आर्मी चीफ को गाली देने वालों पर जेटली क्यों मेहरबान

आपको याद होगा कि कुछ दिन पहले एक न्यूज वेबसाइट ने एक लेख पोस्ट किया था, जिसमें भारत के सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत की तुलना जनरल डायर से की गई थी। इसलिए क्योंकि जनरल रावत ने कश्मीर में एक पत्थरबाज को जीप से बांधने के कदम को सही ठहराया था। लेकिन क्या आप इस बात की कल्पना कर सकते हैं कि उसी वेबसाइट के एडिटर को उसकी हरकत का इनाम दिया जाए? सिर्फ इनाम ही नहीं उस वेबसाइट के एडिटर को उल्टा उन फौजी अफसरों को लेक्चर देने के लिए बुलाया जाए जिन्हें उसकी वेबसाइट में बलात्कारी से लेकर जनरल डायर तक कहा जा चुका है। देश में भले ही नरेंद्र मोदी की सरकार है लेकिन ये फैसले चुनाव हार कर भी ‘सबसे ताकतवर’ मंत्री बने अरुण जेटली की नाक के नीचे हो रहा है।

NDC में सिद्धार्थ वरदराजन का लेक्चर

रक्षा मंत्रालय के तहत आने वाले दिल्ली के नेशनल डिफेंस कॉलेज (NDC) में पिछले दिनों एक सेमीनार में द वायर मैगजीन के संपादक सिद्धार्थ वरदराजन को लेक्चर देने के लिए बुलाया गया। ये वही सिद्धार्थ वरदराजन हैं जिनकी वेबसाइट ने जनरल बिपिन रावत को जनरल डायर करार दिया था। खुद सिद्धार्थ वरदराजन ने ट्वीट करके बताया कि उन्हें दिल्ली के नेशनल डिफेंस कॉलेज में तीनों सेनाओं के ब्रिगेडियर स्तर के अधिकारियों के आगे भाषण देने के लिए बुलाया गया है। उनका विषय है- कूटनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा। देखा जाए तो विपरीत विचार रखने वाले या आलोचना करने वाले किसी व्यक्ति की बात को सुनने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन उसके लिए सिद्धार्थ वरदराजन के अलावा किसी और को भी बुलाया जा सकता था। क्योंकि सिद्धार्थ वरदराजन भारत के नागरिक नहीं हैं और देश में उनकी भूमिका बेहद संदिग्ध है। ऐसे में सेना जैसे महत्वपूर्ण संस्थान में उन्हें घुसने देना बेहद खतरनाक हो सकता है।

कौन है सिद्धार्थ वरदराजन?

कई बड़े अखबारों के संपादक रहे हैं। मोदी सरकार बनने के वक्त वो द हिंदू के संपादक थे। इसी दौरान पता चला कि भारतीय कानून के तहत कोई विदेशी व्यक्ति भारतीय अखबार का संपादक नहीं हो सकता। जिसके बाद उन्हें हटना पड़ा था। इन्होंने 2002 के गुजरात दंगों को लेकर किताब भी लिखी है और इसमें उन्होंने मोदी को लेकर ऐसी कई बेसिर-पैर की बातें लिखी हैं जिससे साबित होता है कि उनकी रुचि तथ्यों से ज्यादा मोदी को बदनाम करने में थी। उनकी पत्नी नंदिनी सुंदर नक्सलियों के लिए काम करने के लिए जानी जाती हैं। उन पर एक आदिवासी की हत्या का केस भी चल रहा है। द हिंदू से नौकरी से निकाले जाने के बाद सिद्धार्थ वरदराजन ने द वायर.कॉम नाम से अपनी वेबसाइट खोल ली है। अब वो इसके जरिए मोदी विरोध के नाम पर देश विरोधी लेख और झूठी खबरें फैलाने का काम करते हैं। इसकी एक मिसाल आप नीचे की तस्वीर में देख सकते हैं जहां पर द वायर ने बंगाल में इस्लाम के खिलाफ फेसबुक पर विवादित पोस्ट लिखने वाले सौविक सरकार को हिंदुत्व एक्टिविस्ट बताया है।

कुछ दिन पहले ही द वायर ने हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर की डिग्री को फर्जी करार दिया। जबकि ये पूरी तरह निराधार खबर थी। बाद में पार्टी ने खट्टर के कॉलेज और उनके रोल नंबर से जुड़ी सारी जानकारियां जारी कर दीं। हैरानी की बात है कि वायर ने बिना किसी पुष्टि के ये खबर पोस्ट की थी। बाद में पोल खुलने पर माफी तक नहीं मांगी।

जेटली की मेहरबानी क्यों?

ये सवाल अक्सर उठता है कि सिद्धार्थ वरदराजन के लिए जेटली की मेहरबानी के पीछे क्या है? क्योंकि द वायर वेबसाइट पर अरुण जेटली के खिलाफ भी जमकर खबरें पोस्ट होती हैं। हमने इस बारे में कुछ जानकारों से बात की तो पता चला कि वास्तव में जेटली और वरदराजन के बीच एक तरह की साठगांठ है। द हिंदू में वरदराजन की संपादक की नौकरी सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका के कारण गई थी। स्वामी को जेटली भी पसंद नहीं करते। ऐसे में लगता यही है कि दुश्मन का दुश्मन दोस्त की नीति के तहत दोनों एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं। लेकिन जेटली की मंशा इससे भी कुछ अधिक मालूम होती है। जाहिर है अगर फौजी अफसरों के आगे सिद्धार्थ वरदराजन ने स्पीच दी है तो इसके लिए जेटली से ज्यादा मोदी की विश्वसनीयता को नुकसान होगा। जेटली अंदर ही अंदर शायद इसी अभियान में जुटे हुए है।

फिलहाल जेटली की इस हरकत का विरोध भी हो रहा है। रिटायर्ड मेजर सुरेंद्र पूनिया ने ट्विटर पर लिखा है कि अब क्या प्रकाश करात, संदीप दीक्षित, पार्थो घोस और आजम खान को भी बुलाया जाएगा कि वो आकर आर्मी अफसरों के सीख दें।

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