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ममता के बंगाल में फिर जिहाद का शिकार हुए हिंदू!

बंगाल में ममता बनर्जी सरकार में कट्टरपंथी मुसलमानों का आतंक बढ़ता जा रहा है। अब बशीरहाट इलाके में हिंदुओं के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसा की खबरें आ रही हैं। सोशल मीडिया के जरिए पहुंची तस्वीरें दिल दहलाने वाली हैं। कोलकाता से मात्र 60 किलोमीटर दूर इस इलाके में करीब 2000 मुसलमानों की भीड़ ने हिंदुओं की दुकानों और मकानों में आगजनी की और एक पुलिस थाने पर भी हमला बोल दिया। ये हिंसा सोमवार को शुरू हुई। एक नाबालिग हिंदू लड़के की फेसबुक पोस्ट को लेकर ये तमाशा शुरू हुआ। कट्टरपंथियों की शिकायत पर पुलिस ने लड़के को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद मुसलमानों की भीड़ थाने पहुंच गई और मांग करने लगी कि उस लड़के को सौंपा जाए ताकि वो उसे शरिया कानून के मुताबिक सजा दे सकें। जिहादियों की भीड़ ने कस्बे में हिंदुओं के जितने भी मकान, दुकान दिखे सबमें आग लगा दी। बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय ने बताया है कि दंगाइयों ने कई जगहों पर बमबाजी की। हिंदू परिवार की कई बेटियों एवं बहनों से दुष्कर्म की भी सूचना मिली हैं। वहां बीजेपी के पांच कार्यालयों में भी आग लगा दी गई।

ममता सरकार ने खुली छूट दी

शुरुआती जानकारी के मुताबिक सोमवार को जब जिहादी हिंसा शुरू हुई तो स्थानीय प्रशासन और पुलिस काफी देर तक तमाशबीन बनी रही। चश्मदीदों का दावा है कि ऐसा लग रहा था कि उन्हें ऊपर से निर्देश मिले हैं कि कोई कार्रवाई नहीं की जाए। इस दौरान पूरे बशीरहाट में मुसलमानों ने घूम-घूमकर हिंदुओं के मकानों और दुकानों में लूटमार की और उन्हें आग के हवाले किया। इस दौरान हिंदू महिलाओं और लड़कियों के साथ बदसलूकी भी की गई। इस भीड़ की अगुवाई इलाके के कुछ मुस्लिम नेता और मस्जिद का मौलाना कर रहा था। इस भीड़ ने आरोपी लड़के के घर को पूरी तरह तहस-नहस करके उसमें आग लगा दी और उसके बूढ़े मां-बाप, छोटे भाई-बहन, चचेरे भाई और दूसरे रिश्तेदारों को बुरी तरह पीटा। चश्मदीदों के मुताबिक ममता सरकार ने ये सब करने के लिए करीब 6 से 8 घंटे की खुली छूट दे दी थी। घायलों में कई लोगों की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है। दंगाइयों ने वहां चल रही भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा को भी रुकवा दिया और रथ को पूरा तहस-नहस कर दिया। उत्तर 24 परगना जिले के पुलिस अधीक्षक भास्कर मुखर्जी की गाड़ी पर भी हमला किया गया, जिसमें उन्हें चोट आई हैं। हिंसा की आग स्वरूपनगर, बशीरहाट समेत आसपास के कई इलाकों में भी फैल गई।

बांग्लादेशी घुसपैठियों का हाथ

लोकल पुलिस के एक अधिकारी ने माना है कि बांग्लादेश के बॉर्डर से लगा इलाका होने के कारण यहां बड़े पैमाने पर घुसपैठ होती रही है। इस पूरी हिंसा के पीछे बांग्लादेशियों का ही हाथ बताया जा रहा है। वोट बैंक की खातिर ममता बनर्जी सरकार ने इन्हें खुले तौर पर शह दे रखी है। यहां तक कि हिंसा के बाद लाउडस्पीकरों पर हिंदू इलाकों में चेतावनी दी जा रही है कि लोग घरों में रहें। अगर उन्होंने हिंसा करने की कोशिश की तो सख्ती बरती जाएगी। बंगाल पुलिस का यही रवैया है जिसके कारण बांग्लादेशी और कट्टरपंथी मुसलमानों को बढ़ावा मिल रहा है। बिल्कुल इसी तरीके से पिछले साल बंगाल में कालियाचक और धुलागढ़ में भी इसी तरह हिंदू परिवारों को निशाना बनाया गया था। सैकड़ों मकानें और दुकान जला दी गई थीं।

केंद्र के दबाव के बाद कार्रवाई

बताया जा रहा है कि राज्यपाल और केंद्र सरकार के दबाव के बाद ममता बनर्जी सरकार को बशीरहाट में हालात काबू करने के लिए मजबूर होना पड़ा।केंद्र सरकार ने ही बीएसएफ की चार टुकड़ियां भेजी हैं। साथ ही रैपिड एक्शन फोर्स को भी तैनात किया गया है। बंगाल के राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी ने जब हालात की जानकारी के लिए ममता बनर्जी को फोन किया तो उन्होंने जवाब देने के बजाय यह कहना शुरू किया कि राज्यपाल ने फोन करके मेरा अपमान किया है। इतना ही नहीं, ममता ने यहां तक आरोप लगा दिया कि राज्यपाल हिंदुओं का पक्ष ले रहे हैं।

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