छह महीने बीत गए, रवीश का भाई कब सरेंडर करेगा?

हरियाणा बीजेपी के अध्यक्ष सुभाष बराला का बेटा विकास बराला छेड़खानी के मामले में जेल चला गया। मामला एक हाईप्रोफाइल नेता का था, इसलिए मीडिया से लेकर जनता तक ने दबाव बनाया और पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी। लेकिन बात हाईप्रोफाइल पत्रकार की होती है तो कानून अपना काम करना बंद क्यों कर देता है? एनडीटीवी के पत्रकार रवीश कुमार के भाई ब्रजेश कुमार के फरार हुए छह महीने हो गए हैं। उन पर एक नाबालिग दलित लड़की से बलात्कार और सेक्स रैकेट चलाने का आरोप है। मामला सामने आने के बाद से ब्रजेश कुमार पांडेय फरार हैं। इस केस में सह-आरोपी निखिल प्रियदर्शी को पुलिस उत्तराखंड से गिरफ्तार कर चुकी है। लेकिन राजनीति और मीडिया के संरक्षण के कारण ब्रजेश तक पुलिस के हाथ नहीं पहुंच सके हैं। फिलहाल लालू यादव के सत्ता से बाहर होने के बाद इस मामले में इंसाफ की उम्मीद जगी है।

हाई कोर्ट ने दिया सरेंडर का आदेश

31 जुलाई को पटना हाई कोर्ट ने रवीश कुमार के भाई और कांग्रेस नेता ब्रजेश पांडेय उर्फ बृजेश कुमार और उनके साथी मृणाल किशोर को फौरन सरेंडर करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने अग्रिम जमानत की अर्जी को खारिज करते हुए कहा था कि उन्हें किसी तरह की राहत नहीं दी जा सकती। आरोपियों की दलील है कि पीड़ित लड़की की एफआईआर में उनका नाम नहीं है और न ही उसने धारा 164 के तहत दिए अपने बयान में उनका नाम लिया था। करीब एक महीने बाद लड़की ने ब्रजेश कुमार पांडेय का नाम लिया। अदालत ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि वो पहले निचली अदालत में सरेंडर करें। हैरानी की बात ये कि इस आदेश के आए 10 दिन हो चुके हैं लेकिन रवीश कुमार के भाई अब भी सरेंडर करने को तैयार नहीं।

पीड़ित लड़की को दी गईं धमकियां

केस दर्ज कराने के बाद से पीड़ित लड़की पर भारी दबाव की बात सामने आती रही है। कुछ दिन पहले ही खबर आई थी कि पीड़ित लड़की केस वापस लेने को तैयार हो गई है, क्योंकि उसके पिता और परिवार उसका साथ देने को राजी नहीं हैं। बाद में ये खबर फर्जी साबित हुई। यह भी पता चला कि ये खबर कुछ भरोसेमंद पत्रकारों की मदद से उड़वाई गई थी। बताया जा रहा है कि इस मामले में बिहार में अब तक सत्ता में भागीदार रहे राजनीतिक दल के सबसे बड़े नेता निजी तौर पर रुचि ले रहे थे। उन्होंने पीड़ित लड़की के पिता से कई बार बात करके उन्हें केस वापस लेने के लिए मनाया था। लेकिन बीच में ही अचानक सत्ता से बाहर हो जाने के कारण बात उनके हाथ से निकल गई और मामले की जांच दोबारा तेज कर दी गई। अब यह सवाल उठ रहे हैं कि छह महीना बीतने के बावजूद अब तक ब्रजेश कुमार पांडेय को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया।

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फरार भाई की मदद कर रहे हैं रवीश!

टीवी पर आदर्श की बातें करने वाले रवीश कुमार अपने भाई की पोल खुलने के बाद से उनसे पल्ला झाड़ने में जुटे रहे हैं। लेकिन ऐसे कई संकेत मिल चुके हैं कि वो उनकी मदद कर रहे हैं। मोबाइल सर्विलांस में यह जानकारी भी सामने आ चुकी है कि ब्रजेश कुमार पांडेय कुछ वक्त तक दिल्ली और आसपास के शहरों में भी रहे थे। उस दौरान कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि रवीश कुमार उन्हें छिपने में मदद कर रहे हैं। पीड़ित लड़की का आरोप है कि ब्रजेश पांडे और निखिल प्रियदर्शी सेक्स रैकेट चलाते हैं। बिहार के कई रसूखदार नेता और ब्यूरोक्रेट भी इस गैंग में शामिल हैं। लड़की ने बताया है कि ब्रजेश कुमार पांडेय उसे पटना के बोरिंग रोड में एक फ्लैट में ले गया था। यह फ्लैट मृणाल किशोर का था। वहां कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिला कर पिला दिया। इसके बाद उसको कोई होश नहीं था। नशे में आने के बाद ब्रजेश पांडे ने उसके प्राइवेट पार्ट को टच किया। लड़की ने विरोध किया तो उसके साथ मारपीट भी की गई।

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फिलहाल बिहार में आरजेडी के सत्ता से हटने के बाद पीड़ित लड़की को एक बार फिर से इंसाफ की उम्मीद है। लेकिन जिस तरह से हाई कोर्ट के कहने के बावजूद ब्रजेश कुमार पांडेय ने सरेंडर नहीं किया उससे कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। जहां तक रवीश कुमार का सवाल है वो इसे अपने खिलाफ साजिश बताते रहे हैं। चंडीगढ़ छेड़खानी केस पर भी बिना नाम लिए उन्होंने फेसबुक पोस्ट लिखी। लेकिन उन्हें पता था कि लोग आईना दिखा देंगे।

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