चीन के राजदूत से क्यों चोरी-छिपे मिले राहुल गांधी?

ऐसे वक्त में जब चीन के साथ भारत जंग के मुहाने पर है। बॉर्डर पर जबरदस्त तनातनी है। ऐसे में खबर आई है कि कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली में चीन के राजदूत के साथ सीक्रेट मीटिंग की है। एक अंग्रेजी न्यूज चैनल ने ये बड़ा खुलासा किया है। चैनल ने यह भी बताया है कि चीन के राजदूत लुओ झाओहुई से राहुल गांधी की ये मुलाकात 8 जुलाई को हुई। ये मुलाकात बहुत अहम है क्योंकि चीन से रिश्तों को लेकर राहुल गांधी सार्वजनिक तौर पर सरकार पर हमले करते रहे हैं। ऐसे वक्त में जब भारत ने कूटनीतिक तौर पर चीन को अलग-थलग कर दिया और उसकी सेना को सिक्किम में अपनी जमीन से पूरी तरह खदेड़ दिया। तब राहुल गांधी की यह सक्रियता शक पैदा कर रही है।

कांग्रेस का इनकार, दूतावास ने माना

ये खबर बाहर आने से कांग्रेस पार्टी सन्न है। पार्टी के प्रवक्ताओं ने फौरन बयान जारी करके कह दिया कि ऐसी कोई मुलाकात ही नहीं हुई है। जबकि चैनल इस मुलाकात से जुड़े कई तथ्य सामने ला चुका है। सबसे बड़ा तथ्य यह कि 9 जुलाई को दूतावास की वेबसाइट ने यह अपडेट किया कि राहुल और राजदूत की मुलाकात हुई है। लेकिन उन्होंने फौरन इसे डिलीट कर दिया। चैनल ने उस लिंक को गूगल से ढूंढ निकाला है। (देखें नीचे) पहली नजर में ही ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस पार्टी इस मुलाकात को लेकर कुछ छिपा रही है। आम तौर पर दूतावासों के अधिकारियों से होने वाली ऐसी मुलाकातों की जानकारी सार्वजनिक की जाती है। अगर किसी कार्यक्रम में जाते भी हैं तो उसकी तस्वीरें सोशल मीडिया के जरिए आ जाती हैं। लेकिन राहुल गांधी और चीन के राजदूत की ये मुलाकात बेहद गोपनीय रखी गई।

चीन को लेकर परेशान थे राहुल!

आम तौर पर ज्यादातर मुद्दों पर बेहद उदासीन रहने वाले राहुल गांधी चीन के सवाल पर काफी परेशान थे। इटली से लौटने के कुछ दिन के अंदर ही उन्होंने सबसे पहला बयान चीन के सवाल पर ही दिया। राहुल गांधी ने ट्विटर के जरिए चीन मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाया था। इसके अलावा उनकी पार्टी के करीबी प्रवक्ता भी इस मसले पर सरकार पर बिना किसी कारण हमले बोल रहे थे। जबकि जमीनी स्थिति यह है कि भारत के आक्रामक रुख के कारण चीन की सेना को सिक्किम में पीछे हटना पड़ा। खीझ में आकर उसने नाथुला से होकर जाने वाली मानसरोवर यात्रा तो रोक दी, लेकिन भारत अपने रुख से पीछे नहीं हटा।

भारत ने चीन को चौतरफा घेरा

पिछले महीने भारतीय सेना ने सिक्किम के डोका ला इलाके में चीन का सड़क निर्माण रोक दिया था। इसके बाद से ही चीन बॉर्डर पर दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। चीन भारत को युद्ध की धमकी दे रहा है, लेकिन खुद डरा हुआ है क्योंकि उधर साउथ दक्षिणी चीन सागर में अमेरिका और जापान ने उस पर दबाव बढ़ा दिया कि अगर वो भारत के खिलाफ कोई फौजी कार्रवाई करता है तो उसे वहां से हमला झेलना पड़ेगा। यहां तक कि ताइवान, हॉन्गकॉन्ग, थाइलैंड जैसे तमाम देश भारत के साथ हैं। भारत के सख्त रुख को इसी बात से समझा जा सकता है कि सेना ने यहां तक कह दिया कि वो अब यहां लंबे समय तक टिकने के लिए आई है और चीन को एक इंच जमीन भी नहीं हड़पने दी जाएगी।

संदिग्ध रहा है चीन का इतिहास

यहां हम आपको बता दें कि चीन को लेकर कांग्रेस पार्टी और खास तौर पर गांधी परिवार का इतिहास बेहद संदिग्ध रहा है। 1962 के युद्ध से पहले जवाहरलाल नेहरू ने चीन से दोस्ती के नाम पर उस पर खूब मेहरबानियां कीं। लेकिन चीन ने हमला कर दिया। इसके बाद नेहरू ने चीन को कैलाश मानसरोवर समेत भारतीय जमीन का बड़ा हिस्सा तोहफे में दे दिया। यहां तक कि चीन अरुणाचल प्रदेश पर भी दावेदारी ठोंकने लगा। लेकिन कांग्रेस पार्टी ने कभी भी उसके इस रवैये का कड़ा जवाब नहीं दिया। मोदी सरकार आने के बाद जब चीन ने पहली बार उलझने की कोशिश की तो उसे करारा जवाब मिला। ऐसे वक्त में राहुल गांधी की ये सक्रियता देश के लोगों में शक पैदा कर रही है कि कहीं दाल में कुछ काला तो नहीं। इससे पहले एक बार कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर केंद्र में मोदी सरकार को हटाने के लिए पाकिस्तान से खुली मदद मांग चुके हैं।

चीन के दूतावास का ये अपडेट है, जिसे उन्होंने फौरन डिलीट कर दिया:

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