हिंदू धर्म से प्रभावित हैं हामिद अंसारी की पत्नी सलमा!

2015 में हामिद अंसारी जब कंबोडिया के दौरे पर गए थे तो उनके सरकारी कार्यक्रम में खुद सलमा अंसारी ने अंकोरवाट मंदिर जाने का प्रोग्राम जुड़वाया था। अंकोरवाट दुनिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर है। (पीटीआई फोटो)

उपराष्ट्रपति पद से रिटायर हुए हामिद अंसारी अपनी कट्टरपंथी सोच के कारण भले ही आलोचना के शिकार हो रहे हैं, लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि उनकी पत्नी सलमान अंसारी बेहद उदार महिला हैं। सलमा अंसारी शुरू से ही हिंदू धर्म को पसंद करती रही हैं और अपनी इस सोच को जताने से वो कभी नहीं हिचकतीं। सलमा अंसारी तीन तलाक जैसी कुरीतियों का खुलकर विरोध करती रही हैं। जब योग दिवस पर उनके शौहर हामिद अंसारी बायकॉट कर रहे थे तो सलमा ने न सिर्फ योग का समर्थन किया था, बल्कि यहां तक कहा कि सिर्फ योग करना काफी नहीं है, बल्कि उसके साथ ओम् का उच्चारण भी करना चाहिए। सलमा अंसारी मंदिरों में भी जाती रही हैं। अपने पति के दकियानूसी ख़यालात के बिल्कुल उलट उनकी इमेज एक मॉडर्न और आजाद सोच वाली महिला की रही है। वो भले ही उपराष्ट्रपति की पत्नी थीं लेकिन तकनीकी तौर पर वो दो साल तक देश की ‘प्रथम महिला’ रहीं। क्योंकि न तो राष्ट्रपति और न ही प्रधानमंत्री की पत्नी हैं।

हिंदू धर्म का सम्मान करती हैं सलमा

सलमा अंसारी ने कभी मुस्लिम कट्टरपंथी तौर-तरीकों का पालन नहीं किया। वो कभी बुरखा नहीं पहनतीं। हिंदू महिलाओं की तरह माथे पर बिंदी लगाना उनका शौक है। जब योग दिवस को लेकर विवाद पैदा करने की कोशिश हुई और खबर आई कि हामिद अंसारी योग दिवस में हिस्सा नहीं लेंगे तो सलमा अंसारी खुद को रोक नहीं पाईं और उन्होंने मीडिया में आकर कहा कि योग अच्छी चीज है और किसी मुसलमान को इससे डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने यहां तक कहा था कि योग करते वक्त ओम् का उच्चारण करने में कोई बुराई नहीं है। (नीचे देखें वीडियो) सलमा अंसारी ने यह भी बताया कि वो खुद कुछ दिन पहले बहुत बीमार हो गई थीं और उनके घुटने जवाब देने लगे थे। लेकिन योग करने का नतीजा हुआ कि वो सामान्य जिंदगी बिता रही हैं। सलमा अंसारी तीन तलाक के खिलाफ भी जमकर बोलती रही हैं।

इराक से अलीगढ़ तक का सफर

वो अल-नूर नाम से एक चैरिटी संस्था चलाती हैं जिसके अलीगढ़ में तीन स्कूल हैं। इन स्कूलों में भी इस्लामी कट्टरपंथी सोच के बजाय सभी धर्मों के सम्मान की बात सिखाई जाती है। यहां पढ़ने वाले बच्चों को हिंदू धर्म की अच्छाइयों के बारे में भी बताया जाता है। कॉलेज के दिनों में वो लेखिका बनकर लंदन में रहना चाहती थीं। सलमा के पिता यूएन के एक मिशन के सिलसिले में इराक में पोस्टेड थे। खुद सलमा ने एक इंटरव्यू में बताया है कि “मेरे पिता को लगता था कि मैं कुछ ज्यादा ही मॉडर्न और भारतीय मूल्यों का सम्मान करने वाली हो गई हूं, लिहाजा उन्होंने मुझे इराक से अलीगढ़ पढ़ने भेज दिया। वहां पर मैंने अंग्रेजी विषय चुना। ताकि मैं मॉडर्न सोच के साथ खुद को जोड़े रखूं।”

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