कदम के तौर पर देखते रहे हैं। उनकी राय में ये वो पहला कदम था जो आगे चलकर भारत जैसे बड़े देश में अमीरों और गरीबों की खाई को पाटने में मदद करेगा।

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