जानिए बहुमत के बावजूद मोदी के पैरों में क्यों है बेड़ी!

बीजेपी 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत के साथ चुनी गई, लेकिन एक बदकिस्मती उसके साथ बनी रही। राज्यसभा में पार्टी का बहुमत नहीं है और ये स्थिति अभी कम से कम अगले साल फरवरी-मार्च तक बने रहने वाली है। राज्यसभा में बहुमत न होने के कारण पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार के कई बेहद अहम बिल अटके पड़े हैं। इन बिलों को लेकर कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियों का रवैया अड़ंगेबाजी वाला है। बीते तीन साल में सरकार उन्हीं बिलों को राज्यसभा से पास करवा पाई है, जिनको लेकर आम सहमति बन सकी। दिक्कत यह भी है कि राज्यसभा में जब बीजेपी मजबूत होगी तो उसकी सरकार के 4 साल पूरे हो चुके होंगे। इसके बाद वो राज्यसभा में सबसे बड़ी पार्टी तो होगी, लेकिन बहुमत नहीं होगा। दरअसल इस पूरे कार्यकाल में राज्यसभा में बहुमत का आंकड़ा पूरा होने के आसार नहीं है।

राज्यसभा में लाचार है बीजेपी

अभी राज्यसभा में बीजेपी के सदस्यों की संख्या कांग्रेस से कम है। इस सदन में सदस्यों का कार्यकाल छह साल का होता है। इनमें से एक-तिहाई सदस्य हर 2 साल पर रिटायर होते हैं। जैसे-जैसे कांग्रेस और दूसरी पार्टियों के राज्यसभा सदस्य रिटायर हो रहे हैं वैसे-वैसे बीजेपी की स्थिति मजबूत हो रही है, लेकिन अब भी किसी बिल को पास करवाने के लिए उसे दूसरी पार्टियों की खुशामद करनी पड़ती है। राज्यसभा में मजबूत होने के साथ नए उपराष्ट्रपति की भूमिका भी बेहद अहम होगी, क्योंकि वो इस सदन के सभापति भी होते हैं। ऐसे में आने वाले वक्त में वेंकैया नायडू की जिम्मेदारी होगी कि वो राज्यसभा में फंसे कामों को तेजी से निपटाएं। मौजूदा सभापति हामिद अंसारी का रुख आम तौर पर सरकार के साथ असहयोग वाला रहा है।

राज्यसभा का उलझाऊ गणित

अगले साल अप्रैल के पहले हफ्ते में कम से कम 72 राज्यसभा मेंबर रिटायर होंगे। यूपी विधानसभा चुनाव में मिले प्रचंड बहुमत का बीजेपी को बहुत फायदा नहीं होगा, क्योंकि खाली होने वाली सीटों में सिर्फ 10 यूपी की हैं। इनमें से 9 पर बीजेपी के और एक पर समाजवादी पार्टी का सदस्य चुना जाएगा। इसी दौरान महाराष्ट्र में बीजेपी और शिवसेना मिलकर 4 सदस्य राज्यसभा में भेजेंगे। कुल मिलाकर बीजेपी के राज्यसभा सदस्यों की संख्या मौजूदा 56 से बढ़कर करीब 70 हो जाएगी, जबकि कांग्रेस की संख्या 58 से कम होकर 48 हो जाएगी। पहली बार आम आदमी पार्टी के 3 सदस्य राज्यसभा में एंट्री लेंगे। लेकिन ये तीनों बीजेपी सरकार के बजाय कांग्रेस के ही काम आएंगे।

आखिरी साल होगा बेहद अहम

मोदी सरकार को ये एहसास है कि आखिरी साल में उसे वो सारे काम पूरा करने हैं, जिसके लिए अब तक इंतजार करना पड़ा। लेकिन उनसे जुड़े बिलों को राज्यसभा में पास करवाने के लिए उसे गैर-एनडीए क्षेत्रीय दलों जैसे कि- एआईडीएमके, बीजेडी और टीआरएस से मदद लेते रहना पड़ेगा। ऊपरी सदन में कांग्रेस समेत ज्यादातर विपक्षी पार्टियां बीजेपी सरकार के लिए बेहद द्वेषपूर्ण रवैये वाली हैं। ऐसे में बिलों को पास करवाने के लिए सरकार को तरह-तरह के समझौतों और सौदेबाजी के लिए तैयार रहना होगा। विपक्ष पूरी कोशिश करेगा कि आखिरी साल में सरकार ऐसा कोई काम न करने पाए जिसका उसे 2019 के लोकसभा चुनाव में फायदा हो।

राम मंदिर भी इसीलिए अटका है

2015 में गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने एक बार कहा था कि राज्यसभा में बहुमत न होने के कारण राम मंदिर का काम भी फंसा हुआ है। अगर केंद्र सरकार चाहे कि कानून बनाकर मंदिर का रास्ता साफ कर दे तो वो ऐसा नहीं कर पाएगी, क्योंकि राज्यसभा में वो बिल गिर जाएगा। लेकिन अप्रैल 2018 के बाद सरकार इसकी कोशिश कर सकती है। इसके अलावा घोषणापत्र में किए गए कुछ और अहम वादे जैसे कि जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान करने वाली धारा 370 को खत्म करना और समान नागरिक संहिता भी शामिल हैं। सरकार राज्यसभा की इस पेचीदा स्थिति के बारे में हिंदू संगठनों को जानकारी भी दे चुकी है और इस बात को समझाया है कि क्यों बहुमत होने के बावजूद मोदी सरकार के पैरों में अब तक बेड़ी बंधी हुई है।

देखें वीडियो:

कृपया लेख कॉपी-पेस्ट न करें। कई लोग पोस्ट कॉपी करके फेसबुक और व्हाट्सएप पर शेयर कर देते हैं, जिससे वेबसाइट की आमदनी काफी कम हो गई है। राष्ट्रवाद की विचारधारा पर आधारित यह वेबसाइट बंद हो जाएगी तो क्या आपको खुशी होगी? कृपया खबरों का लिंक शेयर करें।
एक अपील: न्यूज़लूज़ के जरिए हम राष्ट्रवादी पत्रकारिता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। इस वेबसाइट पर होने वाला खर्च बहुत ज्यादा है और हमारी आमदनी काफी कम। हम अपने काम को जारी रख सकें इसके लिए हमें आर्थिक मदद की जरूरत है। ये हमारे लिए ऑक्सीजन का काम करेगी। डोनेट करने के लिए क्लिक करें:

comments

Tags: , , ,