Loose Views

हिंदुत्व को मौकापरस्त पत्रकारों से बचाना सबसे जरूरी

बायीं तस्वीर वरिष्ठ पत्रकार दीपक शर्मा की है।

बचपन में जब माँ को हर पूर्णमासी का व्रत रखते देखता था और पापा को हर मंगलवार को, तो एक डिफरेंट फीलिंग आती थी। या फिर वो दशहरा का मेला या मेले से पहले नवरात्र और दुर्गा पूजा के पंडाल। जब माँ, बाप, बहनों के साथ हर शाम किसी पंडाल में हम सब होते थे, तो एक डिफरेंट फीलिंग होती थी। मांस नहीं खाना है… शराब नहीं छूनी है… तंबाकू का सवाल नहीं… रोज़ दोहराया जाता था। रोज़ नहा धोकर नाश्ते से पहले घर के मंदिर में रखे ठाकुरों को प्रणाम करना होता था। कोई बड़ा-बुजुर्ग घर आये तो सबसे पहले पैर छूने का इशारा दिया जाता था। ये हमने सीखा नहीं… हमें सिखाया गया था। शायद मामा शाखा में जाते थे या दादा किसी गोलवलकर से प्रभावित रहेंगे होंगे। कारण संघ हो, आर्यसमाज हो या जो भी रहा हो पर घर में संस्कारों पर ही ज़ोर था। संतुष्टि ये है कि 40-45 साल बाद संस्कारों का 90 प्रतिशत लहू से अभी अलग नहीं हुआ है। शायद यही प्रैक्टिस ऑफ़ हिंदू लाइफ है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी हिंदुत्व कहा है।

आज मै देखता हूं कि एक टीवी रिपोर्टर जो 2014 से पहले दिल्ली के अशोक होटल के अमात्रा स्पा में दिन भर दलाली करते थे आजकल शाम को एंकरिंग में वो देश को संस्कार पर ज्ञान दे रहे हैं। हिंदुत्व और मोदीत्व समझा रहे है। जिनके हाथों में जाम और हथेलियों में काली कमाई के नोट थे, जिनका संस्कारों से कभी सरोकार नहीं रहा वो अचानक टीवी का सुदर्शन चक्र हाथ में लेकर अपसंस्कारों का वध करने निकले हैं। जिन्होंने स्टूडियो में स्कर्ट पहनने वाली हर रिपोर्टर को बुरी निगाह से देखा और एंकर बनाने के प्रलोभन में दर्ज़नो मुताह (इस्लाम में होने वाली अस्थायी विवाह की एक परंपरा) किए, वो मोहन भागवत के भक्त बने हुए हैं और ट्विटर पर भगवा का मोर्चा संभाला हुआ है। रातोंरात बदली हुईं इन विचारधाराओं और वफादारियों को देखकर मै हैरान हूँ।

जो कभी ताज मानसिंह होटल के चेंबर्स क्लब में करोड़ों की डील कर आज टीवी मालिक बने है वो ये बता रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और हिंदुत्व का कॉपीराइट उनके पास है। जो मशहूर एंकर यूपीए राज में हुडा के बेटे और वाड्रा के साथ मिलकर गुड़गांव की हर बड़ी ज़मीन का लैंड यूज़ बदलवा रहे थे वो 16 मई 2014 के बाद कांग्रेस मुक्त भारत का आह्वान कर रहे हैं। पिछले 10 साल से सत्ता के ये घोषित दलाल अचानक हिंदुत्व के पैरोकार, गौरक्षक और देशभक्त हो गए। किसी पत्रकार का विचारधारा बदलना अपराध नहीं है। कांग्रेसी से भाजपाई होना भी अपराध नहीं है। लेफ्ट से राइट विंगर होना भी अपराध नहीं है। लेकिन विचारधारा बदलकर अपराध (दलाली) जारी रखना सबसे बड़ा अपराध है। ऐसे अपराधियों की पहचान ज़रूरी है।


(सीनियर जर्नलिस्ट दीपक शर्मा के फेसबुक पेज से साभार। इस लेख में उन्होंने किसी का नाम तो नहीं लिखा है लेकिन समझा जाता है कि इसमें उन मौकापरस्त पत्रकारों की ओर इशारा किया गया है जो कुछ साल पहले तक संघ, बीजेपी को गालियां देते थे और हिंदुत्व का मजाक उड़ाते थे। बदली हवा देखकर उन्होंने रंग बदल लिया है। इनमें ज़ी न्यूज़, इंडिया टीवी, आज तक और टाइम्स नाऊ जैसे प्रमुख चैनलों के पत्रकार भी शामिल हैं।)

कृपया लेख कॉपी-पेस्ट न करें। कई लोग पोस्ट कॉपी करके फेसबुक और व्हाट्सएप पर शेयर कर देते हैं, जिससे वेबसाइट की आमदनी काफी कम हो गई है। राष्ट्रवाद की विचारधारा पर आधारित यह वेबसाइट बंद हो जाएगी तो क्या आपको खुशी होगी? कृपया खबरों का लिंक शेयर करें।
एक अपील: न्यूज़लूज़ के जरिए हम राष्ट्रवादी पत्रकारिता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। इस वेबसाइट पर होने वाला खर्च बहुत ज्यादा है और हमारी आमदनी काफी कम। हम अपने काम को जारी रख सकें इसके लिए हमें आर्थिक मदद की जरूरत है। ये हमारे लिए ऑक्सीजन का काम करेगी। डोनेट करने के लिए क्लिक करें:
Donate with

comments

Polls

क्या नरेंद्र मोदी सरकार इसी कार्यकाल में जनसंख्या कानून लाएगी?

View Results

Loading ... Loading ...

Popular This Week

Don`t copy text!