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कश्मीर की तर्ज पर यूपी में भी हो रही है टेरर फंडिंग!

फाइल तस्वीरें

देश में इस्लामी आतंकवाद फैलाने की साजिश के सिलसिले में एक बड़ा मामला सामने आया है। खुफिया एजेंसियों के मुताबिक पाकिस्तानी आतंकी संगठन जमात-उद-दावा (JuD) उत्तर प्रदेश में जिहाद के नाम पर करोड़ों रुपये भेज रहा है। ये रकम कश्मीर को भेजे जाने वाली रकम के अलावा है। न्यूज़ पोर्टल pgurus.com ने मनी ट्रांसफर के दस्तावेजों के साथ यह खुलासा किया है। दावा किया गया है कि यूपी के कुछ राजनीतिक दलों के नेता पाकिस्तानी एजेंसियों के संपर्क में हैं। इसके मुताबिक जमात-उद-दावा के लिए हवाला करने वाले दलाल तौकीर हुसैन ने अकेले जनवरी 2016 में 487 करोड़ रुपये भारत भेजे। इस रकम का बड़ा हिस्सा यूपी के एक बड़े मुस्लिम नेता तक पहुंचा। ये बिल्कुल उसी तर्ज पर है जैसे कश्मीर में हुर्रियत नेताओं के लिए पाकिस्तान से करोड़ों रुपये पहुंचाए जाने का भंडाफोड़ हुआ है।

क्या है पूरा मामला?

खुफिया एजेंसियों के फोन और मनी ट्रांसफर सर्विलांस में ये जानकारी सामने आई है कि बीते कुछ वक्त से पाकिस्तान का फोकस उत्तर प्रदेश पर है। यहां कुछ स्थानीय नेताओं को हवाला के जरिए करोड़ों रुपये पहुंचाए जा रहे हैं। 2016 में 4 जनवरी से 15 जनवरी के बीच तौकीर हुसैन का मोबीकैश स्टेटमेंट भी सामने आया है। जिसमें पैसे भेजे जाने की पुष्टि होती है। जांच में पाया गया कि तौकीर हुसैन जमात-उद-दावा के लिए पैसे पहुंचाने और लाने का काम करता रहा है। भारत में पैसे भेजने के लिए वो मोबाइल फोन ट्रांसफर का तरीका अपनाता रहा है। जिस तरह से भारत में पेटीएम है, ठीक उसी तरह पाकिस्तान में मोबाीकैश सर्विस काफी प्रचलित है।

योगी के आने से डर

इस खबर पर न्यूज़लूज़ की तहक़ीकात में सामने आया कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनने के बाद इस फंडिंग में भारी गिरावट आई है। क्योंकि इससे पहले स्थानीय स्तर पर प्रशासन के कुछ अफसरों की मदद के कारण फंडिंग को रोकना बहुत साबित हो रहा था। खुफिया एजेंसियों के मुताबिक तौकीर हुसैन कुछ मुसलमान कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेताओं के साथ संपर्क में है। अब तक जो रकम आई है उसका इस्तेमाल खास तौर पर नौजवानों के दिमाग में जिहादी जहर घोलने, ड्रग्स के कारोबार और अलग-अलग इलाकों में सांप्रदायिक तनाव पैदा करने में इस्तेमाल होता रहा है। बीजेपी सरकार आने के बाद सबसे बड़ा फर्क यही पड़ा है कि फंडिंग की रकम अब काफी कम हो गई है, लेकिन कुछ अनजान रास्तों से अब भी यह काम जारी रहने का शक है। लिहाजा सिक्योरिटी एजेंसियां इन संदिग्ध नेताओं की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखे हुए हैं।

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