नौ साल से जेल में क्यों सड़ाए जा रहे हैं कर्नल पुरोहित?

बायीं फाइल तस्वीर लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित की कोर्ट में पेशी की है, जबकि बायीं तस्वीर में कर्नल पुरोहित के साथ उनकी पत्नी अपर्णा पुरोहित हैं।

हमारी सेना का एक कर्नल पिछले नौ साल से जेल में पड़ा हुआ है। उसे क्यों फंसाया गया? यह कोई नहीं जानता। मनमोहन और सोनिया गांधी की सरकार के दिनों की यह घटना है। 2008 में मालेगांव ब्लास्ट के बाद सेना के होनहार लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित को हिंदू आतंकवादी बताकर गिरफ्तार कर लिया गया था। मामले की जांच कर रहे मुंबई एटीएस ने उन पर आरोप लगाया कि उन्होंने ही कथित हिंदू आतंकी संगठनों को आरडीएक्स मुहैया करवाया था। यहां तक कि उनके घर से 60 किलोग्राम आरडीएक्स की बरामदगी भी दिखा दी गई। उस वक्त कांग्रेस सरकार ने कर्नल पुरोहित से जुड़ी कई फर्जी खबरें एनडीटीवी और दूसरे चैनलों के जरिए फैलाईं, ताकि यह बात साबित की जा सके कि कर्नल पुरोहित दरअसल हिंदू आतंकवादी थे। लेकिन कांग्रेस की सरकार होते हुए भी महाराष्ट्र एटीएम कर्नल पुरोहित के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल नहीं कर पाई। इसके बजाय वो ये कोशिश करती रही कि उन्हें ज्यादा से ज्यादा दिन तक जेल में सड़ाया जाए।

मोदी सरकार आने के बाद जांच तेज

2014 में नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद पहली बार यह खुलासा हुआ कि लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित पर अब तक चार्जशीट नहीं हुई है। इस दौरान सेना उन्हें बेगुनाह मानती रही और उन्हें हर महीने वेतन मिलता रहा। सेना कहती रही है कि कर्नल पुरोहित उनके ही मिशन पर थे, लेकिन उन्हें सियासी साजिश के तहत फंसा दिया गया। मोदी सरकार आने के बाद तेजी से कानूनी कार्रवाई शुरू हुई 15 अप्रैल 2015 को सुप्रीम कोर्ट ने भी कह दिया कि कर्नल पुरोहित के खिलाफ कोई सबूत नहीं हैं, इसलिए उनकी जमानत पर विचार होना चाहिए। उन पर मकोका भी हटा दिया गया। लेकिन कांग्रेस सरकार ने उनके इर्दगिर्द साजिशों का ऐसा ताना-बाना बुना था कि जमानत में लगातार देरी होती गई। ताजा स्थिति यह है कि मामले की एनआईए जांच में मुंबई एटीएस की जांच पूरी तरह फर्जी साबित हुई है। हालांकि एनआईए कुछ तकनीकी कारणों से उनकी जमानत का यह कहकर विरोध करती रही है कि अभी उसे कुछ और जांच करनी है। इसी कारण 17 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई में जमानत पर फैसला सुरक्षित रख लिया गया।

कांग्रेस ने कर्नल पुरोहित को फंसाया?

वरिष्ठ पत्रकार मधु किश्वर ने एक जगह लिखा है है कि ‘लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित के सीने में कई राज हैं। उनमें कुछ ऐसे हैं जो देश के कई कद्दावर नेताओं को बेनकाब कर सकते हैं। वो उन नेताओं की घटिया राजनीति की पोल खोल सकते हैं। ये सारी जानकारी लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित ने अपने खुफिया मिशन के दौरान हासिल की हैं’। पुरोहित ने अपने मिशन के दौरान देश में सक्रिय कई धार्मिक संगठनों में गहरी पैठ बना ली थी। वहां से मिलने वाली सूचना वे लगातार सेना में अपने कमांड को भेज रहे थे। उच्चस्तरीय सूत्रों के मुताबिक कर्नल पुरोहित जाली नोटों के एक रैकेट तक पहुंच गए थे, जिसमें देश के कुछ कद्दावर नेता भी शामिल थे। यह बात उन नेताओं को पता चल गई और उन्होंने एक पूरी साजिश के तहत उन्हें हिंदू आतंकवादी घोषित करके गिरफ्तार करवा दिया। कर्नल पुरोहित को फंसाना आसान था, क्योंकि वो जिस मिशन पर थे, उसके तहत उन्होंने कुछ हिंदू संगठनों में भी घुसपैठ की थी। हालांकि उन्होंने वहां पर कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला था।

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