फर्जी खबरों की फैक्ट्री हो गई है न्यूज एजेंसी पीटीआई!

देश की सबसे प्रतिष्ठित माने जाने वाली न्यूज एजेंसी पीटीआई इन दिनों एक के बाद एक फर्जी और मनगढ़ंत खबरें फैलाने में जुटी है। खास बात ये है कि इनमें से ज्यादातर बीजेपी और नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ होती हैं। ताजा मामला गुजरात के अहमदाबाद में बारिश से पानी भरने का मामला है। पीटीआई ने एक तस्वीर जारी करके दावा किया कि ये अहमदाबाद के सरदार वल्लभ भाई पटेल हवाई अड्डे की है। तस्वीर में एयरपोर्ट पर पानी भरा हुआ दिखाया गया। ये तस्वीर इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने छाप भी दी। मकसद था इस तस्वीर के बहाने यह साबित करना कि गुजरात में विकास की बातें झूठी हैं और हालात बहुत खराब हैं। लेकिन लोगों ने झूठ पकड़ लिया। पता चला कि ये तस्वीर 2015 में चेन्नई में आई बाढ़ की थी।

इंडियन एक्सप्रेस ने छापी फर्जी फोटो

पीटीआई ने जब फर्जी फोटो जारी की तो इंडिया टुडे समेत कुछ न्यूज वेबसाइट्स ने इसे पोस्ट किया। इसके बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने ध्यान दिलाया कि ये तस्वीर अहमदाबाद की नहीं, बल्कि चेन्नई की है तो ज्यादातर ने तस्वीर हटा ली। लेकिन पीटीआई ने तस्वीर वापस नहीं ली और देश का सबसे साहसी और निष्पक्ष अखबार का दावा करने वाले इंडियन एक्सप्रेस ने इसे अपने पहले पेज पर प्रमुखता से छापा। दरअसल गुजरात में इसी साल चुनाव होने हैं। उससे पहले गुजरात से जुड़ी हर नकारात्मक खबर को मीडिया में बढ़ा-चढ़ाकर बताने का खेल शुरू हो चुका है। माना जा रहा है कि इसी नीयत से पीटीआई ने ये तस्वीर जारी की थी और सबकुछ जानते बूझते हुए इंडियन एक्सप्रेस ने इसे पूरी प्रमुखता से छापा।

स्मृति ईरानी के ट्वीट के बाद माफी

पीटीआई ने फर्जी फोटो जारी करने के घंटों बाद तक चुप्पी साधे रखी। उसे लगा कि पहले की तरह इस बार भी उसका दांव चल जाएगा। लेकिन सूचना प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी ने ट्विटर पर इस बारे में जवाब मांग लिया। जिसके बाद पीटीआई को लिखित माफी मांगनी पड़ी। एजेंसी ने खुद को बेकसूर साबित करने के लिए सारा दोष फोटोग्राफर पर मढ़ दिया और कहा कि उसकी गलती से ही ये चूक हुई है और उसे नौकरी से निकाल दिया गया है। जबकि यह संभव ही नहीं है कि अहमदाबाद का फोटोग्राफर दो साल पुरानी चेन्नई की तस्वीर भेजे। यह जानबूझकर की गई गलती लगती है क्योंकि आम तौर पर ऐसा कुछ होता है तो किसी न किसी स्तर पर पकड़ ली जाती है। सोशल मीडिया के जरिए कई लोगों ने गलती पर ध्यान दिलाया तब भी पीटीआई ने इसे सुधारने की जरूरत नहीं समझी।

पीटीआई में भरे हैं ‘जिहादी पत्रकार’

दरअसल यूपीए सरकार के दौरान पीटीआई में बड़े पैमाने पर कांग्रेसी और कम्युनिस्ट विचारधारा वाले जिहादी किस्म के पत्रकारों को नौकरी पर रखा गया था। ये चुपचाप अपना काम करते रहते हैं और ऐसा कोई मौका नहीं छोड़ते जिससे देश और राष्ट्रवादी ताकतों को शर्मिंदा होना पड़े। पिछले कुछ वक्त में पीटीआई ने कई फर्जी खबरें फैलाई हैं। इनमें से कुछ उदाहरण हैं-

  • हाल ही में एजेंसी ने खबर जारी की कि यूपी में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने शिक्षा बजट में भारी कटौती कर दी है। जबकि बजट में बढ़ोतरी हुई थी। एजेंसी के पत्रकारों की ढिंठाई ही कहेंगे कि झूठ की पोल खुलने के बाद भी उन्होंने खबर वापस नहीं ली।
  • इसी तरह पीटीआई ने पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के हवाले से खबर दी कि उन्होंने कहा है कि 2016 में पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर पर सर्जिकल स्ट्राइक इसलिए किया गया क्योंकि एक न्यूज एंकर ने सरकार से ‘अपमानजनक’ सवाल पूछे थे। इस खबर को पाकिस्तानी मीडिया ने खूब उछाला और उन्होंने इसे भारत की पोल खुलना करार दिया।
  • पीटीआई ने जेएनयू में भारत विरोधी नारेबाजी के वक्त भी बेहद संदिग्ध भूमिका निभाई थी। पहले गृह मंत्रालय के किन्हीं सूत्रों के हवाले खबर दी कि नारेबाजी हुई ही नहीं। फिर खबर जारी की कि नारेबाजी अगर हुई भी तो कन्हैया का कोई हाथ नहीं था। जबकि पुलिस की रिपोर्ट कुछ और ही कहानी कह रही थी।
  • पिछले दिनों चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में पाकिस्तान के हाथों भारत की हार पर इस एजेंसी ने एक बेहद आपत्तिनजक ट्वीट किया था, जिसका मतलब था कि पाकिस्तानी टीम ने भारत को जोरदार तमाचा जड़ दिया है।
  • पीटीआई के एजेंडाबाजों की हिम्मत इतनी है कि वो सूचना प्रसारण मंत्री को भी नहीं छोड़ते। राज्यमंत्री राज्यवर्धन राठौड़ भी प्रोपोगेंडा के शिकार हो चुके हैं। पिछले साल जून में PTI ने खबर जारी की कि राठौड़ ने तब के रिजर्व बैंक गवर्नर की तारीफ की है।

पीटीआई सरकारी मदद पर चलने वाली न्यूज एजेंसी है। इसे सबसे विश्वसनीय और निष्पक्ष माना जाता रहा है, लेकिन बीते 10 साल के कांग्रेसी शासन ने इसे पूरी तरह से जिहादी संस्था में बदल दिया है। नई सरकार आने के बाद एजेंसी के मैनेजमेंट में थोड़ा बदलाव आया है, लेकिन निचले स्तर पर काम कर रहे पत्रकार अब भी घात करने का कोई मौका नहीं छोड़ते।

एक अपील: न्यूज़लूज़ के जरिए हम राष्ट्रवादी पत्रकारिता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। इस वेबसाइट पर होने वाला खर्च बहुत ज्यादा है और हमारी आमदनी काफी कम। हम अपने काम को जारी रख सकें इसके लिए हमें आर्थिक मदद की जरूरत है। ये हमारे लिए ऑक्सीजन का काम करेगी। डोनेट करने के लिए क्लिक करें:

comments

Tags: ,