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इसरो जासूसी कांड और प्रधानमंत्री के बेटे की करतूत!

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कांग्रेस की सरकारों के दौर में किस तरह से देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किए गए ये खबर उसकी एक बड़ी मिसाल है। 90 के दशक में अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में देश का नाम ऊंचा करने वाली संस्था इसरो में जासूसी कांड खूब सुर्खियों में आया था। यह बात भी सामने आई थी कि स्पेस एजेंसी के वैज्ञानिकों ने वहां के राज कुछ विदेशी जासूसों को दिए। इस मामले में अब कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आ रही हैं। केरल के आईपीएस अफसर सीबी मैथ्यूज ने दावा किया है कि उस केस में तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिंह राव का बेटा प्रभाकर राव शामिल था और उसे बचाने के लिए देश की सुरक्षा को खतरे में डालने वाले इस जासूसी कांड पर हमेशा-हमेशा के लिए मिट्टी डाल दी गई। वैज्ञानिकों की जासूसी के लिए पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने बाकायदा कॉल गर्ल्स का इस्तेमाल किया था।

क्या है इसरो जासूसी कांड?

1994 के आसपास यह खबर आई थी कि इसरो की लेटेस्ट रॉकेट टेक्नोलॉजी पाकिस्तान के हाथ लग गई है। यह बात पता चली कि इसरो के ही कुछ वैज्ञानिकों ने ये जानकारी उन्हें दी है। शुरुआती जांच में ही पता चल गया कि दो सीनियर वैज्ञानिकों को मालदीव में कॉलगर्ल्स के जरिये फंसा कर ब्लैकमेल किया गया और उनसे रॉकेट तकनीक हासिल कर ली गई। ये दोनों कॉलगर्ल्स केरल के एक फाइवस्टार होटल से गिरफ्तार कर ली गई थीं और पता चला था कि वो दोनों पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए काम करती हैं। मामले की जांच कर रहे सीबी मैथ्यूज के तब होश उड़ गए जब इस केस में प्रधानमंत्री नरसिंहराव के बेटे प्रभाकर राव का नाम सामने आया। आईपीएस अफसर सीबी मैथ्यूज का दावा है कि प्रभाकर राव को बचाने के लिए ही ये मामला सीबीआई को सौंप दिया गया था। बाद में सीबीआई ने बिना ढंग से जांच किए मामले को दबा दिया। तब के तमाम बड़े कांग्रेसी नेताओं को इस बात की जानकारी भी थी।

डिफेंस डील पर थी नज़र

बताते हैं कि प्रभाकर राव एक बड़ी डिफेंस डील में दलाल की भूमिका निभा रहा था। वो इस प्रोजेक्ट में हैदराबाद के कारोबारी रवींद्र रेड्डी के लिए लॉबिंग कर रहा था। सारा खेल शुरुआती तौर पर रेड्डी ने ही रचा था। वो उस वक्त भारत को रूस की तरफ से मिले क्रायोजेनिक रॉकेट की डिजाइन चाहता था। इसी मकसद से मालदीव गए दो वैज्ञानिकों को सेक्स के जाल में फंसाया गया और उन्हें ब्लैकमेल करके ये राज जान लिए गए। प्रभाकर राव रवींद्र रेड्डी के लिए पैरवी कर रहा था ये बात इंडिया टुडे मैगजीन ने अपने 31 अगस्त 1996 के अंक में छापी थी। आईपीएस मैथ्यूज ने अपनी किताब ‘निर्भयम’ में इस खबर की एक तरह से पुष्टि की है। उनका दावा है कि तब प्रधानमंत्री कार्यालय के दबाव में जांच को पूरी तरह पलट दिया गया। इस केस में केरल के तत्कालीन मुख्यमंत्री के करुणाकरन को इस्तीफा भी देना पड़ा था।

सेक्स के बदले देश बेचा!

इस केस की जांच में पता चला था कि मालदीव कि दो महिलाएं फौज़िया हसन और मरियम रशीदा चेन्नई के एक फाइवस्टार होटल में आती-जाती हैं। इसी होटल में इसरो के दो वैज्ञानिक और कुछ बड़े पुलिस अफसर भी अक्सर आते-जाते थे। दरअसल ये रंगरंगेलियां मनाने का अड्डा था जहां जिस्मफरोशी के बदले में रॉकेट टेक्नोलॉजी दी जा रही थी। सबसे पहले आईबी को इसका पता चला था। कुछ दिन बाद पता चला कि ऐसा ही एक खेल तिरुवनंतपुरम के एक फाइवस्टार होटल में भी चल रहा है। जब दोनों लड़कियों की गिरफ्तारी हुई तो सारी कहानी सामने आ गई। वैसे जासूसी कांड का ये मामला सुप्रीम कोर्ट में अभी चल रहा है। जिसके फैसले में इस पूरे रैकेट के कुछ और पहलू सामने आने की उम्मीद है।

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